मणप्पुरम गोल्ड डकैती में फिर बड़ी हलचल संबलपुर जेल से तीन आरोपी कटनी लाए गए 16 किलो सोना और साढ़े तीन लाख नकद लूटने वाले गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस; तीनों को 30 दिन के प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया, 3 सितंबर तक पुलिस रिमांड चार साल पुराने बहुचर्चित डकैतीकांड में अब तक आठ आरोपियों के पुलिस की पकड़ में आने का दावा, लूटे गए सोने की बरामदगी और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती
मणप्पुरम गोल्ड डकैती में फिर बड़ी हलचल संबलपुर जेल से तीन आरोपी कटनी लाए गए
16 किलो सोना और साढ़े तीन लाख नकद लूटने वाले गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस; तीनों को 30 दिन के प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया, 3 सितंबर तक पुलिस रिमांड
चार साल पुराने बहुचर्चित डकैतीकांड में अब तक आठ आरोपियों के पुलिस की पकड़ में आने का दावा, लूटे गए सोने की बरामदगी और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

कटनी। बरगवां स्थित मणप्पुरम गोल्ड लोन शाखा में दिनदहाड़े हुई बहुचर्चित और सनसनीखेज डकैती के मामले में कटनी पुलिस ने करीब चार वर्ष बाद जांच की कड़ियों को एक बार फिर आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने संबलपुर की सर्किल जेल में बंद तीन आरोपियों को 30 दिन के प्रोडक्शन वारंट पर कटनी लाकर न्यायालय के समक्ष पेश किया है। न्यायालय से पुलिस को तीनों आरोपियों की 3 सितंबर तक पुलिस रिमांड मिली है। अब इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस का फोकस न केवल वारदात की पूरी साजिश और गिरोह के नेटवर्क पर रहेगा, बल्कि सबसे अहम सवाल डकैती में लूटा गया करीब 16 किलो सोना आखिर कहां पहुंचा का जवाब तलाशने पर भी होगा।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में मणप्पुरम गोल्ड डकैती मामले में बचे हुए और फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मामले से जुड़े तीन आरोपी वर्तमान में संबलपुर जेल में बंद हैं। इसके बाद पुलिस ने न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कर तीनों को प्रोडक्शन वारंट पर कटनी लाया।
संबलपुर से कटनी लाए गए आरोपियों की पहचान अखिलेश उर्फ विकास उर्फ जॉन राइट, उम्र 25 वर्ष, निवासी वैशाली बिहार, अर्जुन उर्फ पीयूष जायसवाल, उम्र 25 वर्ष, निवासी पटना बिहार और अनुज कुमार शाह उर्फ आकाश, उम्र 38 वर्ष, निवासी वर्धमान, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है।
डीएसपी शिवा पाठक के मुताबिक आरोपियों को कटनी लाने के बाद न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने पुलिस को 3 सितंबर तक की रिमांड प्रदान की है। अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से डकैती की योजना, रेकी, वारदात में शामिल अन्य साथियों, लूटे गए सोने और नकदी के बंटवारे तथा घटना के बाद आरोपियों के अलग-अलग ठिकानों तक पहुंचने के संबंध में पूछताछ करेगी।

26 नवंबर 2022 को दिनदहाड़े हुई थी करीब 16 किलो सोने की डकैती मणप्पुरम गोल्ड लोन शाखा में यह वारदात 26 नवंबर 2022 की सुबह करीब साढ़े दस बजे हुई थी। हथियारों से लैस नकाबपोश बदमाश बरगवां स्थित शाखा में घुसे और कर्मचारियों को हथियारों की नोक पर अपने कब्जे में ले लिया। बदमाशों ने शाखा में ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए सोने के आभूषण और नकदी लूट ली तथा मौके से फरार हो गए।
उस समय सामने आई पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बदमाश करीब 16 किलो सोना और लगभग 3.5 लाख रुपये नकद लेकर फरार हुए थे। तत्कालीन पुलिस जांच में लूटे गए सोने की कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई थी। वारदात इतनी तेजी से अंजाम दी गई कि कर्मचारियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आसपास के जिलों में नाकाबंदी कराई गई, सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और डॉग स्क्वॉड तथा फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरू की गई थी।
अगले ही दिन मंडला से पकड़े गए थे दो आरोपी
