सिर पर कलश, मन में भक्ति… मातृशक्ति के चरणों से पावन हुआ नगर…..जब कलशों से सजी मातृशक्ति चली, तो नगर ने देखी भक्ति की सबसे दिव्य यात्रा धर्मध्वजों से सजा पूरा शहर हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली शहर की सबसे लंबी ऐतिहासिक कलश यात्रा, श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व उमड़ा आस्था का सागर,प.पू. पं. इन्द्रेश उपाध्याय महाराज की भागवत कथा से पूर्व हजारों श्रद्धालुओं ने रचा भक्ति का विराट दृश्य नगर के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
सिर पर कलश, मन में भक्ति… मातृशक्ति के चरणों से पावन हुआ नगर…..जब कलशों से सजी मातृशक्ति चली, तो नगर ने देखी भक्ति की सबसे दिव्य यात्रा धर्मध्वजों से सजा पूरा शहर
हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली शहर की सबसे लंबी ऐतिहासिक कलश यात्रा, श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व उमड़ा आस्था का सागर,प.पू. पं. इन्द्रेश उपाध्याय महाराज की भागवत कथा से पूर्व हजारों श्रद्धालुओं ने रचा भक्ति का विराट दृश्य नगर के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
कटनी।। कुछ दिन ऐसे होते हैं, जब कोई नगर केवल ईंट-पत्थर, सड़कें और बाजार नहीं रह जाता वह भावनाओं की धरोहर बन जाता है। ऐसा ही एक दुर्लभ और पावन क्षण नगर ने अनुभव किया, जब श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के शुभारंभ पर नगर ने स्वयं को भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के चरणों में अर्पित कर दिया।

कटनी के इतिहास में पहली बार ऐसी विराट, दीर्घ और अलौकिक कलश यात्रा निकली, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि यह नगर केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। सिद्ध पीठ श्री श्री 1000 दक्षिण मुखी बड़े हनुमान जी मंदिर से प्रारंभ हुई यह यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे पूरा नगर हरि नाम की ध्वनि में डूबता चला गया।
सिर पर सुसज्जित कलश धारण किए मातृशक्ति की पंक्तियाँ केवल यात्रा नहीं चल रहीं थीं वे संस्कार, परंपरा और सनातन आस्था को आगे बढ़ा रही थीं। हर कलश में जल नहीं, श्रद्धा, विश्वास और पीढ़ियों की भक्ति भरी हुई प्रतीत हो रही थी। नगर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक, यह दृश्य मानो कह रहा था “कटनी आज कथा सुनने नहीं, कथा बनने निकली है।
परम पूज्य अनंत श्री विभूषित श्री इन्दिरारमण स्वामी जी महाराज का सान्निध्य इस यात्रा की आत्मा बना। उनके आशीर्वाद से यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण का स्वरूप ले चुका है। सुसज्जित बग्गी में विराजमान संतश्री को नमन करता जनसैलाब, पुष्पवर्षा करता नगर और आरती से स्वागत करता समाज यह दृश्य कटनी के इतिहास में कभी न मिटने वाली स्मृति बन गया।
यात्रा के मार्ग में हर घर, हर चौराहा, हर दुकान जैसे एक ही भाव से बोल उठी— आइए, कथा सुनिए… जीवन को दिशा दीजिए।

यह कोई साधारण आयोजन नहीं। श्री रंगनाथ सेवा समिति, रंगनाथ नगर कटनी के तत्वावधान में 31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा, उस आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है, जिसकी आज समाज को सर्वाधिक आवश्यकता है।
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथा व्यास प.पू. पं. श्री इन्द्रेश उपाध्याय जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) की वाणी केवल कथा नहीं कहती—वह जीवन को छूती है, आत्मा को झकझोरती है और मन को प्रभु से जोड़ देती है।

रंगनाथ नगर (साउथ स्टेशन के पास) स्थित विशाल पंडाल केवल कथा स्थल नहीं, बल्कि भक्ति का तीर्थ बन चुका है। यहाँ प्रतिदिन 20 से 30 हजार श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी इस अमृत से वंचित न रहे। 9 विशाल एलईडी स्क्रीन, लाइव प्रसारण, पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था—यह सब इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन कटनी की सामूहिक साधना है।धार्मिक आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम शनिवार को कटनी नगर में उस समय देखने को मिला, जब प.पू. पं. श्री इन्द्रेश उपाध्याय महाराज की अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन से पूर्व नगर के इतिहास की सबसे भव्य, सबसे लंबी और ऐतिहासिक कलश यात्रा निकाली गई। यह दृश्य कटनी के धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित यह विशाल कलश यात्रा सिद्ध पीठ श्री श्री 1000 दक्षिण मुखी बड़े हनुमान जी मंदिर से प्रारंभ हुई। मंदिर परिसर में विधिविधान से पूजन-अर्चन के पश्चात श्रद्धालु महिलाओं को कलश प्रदान किए गए। सैकड़ों महिलाओं ने अपने सिर पर सुसज्जित कलश धारण कर भक्ति भाव के साथ यात्रा का शुभारंभ किया। भगवा वस्त्रों में सजी महिलाएं, सिर पर कलश और मुख पर श्रद्धा का तेज—पूरी यात्रा के दौरान आस्था का जीवंत स्वरूप बनी रहीं।
कलश यात्रा में परम पूज्य अनंत श्री विभूषित श्री इन्दिरारमण स्वामी जी महाराज की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने सर्वप्रथम दक्षिण मुखी बड़े हनुमान जी मंदिर में प्रभु की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात मंदिर के सेवादारों द्वारा स्वामी जी की आरती कर उनका अभिनंदन किया गया। सुसज्जित बग्गी में विराजमान स्वामी जी महाराज ने शोभायात्रा की भव्यता को और अधिक दिव्यता प्रदान की।
यह कथा उन लोगों के लिए है जो जीवन में शांति चाहते हैं,जो अपने परिवार के संस्कारों को मजबूत करना चाहते हैं जो भक्ति में समाधान खोजते हैं और जो कटनी को आध्यात्मिक गौरव के शिखर पर देखना चाहते हैं आज नगर केवल कथा का आयोजन नहीं कर रहा कटनी स्वयं कथा बन रहा है। जो कलश यात्रा में नहीं चल पाए, उनके लिए यह कथा स्थल पर पहुँचने का अवसर है। जो चल पाए, उनके लिए यह कथा उस यात्रा की पूर्णता है। इतिहास गवाह बनेगा कि जब श्रीमद्भागवत कथा नगर मे हुई—तो कटनी बदल गया।