“10 सिर वाला रावण बनी महापौर” — गोमांस और गंदे पानी के मुद्दे पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, निगम दफ्तर का घेराव

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(संजीव दुबे)

भोपाल में गोमांस प्रकरण और शहर में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। इन मुद्दों पर कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ तीखा आंदोलन छेड़ते हुए महापौर पर सीधा हमला बोला। सोमवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आईएसबीटी स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव किया और महापौर का रावण रूपी पुतला बनाकर उसका दहन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने महापौर को “10 सिर वाला रावण” बताते हुए उन पर शहर की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भोपाल के नागरिक एक ओर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर स्लॉटर हाउस से जुड़े गोमांस प्रकरण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी का आरोप है कि यह पूरा मामला नगर निगम और संबंधित विभागों की लापरवाही का नतीजा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने किया। इस दौरान कार्यकर्ता महापौर का प्रतीकात्मक रावण रूपी पुतला लेकर पहुंचे, जिसमें 10 सिर लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने इसे नगर निगम की “10 बड़ी नाकामियों” का प्रतीक बताया और आरोप लगाया कि महापौर शहर की समस्याओं पर नियंत्रण खो चुकी हैं। पुतला दहन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और महापौर व एमआईसी सदस्यों के इस्तीफे की मांग उठाई गई।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जहांगिराबाद थाना क्षेत्र में कंटेनर से बड़ी मात्रा में मांस मिलने के बाद भी शुरुआती स्तर पर ढिलाई बरती गई। बाद में जांच में गोवंश वध और मांस के अवैध परिवहन की पुष्टि हुई, जिसके बाद केस दर्ज किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यदि प्रशासन समय रहते सख्ती करता, तो मामला इतना नहीं बढ़ता।

कांग्रेस ने यह मुद्दा नगर निगम परिषद की बैठक में भी उठाया था। 13 जनवरी को हुई बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताते हुए वॉक-आउट किया था। उनका कहना है कि स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव एमआईसी की बैठक में पास कर दिया गया, लेकिन न तो परिषद में इस पर चर्चा हुई और न ही शहर को इसकी जानकारी दी गई। कांग्रेस का दावा है कि स्लॉटर हाउस 20 साल के लिए दिया गया है, जो जनभावनाओं के खिलाफ है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक भोपाल के नागरिकों को साफ पानी नहीं मिलेगा और गोवंश से जुड़े मामलों में पारदर्शी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं ने महापौर और एमआईसी के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए नगर निगम प्रशासन को पूरी तरह विफल बताया। इस दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

इधर, करणी सेना और अन्य हिंदूवादी संगठनों ने भी निगम कार्यालय का घेराव कर अपना विरोध दर्ज कराया और महापौर का पुतला दहन किया। इन संगठनों ने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकार का कड़ा रुख, सख्त कार्रवाई के संकेत

उधर, गोमांस प्रकरण पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि गोमांस या गोकशी के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। चाहे व्यापारी हो या अधिकारी, यदि कोई भी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विषय में स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा ऐसे मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई करने की है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जांच में गोमाता की कटाई सिद्ध होती है, तो इसे सामान्य अपराध नहीं माना जाएगा, बल्कि हत्या जैसा गंभीर अपराध मानते हुए आरोपियों पर कड़ी धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए।

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि गोमाता भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है और उसके संरक्षण के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई न बरती जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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