धार्मिक आस्था से जुड़े आयोजन की होर्डिंग हटाने पर बवाल, आखिर किसकी जवाबदेही मिशन चौक पर दशहरा महोत्सव के प्रचार बैनर हटाने से भड़की श्री बजरंग उत्सव समिति, नगर निगम आयुक्त ने जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई का दिया आश्वासन अतिक्रमण अधिकारी मानवेंद्र सिंह और उनकी टीम की भूमिका जांच के दायरे में, सवाल—कार्रवाई से पहले क्या नियमों और धार्मिक भावनाओं का रखा गया ध्यान

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धार्मिक आस्था से जुड़े आयोजन की होर्डिंग हटाने पर बवाल, आखिर किसकी जवाबदेही
मिशन चौक पर दशहरा महोत्सव के प्रचार बैनर हटाने से भड़की श्री बजरंग उत्सव समिति, नगर निगम आयुक्त ने जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई का दिया आश्वासन
अतिक्रमण अधिकारी मानवेंद्र सिंह और उनकी टीम की भूमिका जांच के दायरे में, सवाल—कार्रवाई से पहले क्या नियमों और धार्मिक भावनाओं का रखा गया ध्यान
कटनी।। धार्मिक आस्था, जनभावनाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े एक मामले ने शुक्रवार की रात नगर निगम कार्यालय के सामने में तूल पकड़ लिया। चौपाटी में 21 अक्टूबर को प्रस्तावित दशहरा महोत्सव के रामलीला एवं रावण दहन कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए मिशन चौक पर लगाए गए बैनर को नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते द्वारा हटाए जाने के बाद श्री बजरंग उत्सव समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने निगम कार्यालय के सामने मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए धरना दिया और सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया। समिति ने संबंधित अतिक्रमण अधिकारी मानवेंद्र सिंह तथा कार्रवाई में शामिल कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन की मांग उठाई।
मामला केवल एक होर्डिंग हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि धार्मिक और सार्वजनिक आयोजन के प्रचार के लिए लगाए गए बैनर को हटाने की कार्रवाई किस आदेश, किस नियम और किन परिस्थितियों में की गई। क्या संबंधित आयोजकों को कोई सूचना दी गई थी। क्या बैनर हटाने के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ। और यदि बैनर को क्षति पहुंचाई गई, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

धार्मिक आयोजन के बैनर पर कार्रवाई, समिति ने जताई नाराजगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री बजरंग उत्सव समिति द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव के रामलीला एवं रावण दहन कार्यक्रम का प्रचार करने के लिए मिशन चौक के पास फ्लेक्स बैनर लगाया गया था। आरोप है कि नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते ने बैनर को हटाया और उसे नुकसान पहुंचाया। इसी बात से नाराज समिति के पदाधिकारी और सदस्य निगम कार्यालय पहुंचे तथा संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नारेबाजी की।
समिति के सदस्यों का कहना है कि दशहरा जैसे पारंपरिक धार्मिक आयोजन के प्रचार-प्रसार से जुड़े बैनर को हटाने की कार्रवाई संवेदनशीलता और उचित प्रक्रिया के साथ की जानी चाहिए थी। यदि बैनर नियमों के विपरीत लगाया गया था, तो नगर निगम प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन कार्रवाई का तरीका, उसमें अपनाई गई प्रक्रिया और सार्वजनिक संपत्ति अथवा प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी जांच के दायरे में आने चाहिए।
आस्था का सम्मान जरूरी, लेकिन नियमों का पालन भी अनिवार्य
दशहरा केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हजारों लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा पर्व है। ऐसे आयोजनों के प्रचार-प्रसार से जुड़े मामलों में प्रशासनिक अमले से अपेक्षा की जाती है कि वह नियमों के पालन के साथ संवेदनशीलता और पारदर्शिता भी बनाए रखे।
हालांकि, केवल बैनर हटाए जाने की घटना से धार्मिक भावनाएं जानबूझकर आहत किए जाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए कार्रवाई की परिस्थितियों, संबंधित आदेशों और बैनर को क्षति पहुंचाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, अधिकारों के दुरुपयोग अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

आयुक्त ने दिया जांच और वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन
विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने पुरे मामले की जानकारी राजस्व अधिकारी जागेश्वर पाठक से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराने और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। समिति की ओर से संबंधित अतिक्रमण अधिकारी और उनकी टीम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी रखी गई। आयुक्त के आश्वासन के बाद समिति ने अपना धरना समाप्त कर दिया। अभी प्रशासन की ओर से जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन ही दिया गया है।

जवाबदेही तय होगी या मामला आश्वासन तक सिमट जाएगा
अब नगर निगम प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की है। जांच में यह सामने आना चाहिए कि बैनर हटाने का आदेश किसने दिया, कार्रवाई में कौन-कौन कर्मचारी शामिल थे, क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया और क्या प्रचार सामग्री को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया।
यदि कार्रवाई नियमानुसार हुई थी, तो प्रशासन को उसके आधार और परिस्थितियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनुचित व्यवहार सामने आता है, तो केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका के अनुरूप अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। अब निगाहें नगर निगम आयुक्त की जांच पर हैं। क्या जांच में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, क्या समिति को पूरे मामले का स्पष्ट जवाब मिलेगा और क्या भविष्य में धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों से जुड़े मामलों में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाएगी। इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि नगर निगम का यह आश्वासन वास्तविक कार्रवाई में बदलता है या मामला कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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