अपनों की सरकार में ही भाजपा पार्षद का बगावती तेवर पांच करोड़ के विकास कार्यों पर घमासान भाजपा पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी ने निगमाध्यक्ष मनीष पाठक को सौंपा इस्तीफा, अब जनता के साथ कलेक्ट्रेट कूच की तैयारी इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 4 में सड़क-नाली के काम लंबित रहने से नाराजगी, अगले दिन वार्डवासियों के साथ कलेक्टर को भी त्यागपत्र सौंपने की घोषणा, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अपनों की सरकार में ही भाजपा पार्षद का बगावती तेवर
पांच करोड़ के विकास कार्यों पर घमासान भाजपा पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी ने निगमाध्यक्ष मनीष पाठक को सौंपा इस्तीफा, अब जनता के साथ कलेक्ट्रेट कूच की तैयारी
इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 4 में सड़क-नाली के काम लंबित रहने से नाराजगी, अगले दिन वार्डवासियों के साथ कलेक्टर को भी त्यागपत्र सौंपने की घोषणा, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
नगर निगम की सियासत में अब विकास कार्यों को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। जिस भाजपा के पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी से अपने वार्ड के विकास की उम्मीद लगाए बैठे नागरिकों को सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है, उसी पार्षद ने अब व्यवस्था के सामने अपना इस्तीफा रख दिया है। इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 4 में करीब पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों की राशि आरक्षित होने और निविदाएं जारी होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाते हुए बल्ली सोनी ने निगमाध्यक्ष मनीष पाठक को त्यागपत्र सौंप दिया। अब अगले दिन वार्डवासियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को भी त्यागपत्र सौंपने की घोषणा ने इस मामले को महज एक वार्ड की समस्या से आगे बढ़ाकर नगर निगम की कार्यप्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही का सवाल बना दिया है। सवाल तीखा है—जब सत्ता पक्ष का पार्षद ही अपने वार्ड में विकास न होने से आहत होकर इस्तीफे की राह चुन रहा है, तो आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आखिर किस दरवाजे पर दस्तक दे।
कटनी। नगर निगम कटनी में विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 4 के भाजपा पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी ने अपने वार्ड में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबे समय से लंबित रहने से आहत होकर निगमाध्यक्ष मनीष पाठक को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। मामला यहीं थमता नजर नहीं आ रहा। पार्षद ने अगले दिन वार्ड की जनता के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को भी अपना त्यागपत्र सौंपने की बात कही है। करीब पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए राशि आरक्षित होने और निविदाएं जारी किए जाने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ने के उनके आरोप ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले निगमाध्यक्ष को इस्तीफा, अब जनता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचने की तैयारी

पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी ने अपना त्यागपत्र निगमाध्यक्ष मनीष पाठक को सौंपते हुए वार्ड में विकास कार्यों की स्थिति पर नाराजगी जाहिर की है। अब उनका अगला कदम और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्षद के मुताबिक, वे अगले दिन अपने वार्ड के नागरिकों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को भी त्यागपत्र सौंपेंगे।
इस घटनाक्रम से यह सवाल उठ रहा है कि जब निर्वाचित पार्षद अपने वार्ड की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए पद छोड़ने जैसा कदम उठाने की बात कह रहा है, तो संबंधित विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है और उन्हें पूरा कराने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।
पांच करोड़ रुपये के कार्यों का दावा, फिर निर्माण में देरी क्यों
पार्षद ने अपने त्यागपत्र में बताया है कि वार्ड की विभिन्न कॉलोनियों में नागरिकों ने नियमानुसार विकास शुल्क जमा किया था। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से शुल्क की वसूली कराई गई और वित्तीय वर्ष 2025-26 में सड़क, नाली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों की राशि आरक्षित की गई थी। उनके अनुसार, कार्यों की सक्षम स्वीकृतियां प्राप्त होने के साथ निविदाएं भी जारी की गई थीं। इससे वार्डवासियों को उम्मीद जगी थी कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन पार्षद का आरोप है कि प्रशासनिक बदलाव के बाद कार्यों को अपेक्षित गति नहीं मिली। अब निगम प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि किन कार्यों की निविदाएं जारी हुईं, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और निर्माण शुरू होने में देरी के पीछे कौन से कारण हैं।
भाजपा पार्षद का कदम, निगम की राजनीति में क्यों अहम
ओमप्रकाश बल्ली सोनी भाजपा से जुड़े पार्षद हैं। ऐसे में उनका त्यागपत्र राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह घटनाक्रम इसलिए चर्चा में है क्योंकि वार्ड में विकास कार्यों के लंबित रहने की शिकायत किसी विपक्षी जनप्रतिनिधि की ओर से नहीं, बल्कि भाजपा के पार्षद की ओर से सामने आई है। हालांकि, इस घटनाक्रम के आधार पर किसी दल या अधिकारी की जिम्मेदारी अंतिम रूप से तय नहीं की जा सकती। इसके लिए निगम प्रशासन का पक्ष, स्वीकृत कार्यों का रिकॉर्ड और निविदाओं के बाद हुई कार्रवाई सामने आना जरूरी है। फिर भी, पार्षद का सार्वजनिक रूप से त्यागपत्र सौंपना और वार्डवासियों के साथ कलेक्ट्रेट जाने की घोषणा करना नगर निगम के लिए मामले को गंभीरता से लेने का संकेत है।
जनता के सामने जवाबदेही का सवाल
पार्षद ने अपने त्यागपत्र में कहा है कि उनके लिए पद व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है। जब वे अपने वार्ड की जनता को स्वीकृत मूलभूत सुविधाएं दिलाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं, तो पद पर बने रहने का नैतिक औचित्य नहीं रह जाता। उनका कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत द्वेष के कारण नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की भावना से लिया गया है। अब वार्डवासियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचने की उनकी घोषणा से यह मामला निगमाध्यक्ष तक सीमित न रहकर जिला प्रशासन के समक्ष भी उठने वाला है।
अब निगमाध्यक्ष और कलेक्टर के सामने जवाब देने की चुनौती
इस पूरे मामले में तीन सवाल सबसे अहम हैं। पहला, करीब पांच करोड़ रुपये के बताए जा रहे विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है। दूसरा, निविदाएं जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने में देरी क्यों हुई। और तीसरा, वार्ड की जनता को सड़क, नाली तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की समयबद्ध कार्ययोजना क्या है।
फिलहाल पार्षद ने निगमाध्यक्ष को त्यागपत्र सौंपा है। अगले दिन कलेक्टर को भी त्यागपत्र सौंपने की उनकी घोषणा पर अब सबकी नजर रहेगी। त्यागपत्र स्वीकार होने की स्थिति और लंबित विकास कार्यों पर प्रशासन का निर्णय अलग-अलग विषय हैं। इसलिए अब जरूरी है कि निगम प्रशासन कार्यवार स्थिति सार्वजनिक करे और वार्डवासियों को स्पष्ट बताए कि उनके क्षेत्र के विकास कार्य कब तक धरातल पर उतरेंगे।
बड़ा सवाल यही है जब जनता से विकास शुल्क लिया गया, कार्यों के लिए राशि आरक्षित हुई और निविदाएं भी जारी की गईं, तो आखिर सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए वार्डवासियों को और कितना इंतजार करना पड़ेगा।