संलग्रीकरण समाप्त होने के महीनों बाद भी नहीं हटे प्राचार्य

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स्कूल में बढ़ रही अनुशासनहीनता, अधिकारी के आदेश का उल्लंघन

 

उमरिया। शैक्षणिक वातावरण बिगडऩे की सबसे अधिक समस्या पाली विकासखण्ड की स्कूलों में है जहां लगभग
अराजकता का माहौल व्याप्त है। यहां बड़े अफसरों के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर मनमाना आचरण किया जा रहा
है। इसका एक बड़ा उदाहरण घुनघुटी शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला है। जो कि एक अर्से से अनुशासनहीनता
और अव्यवस्थाओं का अड्डा बना हुआ है। यहां संलग्रीकृत प्राचार्य का संलग्नीकरण फरवरी 2023 में सहायक
आयुक्त ट्रायबल के आदेश से समाप्त हो गया था। लेकिन आज तक प्राचार्य यहीं पर डटे हैं। उनका पाया नहीं हिला,
उनके लिए शायद और बड़े अधिकारी का आदेश चाहिए। जबकि यहां प्राचार्य पिछले 6 वर्षों से डटे हुए हैं।
स्थानांतरण आदेश को ठेंगा
वर्ष 2017 में आदेश हुआ था कि प्राध्यापक शासकीय माध्यमिक शाला अमिलिहा रजनीश कुमार नीरज को व्यवस्था
हेतु शासकीय माध्यमिक शाला घुनघुटी किया गया। लेकिन इनकी कार्यशैली के चलते हमेशा अभिभावकों व ग्रामीणों
में असंतोष व्याप्त रहा। इस कारण सीएम हेल्प लाइन में इनकी शिकायत हो गई। शिकायत में जांच के बाद पाया
गया कि इन्हे व्यवस्था हेतु शासकीय माध्यमिक शाला घुनघुटी में संलग्र किया गया था। इसके बाद शासन के
निर्देशानुसार 27 फरवरी को सहायक आयुक्त ट्रायबल ने आदेश दिया कि प्राध्यापक का संलग्रीकरण समाप्त कर
उपरोक्त आदेश अपास्त करते हुए मूल पद स्थापना स्थान अमिलिहा शासकीय माध्यमिक शाला अमिलिहा वापस
किया जाता है। तथा शासकी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घुनघुटी का प्रभार कृष्ण कुमार साकेत उच्चतर
माध्यमिक विद्यालय शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व आगामी आदेश तक सौंपा जाता है। यह आदेश तत्काल

से ेप्रभावशील होगा। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी वे जहां के तहां डटे हैं। उनके नहीं जाने से उनकी जगह
जिस शिक्षक की नियुक्ति की गई वह भी कार्यभार नहीं ले पा रहा है।
दुर्दशाग्रस्त हो रही स्कूल
बताया जाता है कि जब से रजनीश कुमार यहां पदस्थ हुए हैं तब से स्कूल की दुर्दशा हो रही है। न तो समय से स्कूल
खुलती है और न ढंग से पढ़ाई हो रही है। इसी अव्यवस्थाओं के बीच वर्षों से घुनघुटी उच्चतर माध्यमिक शाला
संचालित है। स्कूल के मैदान की हालत देखी जा सकती है, मेनगेट के ठीक सामने ही खाइनुमा गड्ढा खोद दिया गया
है। मैदान का रखरखाव करने और खेेल सुविधाओं में इजाफा क रने की बजाय मैदान की हालत खराब कर दी गई है।
बच्चों को यहां खेलों के लिए खेल सामग्री और किट वगैरह भी नहीं मिलती है और न ही प्राचार्य को इन सुविधाओं से
कोई लेेना देना ही है। स्कूल की पढ़ाई लिखाई तो पहले से ही चौपट है। बड़े अधिकारी यहंा कभी मॉनीटरिंग करने नहीं
आते हैं।
पनप रहा आक्रेाश
घुनघुटी स्कूल की स्थिति देखकर बच्चों के अभिभावक भी खुश नहीं है। क्योंकि न तो पढ़ाई ढंग से होती है और न
शिक्षक पढ़ाई लिखाई की ओर ध्यान देते हैं। एक ओर शासन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ध्यान देने के निर्देश देता है
और दूसरी ओर यहां के शिक्षक अनुशासनहीनता बरतने में सबसेे आगे हैं वे बच्चों की क्लास बहुत कम लेते हैं। बच्चोंं
को सब अपने से ही तैयारी करनी पड़ती है। कई बच्चे फिसड्डी भी रह जाते हैं। बच्चोंं के भविष्य से खिलवाड़ करने में
कसर नहीं छोड़ी जा रही है फिर बच्चों के अभिभावक शिक्षकों से कैसे संतुष्ट रह सकते हैं। बताते हैं कि शिक्षक यहंा
क्लास लेने सेे कतराते हैं।

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