श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भक्ति में डूबा रंगनाथ नगर महापौर सूरी सहित पार्षदगण ने किया भावपूर्ण कथा श्रवण, हजारों श्रद्धालु हुए भावविभोर

0

श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भक्ति में डूबा रंगनाथ नगर
महापौर सूरी सहित पार्षदगण ने किया भावपूर्ण कथा श्रवण, हजारों श्रद्धालु हुए भावविभोर
कटनी।। श्री रंगनाथ नगर इन दिनों अध्यात्म, भक्ति और श्रद्धा के दिव्य रंग में रंगा हुआ है। सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर नगर में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना, जहाँ हर मन भक्ति में लीन दिखाई दिया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर हरे कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी अपने पार्षद साथियों एवं एमआईसी सदस्यों के साथ कथा स्थल पहुँचीं और पूरे भक्तिभाव के साथ अमृतमयी कथा का श्रवण किया। महापौर सूरी ने कथा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करती है। ऐसे आयोजन नगर के लिए सौभाग्य होते हैं।
अधूरापन ही मनुष्य को विनम्र बनाता है – इंद्रेश जी महाराज
ख्यातिलब्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने अपने ओजस्वी और भावप्रवण प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने श्रीमद्भागवत की महिमा बताते हुए भक्ति, धर्म और सदाचार को जीवन का आधार बताया। कथा प्रसंग के दौरान उन्होंने गूढ़ संदेश देते हुए कहा मनुष्य यदि हर क्षेत्र में पूर्ण हो जाएगा, तो अभिमान करेगा। इसलिए जीवन में कुछ अधूरापन आवश्यक है, वही हमें विनम्र और ईश्वर से जुड़ा रखता है। उनकी यह बात श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतरती दिखाई दी। कथा के साथ प्रस्तुत किए जा रहे ब्रजभाषी भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। विभिन्न रागों में गाए गए मधुर भजनों पर हजारों श्रद्धालु झूमते नजर आए। भक्ति, संगीत और कथा का ऐसा समन्वय बना कि हर आयु वर्ग के श्रद्धालु आत्मिक आनंद में डूब गए।
मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
कथा के क्रम में आज 3 फरवरी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को अपार उत्साह और उल्लास के साथ मनाने की तैयारी है। आयोजकों के अनुसार जन्मोत्सव के दिन विशेष झांकियां, भजन-कीर्तन और उत्सवपूर्ण आयोजन होंगे, जिसमें नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभावना है। श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब भक्ति, कथा और समाज का संगम होता है, तब नगर ही नहीं, बल्कि हर हृदय आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित हो उठता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed