परिवहन कार्यालय दलालों की गिरफ्त में, कर्मचारियों की सांठगांठ से चल रहा खेल
Ajay Namdev-7610528622
अनूपपुर। जिला मुख्यालय स्थित परिवहन कार्यालय इन दिनों पूरी तरह से दलालों की गिरफ्त में है। अधिकारियों व कर्मचारियों से ज्यादा दलालों व उनके ग्राहकों की कार्यालयों में घुसपैठ है। आमजन को नियमों का पाठ रटाया जाता है, लेकिन दलाल नियमों को ताक में रखकर चंद दिनों में मनमाने काम करवा लाते हैं। यही कारण है कि अवधि पार खटारा गाडिय़ां नये कागजों से सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही हैं। इसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है।दावे का निकला दम
एक साल पहले ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने दलाली पर रोक लगाने के लिए कार्यालय को ऑनलाइन कर दिया, पर कुछ दिनों बाद ही कर्मचारियों से मिलीभगत कर दलालों ने इसका भी रास्ता निकाल लिया। बता दें कि कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, टैक्स डिपोजिट के साथ ही डीएल चाहने वालों को ऑनलाइन टेस्ट देना होता है। इसके लिए कार्यालय में कंप्यूटर लगाए गए हैं। वहीं अन्य कार्यो के लिए भी कंप्यूटर लगे हैं। इतने के बाद भी कार्यालय पहुंचने वालों को आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का झांसा देकर मनमाना पैसा ऐंठा जा रहा है। इसी चक्कर में उन्हें फेल तक करा दिया जा रहा है।
लोगों से लूट रहे पैसे 
कार्यालय में भोले भाले लोगों से किस तरह ठगी हो रही है यह जानकर आपके पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी। जिस ड्राइविंग लाइसेंस के लर्निग को बनाने के लिए आरटीओ में कम राशि फीस के रूप में जमा होता है उसके लिए दलाल अधिक रुपये ले रहे हैं। जबकि टू-व्हीलर को चलाने के लिए लर्निग लाइसेंस का मात्र दो सौ से चार सौ रुपये ही जमा होता है। 500 रुपये 800 रूपये में तो कार व टू-व्हीलर दोनों के लिए लर्निग लाइसेंस मिल जाता है। वहीं कार व टू-व्हीलर दोनों के परमानेंट डीएल के लिए 1000 व केवल टू-व्हीलर का डीएल चाहने वाले को 700 रुपये फीस देना होता है। अगर डिपार्टमेंट दलालों पर रोक लगा दे तो लोगों की जेब न कटे।
फेल से पास तक
डिपार्टमेंट में कर्मचारियों व दलालों का जबरदस्त गठजोड़ है। पैसा ऐंठने के लिए ये किसी हद तक चले जा रहे हैं। लर्निग लाइसेंस चाहने वालों को पहले फेल कर दिया जा रहा है। जब उनसे सेटिंग हो जा रही है तो उन्हें पास कर देने का खेल जोरों पर चल रहा है। हालात यह है कि टेस्ट देने वाला कंप्यूटर न भी जानता हो तो कोई बात नहीं। दलाल उसे पास करा दे रहे हैं। सोर्सेज के मुताबिक कंप्यूटर के सामने एप्लिकेंट के टेस्ट देने के लिए बैठते ही उसके पीछे दलाल खड़े हो जा रहे हैं। जो पूरा प्रॉसेस मिनटों में ही कम्प्लीट करा रहे दे रहे हैं। वहीं जिनकी दलालों से सेटिंग नहीं हो पा रही है वह फेल हो जा रहा है। जबकि नियमानुसार डीएल बनवाने वाले को कंप्यूटर पर अकेले ही बैठना है। उसके आसपास कोई नहीं होगा।
दलालों का फैला मायाजाल
परिवहन कार्यालय अनूपपुर में जब से आरटीओ श्री सोनवानी की पदस्थापना हुई है। तब से शहडोल में मोटर ड्राइविंग स्कूल चलाने वाले ने अपना डेरा अनूपपुर में जमा लिया है और परिवहन अधिकारी के लिए पूरी दलाली का काम कथित दलाल के द्वारा कार्यालय से लेकर सड़कों पर होने वाली चेकिंग तक के कामों में पूरा दखल है और आरटीओ के नाम पर पूरी वसूली की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि इसमें परिवहन अधिकारी की भी स्वीकृति है।