ममता को झकझोर देने वाली घटना: ट्रेन की बोगी में लावारिस मिली दो माह की मासूम, एक मां ने छोड़ा तो उसे अपनाने उमड़ पड़ीं कई माताएं कटनी मुड़वारा स्टेशन पर इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य, जिला अस्पताल में मासूम को गोद में लेने के लिए उमड़ी महिलाओं की भीड़

0

ममता को झकझोर देने वाली घटना: ट्रेन की बोगी में लावारिस मिली दो माह की मासूम, एक मां ने छोड़ा तो उसे अपनाने उमड़ पड़ीं कई माताएं
कटनी मुड़वारा स्टेशन पर इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य, जिला अस्पताल में मासूम को गोद में लेने के लिए उमड़ी महिलाओं की भीड़
कटनी। एक तरफ वह मां है, जिसने अपनी कोख से जन्मी दो माह की मासूम बच्ची को आखिर किन हालात में अकेला छोड़ दिया, यह सवाल हर किसी के मन को विचलित कर रहा है। दूसरी तरफ वे ममतामयी माताएं हैं, जो उस अनजान बच्ची को देखते ही उसे अपनी गोद में लेने, अपने आंचल की छांव देने और उसे अपनी संतान की तरह पालने की इच्छा लेकर जिला अस्पताल पहुंच गईं। कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन पर सामने आई यह घटना केवल एक मासूम के लावारिस मिलने की खबर नहीं, बल्कि ममता, संवेदना और इंसानियत के कई सवाल खड़े करने वाली कहानी है।
सुबह करीब 7:25 बजे कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 4 पर जैसे ही बीना-मालखेड़ी एक्सप्रेस ट्रेन क्रमांक 1934 पहुंची, ट्रेन के भीतर दो माह की एक नन्ही बच्ची मिलने की खबर से हड़कंप मच गया। जिस उम्र में एक बच्चा मां की गोद, उसके स्पर्श और उसकी लोरी के सहारे दुनिया को पहचानना शुरू करता है, उस उम्र में यह मासूम ट्रेन की बोगी में अकेली मिली। नन्हे हाथों को सहारा देने वाली कोई परिचित हथेली नहीं थी, सिर पर ममता का आंचल नहीं था और न ही यह बताने वाला कोई था कि आखिर इस मासूम को यहां कौन और क्यों छोड़ गया।
बच्ची के मिलने की जानकारी आरपीएफ आरक्षक गणेश और जीआरपी आरक्षक धर्मेंद्र चौकसे को मिली तो उन्होंने तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद बच्ची को बिना देर किए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने मासूम का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के बाद बच्ची पूर्ण रूप से स्वस्थ पाई गई।
कुछ घंटे तक जिला अस्पताल में रखने के बाद बच्ची को किलकारी चाइल्ड हेल्पलाइन संस्था भेज दिया गया, जहां उसकी देखरेख की जाएगी।
लेकिन इस घटना का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू तब सामने आया, जब लोगों को पता चला कि ट्रेन की बोगी में मिली मासूम बच्ची को जिला अस्पताल लाया गया है। देखते ही देखते कई महिलाएं अस्पताल पहुंचने लगीं। कोई उस बच्ची को एक बार देखना चाहती थी, तो कोई उसे अपनी गोद में लेकर अपने सीने से लगाना चाहती थी। कई माताओं ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा भी जाहिर की।
यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह गया। जिस मासूम को अपनों के बीच होना चाहिए था, वह अनजान लोगों के बीच मिली; लेकिन जैसे ही उसके अकेले होने की खबर फैली, कई महिलाओं के भीतर की ममता जाग उठी। उस बच्ची से कोई खून का रिश्ता नहीं था, फिर भी उसे अपनाने की चाहत उनके दिलों में उमड़ पड़ी।
आखिर इतनी छोटी बच्ची से क्या कसूर हो गया
यह सवाल हर संवेदनशील इंसान के मन में उठना स्वाभाविक है कि आखिर दो माह की इस मासूम का क्या कसूर था? वह तो अभी ठीक से दुनिया को जानती भी नहीं होगी। उसे यह भी नहीं मालूम कि मां का आंचल क्या होता है, पिता का सहारा किसे कहते हैं और अपनेपन का अर्थ क्या है। उसकी दुनिया तो किसी की गोद, दूध की खुराक, प्यार भरे स्पर्श और सुरक्षा के एहसास तक ही सीमित है।


