चीन का ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ प्रोजेक्ट और मरुस्थलीकरण पर नियंत्रण

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(मोहम्मद आरिफ, डिजिटल टेक रिपोर्टर)

 

दिनांक: 26 मार्च 2026

 

चीन वर्तमान में गोबी जैसे दुनिया के सबसे बड़े मरुस्थलों के विस्तार को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व वृक्षारोपण अभियान चला रहा है। “ग्रेट ग्रीन वॉल” (Great Green Wall) के नाम से प्रसिद्ध यह प्रोजेक्ट 1978 में शुरू किया गया था और इसे 2050 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह दुनिया का सबसे बड़ा इकोलॉजिकल (पारिस्थितिक) प्रोजेक्ट है।

 

प्रोजेक्ट की आवश्यकता और मुख्य उद्देश्य:

मरुस्थलीकरण पर रोक: चीन की उपजाऊ जमीन तेजी से रेत में तब्दील हो रही थी। लगाए जा रहे पेड़ों की कतारें एक प्राकृतिक दीवार का काम कर रही हैं, जो रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती हैं।

 

धूल के तूफानों से बचाव: बीजिंग और अन्य प्रमुख शहरों में आने वाले खतरनाक रेत के तूफानों को रोकना। पेड़ हवा की गति को धीमा करके धूल के कणों को रोकते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है।

 

प्रदूषण नियंत्रण: यह विशाल ग्रीन बेल्ट वातावरण से कार्बन और अन्य जहरीली गैसों को सोखकर प्रदूषण कम करने और ऑक्सीजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।

 

भूमि सुधार और उर्वरता: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, जिससे बंजर भूमि पर पुनः घास और अन्य वनस्पतियां उगने लगी हैं।

 

मिशन की प्रमुख उपलब्धियां और विशेषताएं:

विशाल पैमाना: अब तक इस अभियान के तहत अरबों पेड़ लगाए जा चुके हैं, जिससे हजारों किलोमीटर के बंजर इलाके को हरे-भरे क्षेत्र में बदल दिया गया है।

 

आधुनिक तकनीक का उपयोग: चीन वृक्षारोपण के लिए ड्रोन और विशेष जल-संरक्षण तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि कम पानी वाले रेगिस्तानी इलाकों में भी पौधे जीवित रह सकें।

 

पर्यावरणीय चिंताएं और चुनौतियां:

इस प्रोजेक्ट की अपार सफलताओं के बावजूद, कुछ विशेषज्ञों ने निम्नलिखित चिंताएं व्यक्त की हैं:

 

जल संकट का खतरा: रेगिस्तानी क्षेत्रों में भूजल सीमित होता है। अत्यधिक संख्या में पेड़ लगाने से जमीन का सारा पानी सोखा जा सकता है, जो भविष्य में गंभीर जल संकट का कारण बन सकता है।

 

मोनोकल्चर (एकल खेती) का जोखिम: यदि बड़े पैमाने पर एक ही प्रजाति के पेड़ लगाए जाते हैं, तो उनमें एक साथ बीमारी फैलने और पूरे जंगल के नष्ट होने का खतरा बहुत अधिक रहता है।

 

निष्कर्ष:

चीन का ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए जल प्रबंधन और जैव विविधता (Biodiversity) पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।

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