मरवाही वनमंडल में वन माफिया बेखौफ: नाका के जंगलों में धड़ल्ले से हो रही पेड़ों की अवैध कटाई, वन विभाग मौन

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मोहम्मद शाकिब खान मुख्य संवाददाता गौरेला

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले के मरवाही वनमंडल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नाका के जंगलों में इन दिनों वन माफियाओं का राज चल रहा है। प्राकृतिक संपदा और हरियाली से भरे इस वन क्षेत्र में लगातार कीमती लकड़ियों की अवैध कटाई की जा रही है, लेकिन वन विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।

 

सामने आई जीपीएस (GPS) प्रमाणित तस्वीरें इस पूरे मामले और वन विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल रही हैं। 2 मई 2026 को ग्राम नाका (पिन कोड- 495118) के जंगल (अक्षांश 22.91119° और देशांतर 82.140195°) से प्राप्त इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से मोटे और पुराने पेड़ों को बेरहमी से काटकर उनके लट्ठे (लॉग) जंगल में ही डंप किए गए हैं।

 

कटी हुई लकड़ियों की ताजी स्थिति और उनके बड़े-बड़े टुकड़े चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि लकड़ी तस्करों का यह खेल क्षेत्र में बदस्तूर जारी है।

 

एक तरफ शासन-प्रशासन पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर पौधे लगाने और जंगल बचाने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ नाका जैसे इलाकों में सरेआम पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है।

 

ऐसे में वन विभाग की गश्ती टीम और बीट गार्ड्स की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इतने बड़े पैमाने पर लकड़ियों की कटाई बिना किसी शोर-शराबे या भनक के कैसे हो सकती है?

 

क्या वन रक्षकों को इस भारी-भरकम कटाई की जानकारी नहीं है, या फिर तस्करों के साथ साठगांठ के चलते जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

 

ग्राम नाका में हालिया दिनों में हो रहे अनियमित कार्यों और अब इस तरह से खुलेआम वन संपदा की लूट से यह स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र पूरी तरह से लचर हो चुका है।

 

अब देखना यह है कि पुख्ता सबूत (GPS लोकेशन और तस्वीरों) के सामने आने के बाद उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हुए वन माफियाओं और संबंधित लापरवाह कर्मचारियों पर क्या कड़ी कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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