अस्पताल में इलाज नहीं, बीमारी परोसी जा रही है जिला चिकित्सालय में बाल्टी में भोजन, मरीजों की सेहत से खुला खिलवाड़ तीन नोटिस के बाद भी ठेकेदार पर मेहरबानी, अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी पर उठे सवाल

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अस्पताल में इलाज नहीं, बीमारी परोसी जा रही है
जिला चिकित्सालय में बाल्टी में भोजन, मरीजों की सेहत से खुला खिलवाड़
तीन नोटिस के बाद भी ठेकेदार पर मेहरबानी,
अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी पर उठे सवाल
जिला चिकित्सालय कटनी की स्थिति अब केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही और संभावित आपराधिक उदासीनता का मामला बन चुकी है। जहाँ मरीज इलाज के लिए भर्ती होते हैं, वहीं उन्हें कुपोषण, संक्रमण और अपमान परोसा जा रहा है और वह भी बाल्टी में।
कटनी।। जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों, गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को थाली की जगह बाल्टी में भोजन दिया जा रहा है। शासन द्वारा तय डाइट चार्ट, मात्रा और स्वच्छता मानकों को खुलेआम रौंदा जा रहा है, लेकिन तीन-तीन नोटिस के बावजूद न ठेका निरस्त हुआ, न दंड लगा। भोजन की मात्रा कम, फल–सलाद गायब, दूध–नाश्ते में अनियमितता और बर्तन न होने पर भोजन से वंचित करना—ये सब अब रोजमर्रा की हकीकत बन चुके हैं। सवाल यह है कि क्या जिला चिकित्सालय में मरीजों को स्वस्थ करने के बजाय बीमार बनाने की तैयारी हो रही है? इंदौर जैसी घटनाओं के बाद भी यदि प्रशासन नहीं जागा, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जिला चिकित्सालय, जिसे आमजन के लिए जीवन रक्षक संस्था माना जाता है, वही आज मरीजों के लिए बीमारी का केंद्र बनता जा रहा है। भर्ती मरीजों, गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को दिया जाने वाला भोजन न केवल शासन द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत है, बल्कि सीधे तौर पर उन्हें कुपोषण, संक्रमण और गंभीर बीमारियों की ओर धकेलने वाला साबित हो रहा है।
ताजा मामला जिला चिकित्सालय का है, जहाँ मरीजों को थाली में नहीं बल्कि बाल्टी में भरकर भोजन वार्डों में पहुँचाया जा रहा है। यह दृश्य न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या अस्पताल प्रबंधन ने स्वच्छता, गरिमा और मानवाधिकारों से पूरी तरह हाथ खींच लिया है?
भोजन नहीं, बीमारी का न्योता
शिकायत के अनुसार अस्पताल में रोटी, दाल, सब्जी, लड्डू, दूध आदि की निर्धारित मात्रा वजन जानबूझकर कम दी जा रही है। डाइट चार्ट में शामिल फल और सलाद गायब हैं। दूध, चाय और नाश्ते के समय व मात्रा में भारी अनियमितता है। जिन मरीजों के पास बर्तन नहीं होते, उन्हें भोजन तक नहीं दिया जाता। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार का कुपोषण और अस्वच्छ भोजन गंभीर संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, एनीमिया और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट का कारण बन सकता है, जो पहले से बीमार मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।


तीन नोटिस, शून्य कार्रवाई — संरक्षण किसका?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद संबंधित भोजन ठेकेदार को 14 जुलाई 2025, 12 अगस्त 2025 और 18 अगस्त 2025 को तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद न ठेका निरस्त हुआ,न आर्थिक दंड लगा, न व्यवस्था में वास्तविक सुधार हुआ। यह स्थिति अब केवल ठेकेदार की लापरवाही नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की मौन स्वीकृति और संदिग्ध भूमिका की ओर भी स्पष्ट संकेत करती है।


RTI में भी पर्दा डालने की कोशिश
इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी भी आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई। जबकि सिविल सर्जन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे। यह सीधे तौर पर RTI Act 2005 की धारा 7 और 20 का उल्लंघन है और यह संदेह और गहरा करता है कि कहीं भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को जानबूझकर छुपाया तो नहीं जा रहा?
इंदौर की मौतों से भी नहीं चेता प्रशासन?
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी और खाद्य व्यवस्था के कारण हुई मौतों के बाद भी यदि जिला चिकित्सालय कटनी की यह स्थिति बनी हुई है, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी और अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिला प्रशासन से सीधी मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर जनसुनवाई में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि बिना पूर्व सूचना आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। भोजन की मात्रा, गुणवत्ता और स्वच्छता की स्वतंत्र जांच हो। दोषी ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई एवं FIR दर्ज हो। नोटिस के बावजूद चुप रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। RTI में जानकारी दबाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई हो
यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि संभावित जनहानि की चेतावनी है। अब यदि अस्पताल में भोजन से जुड़ी कोई गंभीर घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि मौन साधे बैठे अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की भी होगी। RTI के तहत जानकारी दबाना इस संदेह को और मजबूत करता है कि कहीं यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का ढका–छुपा खेल तो नहीं? इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें अभी भी स्मृति में ताजा हैं। यदि कटनी में भी प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए, तो कल किसी अप्रिय घटना के बाद जिम्मेदारी से भागा नहीं जा सकेगा। अब यह केवल अस्पताल का मामला नहीं रहा यह जनस्वास्थ्य, मानवाधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है।

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