125 वर्षों की रामलीला परंपरा: आधुनिकता के दौर में भी कायम है प्रभु श्रीराम के आदर्शों का आकर्षण गोलबाजार रामलीला में श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर बैठकर मंचन देखने पहुंचे पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक, प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कमेटी की सराहना
125 वर्षों की रामलीला परंपरा: आधुनिकता के दौर में भी कायम है प्रभु श्रीराम के आदर्शों का आकर्षण
गोलबाजार रामलीला में श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर बैठकर मंचन देखने पहुंचे पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक, प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कमेटी की सराहना
कटनी। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं और मनोरंजन के आधुनिक साधनों ने जीवन में अपनी जगह बना ली, लेकिन भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रति जनमानस की आस्था आज भी उतनी ही अटूट है। इसकी जीवंत तस्वीर कटनी के ऐतिहासिक गोलबाजार रामलीला मैदान में देखने को मिलती है, जहां सवा सौ वर्षों से अधिक समय से चली आ रही रामलीला की परंपरा आज भी श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की धरोहर बनकर जीवित है। यहां रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों को मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश देने वाली सांस्कृतिक विरासत है।
शारदेय नवरात्र के पावन अवसर पर गोलबाजार रामलीला मंचन के दौरान पूर्व मंत्री एवं विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक पहुंचे। रामलीला कमेटी के सदस्यों ने उनका फूल-मालाओं से आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान श्री पाठक ने किसी विशिष्ट स्थान पर बैठने के बजाय श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर बैठकर काफी देर तक रामलीला का मंचन देखा। एक आम दर्शक की तरह रामलीला का श्रवण करने का यह अनुभव उनके लिए भी विशेष रहा।
आधुनिकता के बीच आस्था की जड़ें आज भी मजबूत
रामलीला मंचन से अभिभूत विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में भी भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हुई है। आज भी बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदान पहुंचकर जमीन पर बैठते हैं और श्रद्धापूर्वक मंचन देखते हैं। यह दृश्य बताता है कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक जड़ें कितनी गहरी हैं और भगवान श्रीराम के प्रति लोगों की आस्था कितनी मजबूत है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण का अनुपम उदाहरण है। उनके आदर्श किसी एक युग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर काल और हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
रामलीला केवल मंचन नहीं, संस्कारों की पाठशाला
विधायक श्री पाठक ने कहा कि रामलीला को केवल मनोरंजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में समाज के लिए कोई न कोई संदेश निहित है। पारिवारिक संबंधों की मर्यादा हो, वचन के प्रति प्रतिबद्धता हो, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष हो अथवा धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प—प्रभु श्रीराम का जीवन हर परिस्थिति में उचित आचरण की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच बैठकर रामलीला देखने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वर्षों बाद इस तरह आम दर्शकों के बीच बैठकर मंचन देखने का अवसर मिला, जिससे उन्हें बेहद खुशी हुई। श्रद्धालुओं की आस्था और आयोजन के प्रति उनका उत्साह देखकर भारतीय संस्कृति की जीवंतता का अनुभव होता है।
सवा सौ वर्षों से अधिक की परंपरा को सहेज रही कमेटी
कटनी के गोलबाजार रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऐतिहासिक निरंतरता है। सवा सौ वर्षों से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा शहर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। समय के बदलाव के बावजूद इस परंपरा को जीवित रखना उन लोगों के समर्पण का प्रमाण है, जो धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने इतने लंबे समय से रामलीला मंचन की परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए गोलबाजार रामलीला कमेटी की सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का यह कार्य अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कमेटी के सदस्यों को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद देते हुए उनके प्रयासों की प्रशंसा की।
कमेटी ने किया आत्मीय स्वागत
कार्यक्रम के दौरान गोलबाजार रामलीला कमेटी के सचिव भारत अग्रवाल, उपाध्यक्ष रवि खरे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं गोलबाजार रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा, शरद अग्रवाल, भाजपा सोशल मीडिया संयोजक सचिन तिवारी, जिला पंचायत सदस्य अखिल पांडे, पार्षद अवकाश जायसवाल, आशीष पाठक, अनुज तिवारी, गुड्डा जैन, रोहित सेन, अनुभव शुक्ला, मुकेश तिवारी, अंकुश रजक एवं तपन निषाद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। गोलबाजार की रामलीला एक बार फिर यह संदेश देती नजर आई कि आधुनिकता कितनी भी आगे बढ़ जाए, अपनी जड़ों से जुड़ा समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को कभी नहीं भूलता। भगवान श्रीराम के आदर्शों से अनुप्राणित यह परंपरा कटनी की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कारों और आस्था की अमूल्य धरोहर बनी हुई है।