151 कन्याओं के पूजन और श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरण से दिया मानव सेवा का संदेश स्वर्गीय राजकुमारी देवकुमार रांधेलिया एवं स्वर्गीय सुनील रांधेलिया की पुण्यतिथि पर सेवा, संस्कार और समर्पण का आयोजन, जरूरतमंदों की सहायता के संकल्प को परिवार ने किया साकार
151 कन्याओं के पूजन और श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरण से दिया मानव सेवा का संदेश
स्वर्गीय राजकुमारी देवकुमार रांधेलिया एवं स्वर्गीय सुनील रांधेलिया की पुण्यतिथि पर सेवा, संस्कार और समर्पण का आयोजन, जरूरतमंदों की सहायता के संकल्प को परिवार ने किया साकार
कटनी। नवरात्रि के पावन पर्व पर जब चारों ओर मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का वातावरण है, ऐसे में रांधेलिया परिवार ने धार्मिक आस्था को मानव सेवा से जोड़ते हुए श्रद्धा, संस्कार और परोपकार की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। स्वर्गीय अम्मा जी श्रीमती राजकुमारी देवकुमार रांधेलिया एवं स्मृतिशेष पिता श्री सुनील रांधेलिया की पुण्यतिथि पर 151 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक कन्या भोज कराया गया। वहीं, पन्ना मोड़ स्थित रांधेलिया पेट्रोल पंप पर श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरित कर सेवा और समर्पण का संदेश दिया गया।
राज पैलेस में आयोजित कन्या पूजन के दौरान परिवार के सदस्यों ने कन्याओं के चरण पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कन्याओं को भोजन कराकर उनके सुख, शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की गई। वहीं, पेट्रोल पंप परिसर में आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरित किया गया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा और उनके प्रति संवेदनशीलता में भी प्रकट होती है।
माता-पिता की स्मृति को सेवा के संकल्प से जोड़ा
पुत्री सौम्या रांधेलिया ने बताया कि यह आयोजन दिवंगत अम्मा जी एवं पिताजी की पुण्य स्मृति को समर्पित रहा। उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के साथ परिवार ने धार्मिक परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और समाजसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की स्मृतियां परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उनके दिए संस्कारों को सेवा कार्यों के माध्यम से जीवंत रखना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
पुत्र संभव रांधेलिया ने कहा कि परिवार आज भी अम्मा जी और पिताजी के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहा है। उनके संस्कारों ने सेवा को धर्म, संस्कारों को धरोहर और परोपकार को जीवन का सच्चा उद्देश्य मानने की प्रेरणा दी है। इसी भावना के साथ परिवार ने पुण्यतिथि को जनसेवा और धार्मिक आस्था से जोड़कर मनाया।
सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि
परिवार के सदस्यों सुधा सुनील रांधेलिया, श्वेता रांधेलिया एवं सम्राट रांधेलिया सहित अन्य परिजनों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान मिले और उनकी कृपा सभी पर बनी रहे। साथ ही परिवार को निरंतर जनसेवा करने तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त हो।
इस अवसर पर रवि शिवहरे, रजनी परमार, मदन दुबे, दीपक तिवारी, अजय रैकवार, आशीष दुबे, राम यादव, हरदास साहू, रेणुका निषाद, शिवम निषाद, विनय रैकवार, पवन सिंह, दीपक बर्मन, सुमन बर्मन, मुकेश सिंह, पप्पू, टीकाराम सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। रांधेलिया परिवार का यह आयोजन इस विचार को सशक्त करता है कि अपनों की स्मृति को सबसे सार्थक रूप तब मिलता है, जब उससे समाज के लोगों को प्रेम, सम्मान और सेवा का लाभ मिले। कन्या पूजन और प्रसाद वितरण के माध्यम से परिवार ने आस्था के साथ मानवता का संदेश दिया तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।