आस्था का नवोन्मेष: भक्ति के आलोक में एक ऐतिहासिक बुधवार सिविल लाइन गणेश मंदिर में हर बुधवार सजेगा विघ्नहर्ता का दरबार होगी 108 आरतियों की दिव्य महाआरती,नववर्ष से गणेश मंदिर में जुड़ा आस्था का नया अध्याय
आस्था का नवोन्मेष: भक्ति के आलोक में एक ऐतिहासिक बुधवार
सिविल लाइन गणेश मंदिर में हर बुधवार सजेगा विघ्नहर्ता का दरबार होगी 108 आरतियों की दिव्य महाआरती,नववर्ष से गणेश मंदिर में जुड़ा आस्था का नया अध्याय
कटनी।। नगर की आध्यात्मिक परंपरा एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है। शहर में स्थित सिविल लाइन का अति प्राचीन श्री गणेश मंदिर अब केवल स्थानीय आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि वह एक ऐसी आध्यात्मिक धुरी बनता जा रहा है, जहाँ परंपरा, श्रद्धा और सामूहिक चेतना का दुर्लभ संगम देखने को मिल रहा है।
अंग्रेजी नववर्ष के प्रथम बुधवार से यहाँ हर सप्ताह आयोजित होने वाली 108 आरतियों से सजी विशाल महाआरती ने शहर की धार्मिक दिनचर्या को एक नई पहचान दी है। दीपों की पंक्तियाँ, मंत्रोच्चार की गूंज और अनुशासित भक्ति भाव यह दृश्य उस नगर की झलक प्रस्तुत करता है, यह कोई साधारण आरती नहीं, बल्कि 108 आरतियों से सजी भव्य महाआरती जिसमें मंत्रोच्चार, दीपों का प्रकाश और श्रद्धा की ऊर्जा एक साथ प्रवाहित हुई। जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, वातावरण में ‘वक्रतुंड महाकाय’ की गूंज के साथ भक्ति की ऐसी तरंग उठी, जिसने उपस्थित प्रत्येक भक्त को भाव-विभोर कर दिया। इस ऐतिहासिक आयोजन में इस प्राचीन मंदिर के संस्थापक अग्रवाल परिवार सहित शहर के वे नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी नस-नस में आस्था बसती है और जिनके लिए भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन का अनुशासन है। जहाँ आस्था केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में मंदिर के संस्थापक अग्रवाल परिवार सहित विभिन्न वर्गों के श्रद्धालु नागरिकों की सहभागिता रही। भगवान श्री गणेश को प्रिय मगज मोदक का भोग अर्पित किया गया, जिसके पश्चात भक्तों के बीच केला और बूंदी प्रसाद का वितरण किया गया यह दर्शाता है कि आस्था में पूजा के साथ सेवा और सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अग्रवाल परिवार मानते हैं कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता, मानसिक शांति और सामूहिक सकारात्मकता को सुदृढ़ करते हैं। सिविल लाइन गणेश मंदिर में प्रारंभ हुई यह साप्ताहिक महाआरती उसी सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है, जो नगर को सदियों से विश्व की आध्यात्मिक चेतना का मार्गदर्शक बनाती आई है। आज जब दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तब कटनी जैसे शहर से उठी यह भक्ति की लौ यह संदेश देती है कि आधुनिकता और अध्यात्म साथ-साथ चल सकते हैं। हर बुधवार सिविल लाइन गणेश मंदिर से उठने वाली आरती की यह ध्वनि अब केवल कटनी तक सीमित नहीं, बल्कि वह सनातन आत्मा की एक वैश्विक अभिव्यक्ति बनती जा रही है। नगर के धार्मिक सांस्कृतिक इतिहास में आस्था के संगम का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। विशेष बात यह है कि यह आयोजन अब निरंतर प्रत्येक बुधवार संपन्न होगा। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नगर के सामाजिक जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन, सामूहिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का स्थायी स्तंभ बनने जा रहा है।