डकैती के बाद पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। वारदात के अगले ही दिन पुलिस ने मंडला जिले के निवास क्षेत्र से शुभम तिवारी और अंकुश साहू को गिरफ्तार किया था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बिहार से जुड़े एक ऐसे गिरोह का हिस्सा थे, जो गोल्ड लोन कंपनियों को निशाना बनाता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य वारदात से पहले कटनी पहुंचे थे, यहां रैकी की गई और स्थानीय स्तर पर ठहरने तथा वाहन की व्यवस्था की गई थी।
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कोई रेकी करता था, कोई स्थानीय व्यवस्था संभालता था और कोई वारदात के बाद लूटे गए माल को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता था।
बिहार कनेक्शन ने खोले थे डकैती के राज
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मणप्पुरम डकैती के तार बिहार से जुड़े एक संगठित गिरोह तक पहुंचते गए। दिसंबर 2022 में बक्सर से शाहबाज और उसके बाद मिथिलेश की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर जेल में बंद सुबोध सिंह का नाम सामने आया था। उस समय की पुलिस जांच के अनुसार गिरोह का कथित संचालन जेल में बंद लोगों के माध्यम से होने की बात सामने आई थी। पुलिस ने दावा किया था कि इस गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में गोल्ड लोन कंपनियों को निशाना बनाते थे और वारदात से पहले संबंधित शाखा की रेकी की जाती थी।
अमर उजाला की दिसंबर 2022 की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने डकैती की योजना को बिहार की जेलों में बंद सुबोध सिंह और दिलीप सिंह से जोड़ते हुए जानकारी दी थी।
छह मुख्य आरोपियों तक पहुंची थी पुलिस, फिर भी सोना नहीं मिला
मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ती रही। 2023 में विकास गुप्ता उर्फ विक्कू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने छह मुख्य आरोपियों के नाम सामने रखे थे। उस समय पुलिस रिकॉर्ड में अंकुश साहू, शाहबाज सिद्दीकी, मिथलेश कुमार पाल, शुभम तिवारी, गोलू कुमार यादव और विकास गुप्ता उर्फ विक्कू के नाम सामने आए थे। विकास गुप्ता को महाराष्ट्र पुलिस की मदद से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। उसके संबंध में पुलिस ने बताया था कि उसकी भूमिका रेकी से जुड़ी थी। इस गिरफ्तारी के समय पुलिस का मुख्य लक्ष्य लूटे गए सोने तक पहुंचना था, लेकिन अधिकांश सोने की बरामदगी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई थी। यही वजह है कि करीब चार साल बाद संबलपुर जेल से तीन आरोपियों को कटनी लाए जाने की वर्तमान कार्रवाई को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लूटे गए सोने की बरामदगी आज भी सबसे बड़ा सवाल
मणप्पुरम डकैती मामले में गिरफ्तारियां भले ही लगातार होती रही हों, लेकिन इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी गुत्थी लूटा गया सोना है। वारदात के दौरान करीब 16 किलो सोना लूटे जाने की बात सामने आई थी। शुरुआती पुलिस कार्रवाई में आरोपियों से बाइक, हथियार, मोबाइल और नकदी सहित अन्य सामान की बरामदगी की जानकारी सामने आई, लेकिन लूटे गए पूरे सोने की बरामदगी नहीं हो सकी। दिसंबर 2023 की रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बावजूद लूटे गए सोने और कथित मुख्य आरोपी तक पहुंच हासिल नहीं की थी।
अब पुलिस रिमांड में तीन नए आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि लूटा गया सोना किसके पास पहुंचा, उसे कहां-कहां ले जाया गया और क्या उसे अलग-अलग हिस्सों में बेचकर या किसी अन्य तरीके से खपाया गया।
रेकी से लेकर लूट और फिर माल पहुंचाने तक अलग-अलग थी जिम्मेदारी
मामले की पूर्व जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं थी। गिरोह के सदस्यों ने पहले कटनी आकर शाखा की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। रहने के लिए स्थान और भागने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई थी।
2023 की जांच रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया था कि डकैती के बाद लूटे गए सोने को एक अलग नेटवर्क के माध्यम से आगे पहुंचाने की योजना थी। रिपोर्ट के अनुसार एक टीम वारदात को अंजाम देने के बाद आगे बढ़ी, जबकि दूसरी टीम के माध्यम से माल को बिहार की ओर पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।
