भाजपा की स्क्रिप्ट पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष का आंदोलन!
मुख्यमंत्री के आने से 2 घंटे पहले शुरू हुआ आंदोलन, सवालों में जिला कांग्रेस अध्यक्षसमय से पहले प्रदर्शन, कांग्रेस की रणनीति पर उठे सवाल
शहडोल।मुख्यमंत्री मोहन यादव के धनपुरी दौरे के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी का आंदोलन शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री के पहुंचने से करीब डेढ़ घंटे पहले ही कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी कर गिरफ्तारी दे दी। पूरे घटनाक्रम और समयरेखा ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी की भूमिका चर्चा में है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के 8 फरवरी के धनपुरी दौरे को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया था। एक सप्ताह पहले से ही जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी ने प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। उन्होंने वाटर फिल्टर प्लांट में भ्रष्टाचार, अधूरे निर्माण, दूषित पानी की सप्लाई जैसे मुद्दों को उठाते हुए मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने और घेराव की बात कही थी।
अजय अवस्थी ने कोयलांचल क्षेत्र के आमजन और कांग्रेस के सभी अनुसांगिक संगठनों से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की थी। दावा किया गया था कि यह विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक होगा और मुख्यमंत्री के सामने जोरदार तरीके से मुद्दे उठाए जाएंगे। लेकिन 8 फरवरी को जो घटनाक्रम सामने आया, उसने कांग्रेस के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए।
बताया जाता है कि सुबह करीब 11 बजे बुढार में कांग्रेस कार्यकर्ता जनपद कार्यालय परिसर में इकट्ठा हुए। वहां कुछ समय तक जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगे और थोड़ी देर बाद सड़क पर आकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने उन्हें वहीं रोक लिया, कुछ फोटो और वीडियो बनाए गए, और इसके बाद कांग्रेस नेताओं को बस में बैठाकर थाने ले जाया गया। जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी के फेसबुक लाइव में गिरफ्तारी का समय लगभग 11:30 बजे बताया गया।
इधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव का कार्यक्रम देखें तो वे भोपाल से 10:59 बजे हेलीकॉप्टर से रवाना हुए और 12:43 बजे बुढार के लालपुर हवाई अड्डे पर उतरे। लगभग 1 बजे उनका काफिला बुढार नगर में पहुंचा और 2:25 बजे वापसी के लिए रवाना हुआ। इस समयरेखा के अनुसार कांग्रेस का प्रदर्शन मुख्यमंत्री के पहुंचने से काफी पहले ही शुरू होकर खत्म भी हो गया।
यही वह बिंदु है, जिसने पूरे आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। सवाल उठ रहे हैं कि जब मुख्यमंत्री क्षेत्र में पहुंचे ही नहीं थे, तब कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी की जल्दबाजी क्यों की। जिस विरोध को मुख्यमंत्री के सामने करना था, वह उनके आने से पहले ही समाप्त हो गया।
दिलचस्प बात यह भी रही कि कांग्रेस के कई प्रमुख स्थानीय नेता इस आंदोलन में नजर नहीं आए। न तो ब्लॉक स्तर के कई पदाधिकारी दिखे और न ही कई वरिष्ठ नेता मौके पर मौजूद थे। इससे यह संदेश गया कि आंदोलन की तैयारी उतनी मजबूत नहीं थी, जितनी प्रचारित की गई थी।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा समर्थक इसे कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी और असंगठित नेतृत्व का उदाहरण बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर विपक्ष का आंदोलन इस तरह समय से पहले ही खत्म हो जाए, तो सत्तापक्ष को किसी अलग रणनीति की जरूरत ही नहीं पड़ती।
कई स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और ठोस रणनीति की जरूरत है। केवल प्रेस विज्ञप्तियों और सोशल मीडिया पोस्ट के सहारे आंदोलन खड़ा करने की कोशिश अंततः उलटी पड़ सकती है। इस घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि संगठनात्मक तैयारी के बिना बड़े दावे करना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।
वहीं भाजपा खेमे में इस पूरे मामले को लेकर संतोष का माहौल देखा गया। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री का दौरा शांतिपूर्ण रहा और विकास कार्यों के कार्यक्रम बिना किसी बड़े व्यवधान के संपन्न हुए। भाजपा नेता इसे अपनी संगठनात्मक मजबूती और प्रशासनिक समन्वय का परिणाम बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के दौरे से ज्यादा चर्चा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की समयरेखा को लेकर हो रही है। सवाल अब भी यही है कि क्या यह आंदोलन जल्दबाजी में किया गया राजनीतिक कदम था, या फिर रणनीतिक चूक का नतीजा। फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी की कार्यशैली को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।