नाबालिग को जेल भेजने पर सियासत गरम,मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ा मामला, प्रशासन पर गंभीर सवाल

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शहडोल। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारियों का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। आरोप है कि बुढार पुलिस ने 22 मई 2008 जन्मतिथि वाले सत्यम प्रजापति को, जो गिरफ्तारी के समय नाबालिग था, 18 वर्ष का बताकर मेडिकल कराया और तहसीलदार के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।क्या प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में की बड़ी भूल?
नाबालिग की गिरफ्तारी से कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
 जिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव के धनपुरी प्रवास के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ विवाद अब नाबालिग को जेल भेजे जाने के आरोपों तक पहुंच गया है। इस घटना ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 8 फरवरी को जब धनपुरी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और दूषित पानी के मुद्दे पर विरोध जताया। इस दौरान नारेबाजी हुई और हालात तनावपूर्ण हो गए। आरोप है कि स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने स्वयं कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाईं, जिसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
इन गिरफ्तारियों में जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल उर्फ सनी, छात्र नेता सत्यम प्रजापति और आशु पर अतिरिक्त धाराएं लगाकर उन्हें बुढार जेल भेज दिया गया, जबकि अन्य लोगों को जमानत पर छोड़ दिया गया। सोमवार तक तीनों कार्यकर्ता जेल में ही बंद रहे।
इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप सिंह ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तार लोगों में सत्यम प्रजापति नाबालिग है। उनके अनुसार सत्यम की जन्मतिथि 22 मई 2008 है, जो उसकी दसवीं की अंकसूची और अन्य दस्तावेजों में दर्ज है। इस आधार पर गिरफ्तारी की तारीख 8 फरवरी को उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी, यानी वह विधिक रूप से नाबालिग था।
कांग्रेस का आरोप है कि इसके बावजूद बुढार थाना प्रभारी ने उसकी उम्र 18 वर्ष लिखकर मेडिकल कराया और तहसीलदार के सामने पेश कर जेल भेज दिया, जो कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। प्रदीप सिंह ने सोशल मीडिया पर भी इस मामले को उठाते हुए लिखा कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और सभी जिम्मेदार अधिकारियों को हाईकोर्ट में जवाब देना होगा। कांग्रेस ने इस मामले में न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।
कांग्रेस नेता सुफियान खान ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गिरफ्तारियां चेहरा देखकर की जा रही थीं। उन्होंने जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी पर आरोप लगाया कि जब बुढार थाने में कार्यकर्ताओं की पहचान कराई जा रही थी, तब उन्होंने सत्यम प्रजापति को पहचानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण एक नाबालिग छात्र नेता को जेल जाना पड़ा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित सिंह ने कहा कि कलेक्टर द्वारा जिस तरह से लाठीचार्ज किया गया, उसकी सूचना प्रदेश नेतृत्व को दे दी गई है। जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल आ सकते हैं और इस मामले को लेकर जेल भरो आंदोलन भी किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि निहत्थे कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई कर प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।
कानून क्या कहता है
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो उसे नाबालिग माना जाता है और उसके साथ किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष ही कार्यवाही की जाती है। ऐसे मामलों में नाबालिग को जेल नहीं भेजा जा सकता, बल्कि बाल संरक्षण गृह या ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाता है।
कानून के अनुसार उम्र निर्धारण में स्कूल प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाती है। मेडिकल जांच को अंतिम विकल्प माना जाता है, वह भी तब जब कोई दस्तावेज उपलब्ध न हो। यदि सत्यम प्रजापति के दस्तावेजों में जन्मतिथि 22 मई 2008 दर्ज है, तो उसकी गिरफ्तारी के समय उसे नाबालिग मानकर ही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि नाबालिग को वयस्क बताकर जेल भेजा गया, तो यह कानूनी चूक मानी जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।
अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गर्मा गया है। कांग्रेस जहां इसे मानवाधिकार उल्लंघन बताकर आंदोलन की तैयारी में है, वहीं प्रशासन की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया पर भी जांच की मांग उठने लगी है।

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