इससे यह संकेत मिलता है कि डकैती के पीछे केवल शाखा में हथियार लेकर पहुंचे छह बदमाश ही नहीं, बल्कि उनके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। अब पुलिस की कोशिश यह पता लगाने की होगी कि उस नेटवर्क में वर्तमान में सामने आए तीन आरोपियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
कथित मास्टरमाइंड सुबोध सिंह की भूमिका फिर जांच के केंद्र में
इस मामले की जांच के दौरान सुबोध सिंह का नाम कथित मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया था। तत्कालीन पुलिस जांच में बताया गया था कि वह जेल में बंद रहते हुए गिरोह के संचालन से जुड़ा था।
यही कारण है कि वर्तमान में संबलपुर जेल से लाए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने एक अहम कड़ी सुबोध सिंह और उसके नेटवर्क से जुड़ी जानकारी हासिल करना भी होगी।
हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तभी तय माना जाएगा जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उसके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं।

अब आठ आरोपी पुलिस की पकड़ में होने का दावा
वर्तमान कार्रवाई के बाद पुलिस की ओर से इस प्रकरण में कुल आठ आरोपियों के पुलिस की गिरफ्त में आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस केस में अलग-अलग चरणों में गिरफ्तार, नामजद और अन्य आरोपियों के संबंध में पुराने रिकॉर्ड में अलग-अलग विवरण प्रकाशित हुए हैं। इसलिए वर्तमान पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ही आरोपियों की संख्या और उनकी भूमिका का अंतिम मिलान महत्वपूर्ण होगा। संबलपुर से लाए गए तीन आरोपियों की गिरफ्तारी/पुलिस हिरासत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उनके नाम 2023 में सामने आए उन अतिरिक्त आरोपियों में भी दर्ज थे, जिनमें अनुज कुमार शाह उर्फ आकाश, अखिलेश उर्फ जॉन राइट और अर्जुन उर्फ पीयूष जायसवाल शामिल बताए गए थे।

तीन सितंबर तक रिमांड, अब खुलेंगे डकैती के पुराने राज
तीनों आरोपियों की 3 सितंबर तक मिली पुलिस रिमांड अब इस बहुचर्चित मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण समय है। पुलिस इनसे अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ कर सकती है-
• डकैती की योजना किसने तैयार की थी?
• बरगवां शाखा की रेकी किसने और कितने दिन की.
• वारदात में शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी.
• लूटे गए 16 किलो सोने को किसके हवाले किया गया.
• सोना कटनी से बाहर किस रास्ते से ले जाया गया.
• लूटे गए माल को कहां-कहां ठिकाने लगाया गया.
• गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं.
• जेल में बंद आरोपियों और बाहर सक्रिय नेटवर्क के बीच किस तरह संपर्क था.
• क्या इस गिरोह ने कटनी के अलावा अन्य जिलों में भी इसी तरह की वारदातें कीं. इन सवालों के जवाब इस मामले की आगे की जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
चार साल बाद फिर चर्चा में 16 किलो सोने की डकैती
26 नवंबर 2022 की वह सुबह कटनी के अपराध इतिहास की बड़ी वारदातों में दर्ज हुई थी।हथियारबंद बदमाशों ने दिनदहाड़े गोल्ड लोन शाखा में घुसकर कर्मचारियों को बंधक बनाया और करोड़ों रुपये मूल्य का सोना तथा नकदी लेकर फरार हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक के बाद एक आरोपियों तक पहुंच बनाई, लेकिन लूटे गए सोने की पूरी बरामदगी और गिरोह की पूरी कड़ी तक पहुंचना चुनौती बना रहा।
अब संबलपुर जेल से तीन आरोपियों को कटनी लाकर पुलिस रिमांड पर पूछताछ शुरू होने से इस पुराने मामले में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि लूटा गया सोना कहां गया, गिरोह की असली संरचना क्या थी और डकैती के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे इन सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस की निगाहें तीन सितंबर तक चलने वाली पूछताछ पर टिकी हैं। यदि रिमांड के दौरान आरोपियों से ठोस सुराग मिलता है तो मणप्पुरम डकैतीकांड में न केवल और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, बल्कि वर्षों से अनसुलझी सोने की बरामदगी की गुत्थी भी सुलझने की संभावना बन सकती है।
यानी चार साल पुरानी इस डकैती में पुलिस ने आरोपियों की कड़ियां तो लगातार जोड़ लीं, लेकिन असली परीक्षा अब लूटे गए सोने तक पहुंचने और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की है।