रेलवे कॉरिडोर के लिए आयोजित अनूपपुर थर्मल प्रोजेक्ट की जनसुनवाई सवालों के घेरे में

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औपचारिकता निभाने तक रही सीमित, पेशा एक्ट के प्रावधानों को दरकिनार करने लगे आरोप
(अरविन्द द्विवेदी)
अनूपपुर। जिले में प्रस्तावित अनूपपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर आयोजित जनसुनवाई अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने जनसुनवाई प्रक्रिया को महज़ औपचारिकता करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों, किसानों के अधिकारों से जुड़े कानूनों की भावना के अनुरूप नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनसुनवाई का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों की वास्तविक राय जानना होता है, लेकिन अनूपपुर में आयोजित जनसुनवाई में यह उद्देश्य कहीं नज़र नहीं आया। ग्रामीणों के अनुसार, पहले से तय एजेंडे के तहत कार्यवाही पूरी की गई और आपत्तियों को गंभीरता से नहीं सुना गया।
पेशा एक्ट के प्रावधानों की हुई अनदेखी 
आरोप है कि जनसुनवाई के दौरान पेसा एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ग्राम सभाओं की पूर्व सहमति न तो विधिवत ली गई और न ही उनकी आपत्तियों को लिखित रूप में दर्ज किया गया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई प्रभावित गांवों को जनसुनवाई की सूचना समय पर नहीं दी गई जिससे बड़ी संख्या में लोग अपनी बात रखने से वंचित रह गए। वहीं पेशा एक्ट के तहत भूमि अर्जन से जुड़ी जनसुनवाई प्रत्येक प्रभावित गांव में अलग-अलग आयोजित की जानी चाहिए थी लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए आठ गांवों की जनसुनवाई एक ही स्थान पर कर दी गई। बैहाटोला के उपसरपंच श्याम मुरारी शर्मा ने इस प्रक्रिया को अवैधानिक बताते हुए औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
वास्तविक उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी नहीं 
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न तो जनसुनवाई के वास्तविक उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया जिसकी वजह से कई प्रभावित परिवार जनसुनवाई में शामिल ही नहीं हो सके। मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह जनसुनवाई कानून का पालन करने से ज्यादा औपचारिकता निभाने तक सीमित रही। दूसरी ओर प्रशासन और कंपनी की ओर से जनसुनवाई को सफल बताते हुए दावा किया गया है कि करीब 500 ग्रामीणों ने भू-अर्जन के समर्थन में सहमति दी। लोक सुनवाई में कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना के पक्ष में रोजगार, विकास और बिजली की बढ़ती जरूरतों का हवाला दिया।
संवैधानिक अधिकारों को किया दरकिनार 
हालांकि अब इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के समय जनसुनवाई आयोजित कर देना क्या वास्तव में उचित था.? इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों को दरकिनार कर जनसुनवाई कराई गई। अब सवाल उठता है कि ग्रामीणों की जो सहमति दर्शाई जा रही है वह सूचित सहमति (Informed Consent) थी या फिर महज़ कागजी कार्रवाई तक सीमित रही.? ऐसे में अनूपपुर थर्मल प्रोजेक्ट से जुड़ा यह पूरा विवाद न केवल प्रशासन, बल्कि परियोजना के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों स्तरों पर और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
सर्वे रिपोर्ट महज कोरम पूर्ति – रामजी रिंकू मिश्रा
अनूपपुर थर्मल एनर्जी (म.प्र.) प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित रेलवे कॉरिडोर के लिए आयोजित भू-अर्जन संबंधी जनसुनवाई के दौरान जो जानकारी सार्वजनिक की गई उसकी कोई रिपोर्ट नहीं दी बल्कि सर्वे रिपोर्ट को महज पढ़ कर सुनाया गया जबकि सामाजिक समाघात रिपोर्ट मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (LARR Act) के तहत की जाती है। जिसमें किसी भी बड़ी परियोजना से स्थानीय लोगों, समाज और उनकी जीवनशैली पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन होता है कि कितने लोग प्रभावित होंगे, विस्थापन होगा या नहीं। आजीविका, रोजगार और खेती पर क्या असर पड़ेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और सामाजिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा आदि। जबकि कंपनी के द्वारा SIA रिपोर्ट तैयार करते समय जनसुनवाई और ग्राम सभा की राय लेना जरूरी एवं प्रभावित लोगों की आपत्तियाँ और सुझाव रिपोर्ट का हिस्सा बनाना भी जरूरी होता है किंतु इन सभी आवश्यक जानकारियों को डर किनार करते हुए जिस तरह से सर्वे रिपोर्ट की जानकारी महज़ मौखिक रूप से दी गई वो कहीं से भी जनता के हित में नहीं। इसी बात को लेकर जिला पंचायत सदस्य रामजी ‘रिंकू’ मिश्रा ने ग्रामीणों के साथ मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

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