जिस उम्र में बच्ची को मां की गोद में सुकून मिलना चाहिए, उस उम्र में उसका ट्रेन की बोगी में अकेला मिलना हर किसी को भीतर तक झकझोर देता है। हालांकि बच्ची को छोड़ने के पीछे क्या परिस्थितियां रहीं और उसे वहां किसने छोड़ा, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में एक मासूम की सुरक्षा और उसका भविष्य सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।
अगर कोई मां या परिवार किसी मजबूरी से गुजर रहा हो, तो उसके लिए मदद के रास्ते मौजूद होने चाहिए। किसी बच्चे को असुरक्षित हालत में छोड़ देना उसकी जान को खतरे में डाल सकता है। ऐसे हालात में बाल कल्याण समिति, बाल हेल्पलाइन और संबंधित प्रशासन की मदद ली जा सकती है।
अनजान बच्ची, लेकिन अपनाने को तैयार कई माताएं
इस पूरी घटना में जहां मासूम के अकेले मिलने की बात मन को पीड़ा देती है, वहीं जिला अस्पताल में उसे अपनाने की इच्छा जताने पहुंचीं महिलाओं का दृश्य इंसानियत पर भरोसा भी जगाता है। उन महिलाओं के लिए बच्ची किसी की छोड़ी हुई संतान भर नहीं थी, बल्कि एक ऐसी नन्ही जान थी, जिसे प्यार, सुरक्षा और परिवार की जरूरत थी।
एक ओर मासूम के अकेले मिलने ने कई सवाल खड़े किए, तो दूसरी ओर उसे अपनी गोद में लेने की इच्छा रखने वाली महिलाओं ने यह भी दिखाया कि ममता केवल जन्म देने तक सीमित नहीं होती। किसी बच्चे को प्यार देना, उसकी जिम्मेदारी उठाने की इच्छा रखना और उसके भविष्य के लिए आगे आना भी ममता का ही रूप है।
हालांकि बच्ची को गोद देने की प्रक्रिया कानून और बाल संरक्षण के निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी होगी। अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं की इच्छा अपने स्थान पर है, लेकिन बच्ची के सुरक्षित भविष्य के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी होना आवश्यक है।

मासूम की जिंदगी में अब खुशियों का सवेरा आए
फिलहाल दो माह की बच्ची स्वस्थ है और किलकारी चाइल्ड हेल्पलाइन संस्था में उसकी देखरेख की व्यवस्था की गई है। अब उम्मीद यही है कि इस नन्ही जान को ऐसा सुरक्षित भविष्य मिले, जहां उसे कभी अकेलेपन का सामना न करना पड़े, जहां उसकी मुस्कान की कद्र हो और जहां उसके सिर पर हमेशा प्यार भरा हाथ बना रहे।
कटनी मुड़वारा स्टेशन की यह घटना एक दर्दभरा सवाल छोड़ जाती है—जिस मासूम ने अभी दुनिया में ठीक से आंखें भी नहीं खोलीं, उसे आखिर अकेला क्यों छोड़ दिया गया
और इसी के साथ एक उम्मीद भी जगाती है—जिसे किसी ने अकेला छोड़ दिया, उसे अपनाने के लिए कई दिलों में ममता जाग उठी।
कभी-कभी इंसानियत की सबसे बड़ी तस्वीर किसी बड़े मंच पर नहीं, बल्कि अस्पताल के एक कमरे में दिखाई देती है, जहां एक नन्ही बच्ची के लिए कई माताओं की आंखों में अपनापन और दिल में ममता उमड़ पड़ती है। इस मासूम को अब ऐसी ही ममता, सुरक्षा और प्यार मिले, यही हर संवेदनशील दिल की दुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed