अध्यात्म के दो शिखरों का पावन संगम: सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज के शुभागमन से दद्दा धाम में भक्ति का नवप्रवाह
अध्यात्म के दो शिखरों का पावन संगम: सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज के शुभागमन से दद्दा धाम में भक्ति का नवप्रवाह
कटनी।। जब श्रद्धा का अथाह सागर और साधना का अडिग हिमालय एक-दूसरे से आलिंगन करते हैं, तब सृष्टि का प्रत्येक कण आध्यात्मिक आनंद से पुलकित हो उठता है। ऐसा ही दिव्य और अविस्मरणीय क्षण उस समय साकार हुआ, जब सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज, श्री आनंदम धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं ओजस्वी संत, का पावन आगमन दद्दा धाम की पुण्यभूमि पर हुआ। उनके चरण पड़ते ही धाम का संपूर्ण वातावरण मानो भक्ति, शांति और दिव्यता से आप्लावित हो उठा। केवल भौतिक परिवेश ही नहीं, अपितु वायु में भी आध्यात्मिक सुगंध का सहज अनुभव होने लगा।
समाधि स्थल पर मौन साधना और दिव्य संवाद
धाम परिसर में प्रवेश करते ही महाराज श्री सर्वप्रथम परम पूज्य गुरुदेव दद्दा जी की पावन समाधि पर नतमस्तक हुए। यह क्षण अत्यंत भावुक, गरिमामय और आत्मा को स्पर्श करने वाला था।
समाधि स्थल पर उनकी मौन प्रार्थना मानो दो महान चेतनाओं के मध्य एक अलौकिक संवाद का साक्षात् स्वरूप बन गई। जहाँ वृंदावन की निर्मल भक्ति और दद्दा धाम की तपशक्ति एकाकार हो उठी। इसके पश्चात सद्गुरु जी ने देव बृहस्पति दद्दा जी मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन कर अपनी अटूट श्रद्धा और आध्यात्मिक गहराई का परिचय दिया।
भक्ति, वात्सल्य और श्रद्धा से सराबोर स्वागत
महाराज श्री के स्वागत में दद्दा धाम की देहरी किसी आध्यात्मिक महोत्सव से कम प्रतीत नहीं हो रही थी। श्रद्धालुओं की नम आंखें, जुड़ी हुई हथेलियाँ और जय गुरुदेव के गगनभेदी उद्घोष वातावरण को भाव-विभोर कर रहे थे। हर चेहरा आनंद, शांति और कृतज्ञता से दमक रहा था मानो स्वयं ईश्वर का सान्निध्य प्राप्त हो गया हो।
श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का क्षण
सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज का यह पावन आगमन न केवल एक संत का आगमन था, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक जागरण, भक्ति के नवअभ्युदय और साधना के नए पथ का उद्घोष था। दद्दा धाम की यह ऐतिहासिक घड़ी लंबे समय तक भक्तों के हृदय में आध्यात्मिक प्रकाश बनकर आलोकित होती रहेगी।