अराजकता अख्तियार कर बीईओ सोहागपुर ने बटोरा पैसा

0

आडिट रिपोर्ट से हुआ खुलासा, नियमों का किया उल्लंघन

शहडोल। शिक्षा विभाग के उच्च पदों पर बैठे अधिकारी अब चरित्र और नैतिकता को दरकिनार कर इस हद तक पैसा परस्त बन चुके हैं कि वे गड्डियां बटोरने की खातिर अराजकता अ ितयार करने से भी नहंी चूकते हैं। हालांकि इनकी करतूतों का भांडा जब-तब फूटता ही रहता है, लेकिन इन पर कार्रवाई बहुत कम ही होती है। बड़े अफसर इन पर मेहरबान रहते हैं, क्योंकि वे भी इनकी पंगत मेें बैठकर मलाई छानने के आदी हो चुके हैं। शिक्षा वि ााग का भ्रष्टाचार मानो संस्थागत हो चुका है। बीइओ सोहागपुर एसपी सिंह चंदेल का शासकीय सफरनामा भी कुछ ऐसा ही है। नवंबर 2015 में लालपुर शासकीय हाई स्कूल प्राचार्य पद से स्थानांतरित कर प्रभारी बीइओ सोहागपुर बनाए गए श्री चंदेल ने अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं की झड़ी लगा दी है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को है इसके बाद भी इन पर कोई आंच नहीं आ रही है। दिसंबर 2016 से जून 2019 तक की अवधि की लेखा परीक्षा महालेखाकार ग्वालियर द्वारा आडिट की गई थी। जिसमें विभिन्न मदों में इनके द्वारा करोड़ों का गोलमाल किया जाना पकड़ा गया था। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों की ओर भेजी गई थी लेकिन श्री चंदेल आज भी विधिवत बीईओ सोहागपुर का कार्य संचालित कर रहे हैं। इनकी मलाई से बड़े अधिकारी कितने खुश हैं यह इसी बात से पता चलता है। उक्त आडिट रिपोर्ट की झलकियां प्रकाश में लाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके अवलोकन से श्री चंदेल की कार्यशैली और उनकी करतूतों का खुलासा होता है।
नियमानुसार पंजी संधारण नहीं
लेखा परीक्षा अवधि दिसंबर 2016 से जून 2019 तक की कार्यालय संधारित रोकड़बही/ देयक पंजी की जांच में पाया गया कि कार्यालय द्वारा कोषालय के लगाए गए देयकों में से असफल रहे संव्यवहारों  के विरुद्ध उक्त अवधि में पुन: 122 देयकों से राशि 30लाख 38 हजार 326 रुपए का संव्यवहार किया गया। यह राशि छात्रवृत्ति व अन्य मदों से संबंधित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें यह पता नहींं चलता है कि भुगतान पात्र हितग्राही को ही किया गया है। वास्तव में असफल संव्यवहारों से संबंधित पंजी का संधारण किया जाकर उनके विरुद्ध पुन:  लगाए गए देयकों का विवरण पंजी में दर्ज किया जाना चाहिए। इसके उत्तर में कहा गया है कि पंजी संधारित की गई है, लेकिन यह उत्तर मान्य नहीं है क्योंकि पंजी मेें देयक क्रमांक अंकित नहीं है। किस देयक से संव्यवहार असफल रहा तथा किस देयक क्रमांक से पुन: देयक तैयार कर कोषालय में प्रस्तुत किया गया। जिससे यह सत्यापन नहीं होता कि वास्तव में असफल रहे संव्यवहारों के देयक तैयार कर पुन: भुगतान किया गया है। स्थिति उच्चाधिकारियों के ध्यान में लायी गई है।
भुगतान अभिलेख संधारित नहीं
बीइओ द्वारा अतिथि शिक्षकों का भुगतान संबंधी अभिलेख का संधारण नहीं किया गया है। जबकि 53 लाख 72 हजार का भुगतान किया गया है। न तो अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति/ चयन संबंधी कोई अभिलेख संधारित किया गया, न ही संबंधित प्राचार्य से समस्त प्रक्रिया पूर्ण कर नियुक्ति की गई। जिससे भुगतान की जांच लेखा परीक्षा में सुनिश्चित नहीं हो सकी। उत्तर में बताया गया कि चयन संबंधी  समस्त प्रक्रिया विद्यालय स्तर पर की जाती है। केवल देयक भुगतान हेतु प्रस्तुत किये जाते हैं। यह उत्तर मान्य नहीं है क्यंोंकि अतिथि शिक्षकों का भुगतान कार्यालय से किया जाता है तो प्रमाणपत्र या  अभिलेख मांगे जाने चाहिए। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तव में अतिथि शिक्षकों को रखा गया है। स्थिति उच्चाधिकारियों के ध्यान में लायी गई है।
व्यय व्हाउचर्स व उपयोगिता प्रमाणपत्र नहींं
गणवेश हेतु प्रदाय की गई राशि के व्यय व्हाउचर्स/ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो सके। जबकि इस पर 18. 84 लाख की राशि का व्यय दर्शाया गया है। बीईओ कार्यालय द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों का नमूना जांच में पाया गया कि लेखा परीक्षा अवधि माह दिसंबर 2016से जून 2019 तक में गणवेश योजनातंर्गत प्राप्त आवंटन को कोषालय से आहरित कर राशि 1884170 रुपए छात्रों/पालकों के खातों में जमा की गई। उपरोक्त राशि के व्यय व्हाउचर्स / उपयोगिता प्रमाण पत्र/ छात्रों की सूची अप्राप्त रही। गणवेश की राशि के संबंध में जो जरूरी प्रक्रियाएं होनी चाहिए थी उनमें से इन आवश्यक औपचारिकताओं को पूर्ण नहीं किया गया। इसलिए जांच में इसे भी दोषपूर्ण माना गया है।
सायकिल वितरण में निरर्थक व्यय
आवश्यकता से अधिक सायकिल प्राप्त कर 5.87 लाख रुपए के सरकारी धन का निरर्थक व्यय किया जाना पाया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 के लिए जरूरत से ज्यादा सायकिलें प्राप्त कर राशि का निरर्थक व्यय किया गया है। सायकिल वितरण की स्थिति इस प्रकार है- 2017-18 में प्राप्त सायकिलों की सं या 2142 रही, इनमें से 1878 बंटी जबकि 264 शेष बचीं। वर्ष 2018-19 के लिए 1419 सायकिलें प्राप्त की गईं। इनमें पिछली शेष 264 भी जोड़ दी गईं और 1683 सायकिलों का आवंटन किया गया। जबकि 184 सायकिलें फिर शेष रह गईं। प्रति सायकिल मूल्य 3192 रुपए की दर से 184 सायकिलों का मूल्य 587328 रुपए होता है। यह 184 सायकिलें अधिक रहीं। जिससे शासन का यह धन अनावश्यक ब्यय हुआ। यदि वास्तविक हितग्राहियों का सत्यापन कर मांगपत्र भेजा जाता तो अधिक सायकिलें नहीं भेजी जातीं। उत्तर में कहा गया कि सामग्री प्रदाता अधिक सायकिलें भेजते हैं, यह उत्तर मान्य नहीं है क्योंकि इससे शासन की राशि अवरुद्ध होती है और सायकिलों के टायर-ट्यूब आदि खराब होने की संभावना भी बनी रहती है।
********
इनका कहना है
मामले की जानकारी मुझे नहीं है, दस्तावेज देखकर ही कुछ कह पाऊंगी।
श्रीमती वंदना वैद्य
कलेक्टर, शहडोल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!