सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान की परीक्षा आज 12 वर्ष के बच्चे से 80 वर्ष तक के बुजुर्ग एक ही प्रश्नपत्र से परखेंगे अपना ज्ञान, विजेता को मिलेगा 5 हजार रुपए का नगद पुरस्कार

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सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान की परीक्षा आज
12 वर्ष के बच्चे से 80 वर्ष तक के बुजुर्ग एक ही प्रश्नपत्र से परखेंगे अपना ज्ञान, विजेता को मिलेगा 5 हजार रुपए का नगद पुरस्कार
कटनी। सनातन धर्म, वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कटनी जिले में एक अनूठी पहल की जा रही है। टीम नवरास एवं इवेंट फैक्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में जिले में पहली बार सनातन धर्म, वैदिक सिद्धांतों, हिंदू संस्कृति एवं पौराणिक मान्यताओं पर आधारित प्रश्नोत्तरी परीक्षा का आयोजन किया गया है। यह परीक्षा आज बुधवार शाम 4 बजे नदीपार स्थित सत्यम मैरिज गार्डन के हॉल में आयोजित होगी।

एक ही प्रश्नपत्र, पीढ़ियों का एक साथ ज्ञान-परीक्षण
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें 12 वर्ष के बच्चों से लेकर 80 वर्ष तक के बुजुर्ग एक साथ परीक्षा में शामिल होंगे। अलग-अलग पीढ़ियों के प्रतिभागी एक ही प्रश्नपत्र के माध्यम से अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक ज्ञान को परखेंगे।
आयोजकों का मानना है कि आज के समय में जब नई पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो, यह अत्यंत आवश्यक है। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को सनातन परंपरा, वेदों, भारतीय दर्शन, धार्मिक ग्रंथों, देवी-देवताओं, संस्कारों एवं पौराणिक परंपराओं के बारे में जानने और अपने ज्ञान को बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

हजारों वर्षों की परंपरा को जानने का अवसर
भारतीय सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में उसकी प्राचीन ज्ञान-परंपरा और निरंतर विकसित होती सांस्कृतिक विरासत शामिल है। ‘सनातन’ का अर्थ ही शाश्वत या निरंतर रहने वाली परंपरा से जुड़ा है। वैदिक साहित्य भारतीय बौद्धिक एवं धार्मिक परंपरा का अत्यंत प्राचीन आधार है, जिसमें प्रकृति, जीवन, यज्ञ, ज्ञान, नैतिकता और अस्तित्व जैसे विषयों पर विचार मिलता है।
सनातन परंपरा की विशेषता यह भी मानी जाती है कि इसमें ज्ञान की अनेक धाराएं—वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, दर्शन, योग और विभिन्न लोक-परंपराएं—समय के साथ भारतीय संस्कृति को समृद्ध करती रही हैं। यही विविधता भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन को व्यापक स्वरूप प्रदान करती है।

‘हम अपने धर्म और संस्कृति को कितना जानते हैं ’
आयोजन का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि लोगों के मन में एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करना भी है—हम जिस धर्म, संस्कृति और परंपरा को अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं, उसके बारे में हम वास्तव में कितना जानते हैं।
आयोजकों के अनुसार, प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने ज्ञान का आकलन करने के साथ-साथ उन विषयों को जानने की प्रेरणा मिलेगी, जिन्हें सामान्यतः दैनिक जीवन में पढ़ने या समझने का अवसर कम मिलता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए यह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का एक रोचक माध्यम बन सकता है।

सर्वोच्च अंक पाने वाले को 5 हजार रुपए का पुरस्कार
परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 5 हजार रुपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। वहीं टॉप-10 प्रतिभागियों को अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इससे प्रतिभागियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों को पढ़ने की रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
परीक्षा संयोजक आदेश खरया ने बताया कि यह जिले में अपनी तरह की एक नई पहल है, जिसके माध्यम से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जानने-समझने का अवसर मिलेगा।
आयोजन समिति के सचिन गुप्ता, कोषाध्यक्ष छाया खरया सहित टीम नवरास एवं इवेंट फैक्ट्री के सभी सदस्यों ने इस पहल को मिले उत्साहजनक प्रतिसाद के लिए प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन धार्मिक ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उसे नई पीढ़ी तक रोचक और सहभागितापूर्ण तरीके से पहुंचाने का प्रयास हैं।

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