खाटू श्याम गरबा की चमक फीकी! नारी सम्मान के दावों के बीच रात 2 बजे तक परेशान रहीं बच्चियां, पानी-फलाहार तक के इंतजाम नहीं?
धनपुरी के इंडोर स्टेडियम में 4 से 5 हजार लोगों की भीड़, लेकिन अव्यवस्थाओं ने आयोजन की तैयारियों पर उठाए सवाल; नगर की प्रथम महिला और सीएमओ की गैरमौजूदगी भी चर्चा में
धनपुरी, शहडोल। महानवमी पर धनपुरी के इंडोर स्टेडियम में खाटू श्याम गरबा समिति के निर्देशन में आयोजित भव्य गरबा कार्यक्रम में 4 से 5 हजार लोगों की मौजूदगी रही। शहडोल और अनूपपुर जिले से बड़ी संख्या में बच्चियां, महिलाएं और गरबा दल पहुंचे। आयोजन की तैयारियां करीब एक महीने से चल रही थीं, लेकिन कार्यक्रम की भव्यता के पीछे व्यवस्थाओं की खामियां चर्चा का विषय बन गईं। कार्यक्रम रात 10 बजे के बाद शुरू होकर करीब दो बजे तक चलता रहा। आरोप हैं कि बच्चियों को घंटों इंतजार करना पड़ा और पीने के पानी व फलाहार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा। नारी शक्ति के सम्मान और देवी आराधना के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चियों की परेशानियों ने आयोजकों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
भव्य आयोजन, लेकिन व्यवस्था बेपटरी
धनपुरी के इस आयोजन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों सहित हर आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। भीड़ और प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया, लेकिन हजारों लोगों को जुटाने के साथ उनकी सुविधाओं की जिम्मेदारी निभाने में आयोजक कितने सफल रहे, यह बड़ा सवाल है। कार्यक्रम की रूपरेखा और समय प्रबंधन को लेकर सामने आई शिकायतें आयोजन की चमक पर भारी पड़ती नजर आईं।
सात बजे का कार्यक्रम, शुरुआत रात 10 बजे के बाद
कार्यक्रम शाम सात बजे शुरू होना था, लेकिन मुख्य प्रस्तुतियां रात 10 बजे के बाद शुरू हो सकीं। बच्चियों और गरबा दलों को पहले ही बुला लिया गया था। नतीजा यह हुआ कि प्रतिभागियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और कार्यक्रम का समापन रात करीब दो बजे हुआ।
जब एक महीने से तैयारियां चल रही थीं, तो समय-सारिणी का पालन क्यों नहीं हो पाया? क्या आयोजकों ने प्रतिभागियों की संख्या और प्रस्तुतियों के समय का आकलन नहीं किया था?
नारी शक्ति का आयोजन, बच्चियों के लिए पानी तक नहीं!
कार्यक्रम की सबसे गंभीर शिकायत बच्चियों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सामने आई। आरोप हैं कि कई बच्चियों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ा। देर रात आसपास की दुकानें बंद होने के कारण स्थिति और मुश्किल हो गई।
नवरात्र में व्रत रखने वाली कुछ बच्चियों के लिए फलाहार की व्यवस्था भी नहीं होने की बात कही गई। घंटों कार्यक्रम स्थल पर रुकने वाली बच्चियों के लिए पानी, फलाहार और विश्राम की व्यवस्था करना क्या आयोजकों की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं थी?
नारी सम्मान के संदेश केवल मंच और माइक तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनकी असली परीक्षा तब होती है, जब आयोजन में शामिल बच्चियों की जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
ओपन गरबा में एक घंटा, प्रस्तुतियां आधी रात के बाद
आयोजन में गुजरात सहित अन्य स्थानों से कोरियोग्राफर बुलाए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन प्रस्तुतियों का क्रम व्यवस्थित नहीं होने की शिकायतें भी रहीं। बताया गया कि करीब एक घंटे तक ओपन गरबा चला, जिसमें लगभग दो सौ महिलाएं और बच्चियां शामिल हुईं। इसके बाद झांकियों और अन्य प्रस्तुतियों का क्रम शुरू हुआ, जिनमें कुछ प्रस्तुतियां रात 12 बजे के बाद हुईं।
देर होने से बच्चियों का उत्साह प्रभावित हुआ और दर्शकों के भी कार्यक्रम से उठकर जाने की बात सामने आई। ऐसे में सवाल है कि कार्यक्रम को समयबद्ध बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
दूर-दराज से आई बच्चियों की मेहनत पर पानी
शहडोल और अनूपपुर के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों से कई गरबा दल पहुंचे थे। बच्चियों ने समूह और व्यक्तिगत रूप से अपनी कला का प्रदर्शन किया। धार्मिक गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा, लेकिन घंटों इंतजार और देर रात प्रस्तुतियों के कारण प्रतिभागियों की मेहनत को अपेक्षित दर्शक नहीं मिल सके।
बच्चों को मंच देने के नाम पर बुलाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सम्मानजनक अवसर और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
नगर की प्रथम महिला कहां थीं?
नारी शक्ति और देवी आराधना से जुड़े आयोजन में नगर पालिका अध्यक्ष की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष अमिता चपरा भी कार्यक्रम में नजर नहीं आईं।
क्या नगर की प्रथम महिला और भाजपा की महिला जिला अध्यक्ष को आमंत्रित किया गया था? यदि आमंत्रित किया गया, तो उनकी अनुपस्थिति के कारण क्या रहे? इन सवालों पर आयोजकों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बिना आधिकारिक जानकारी के आमंत्रण या अनुपस्थिति के कारणों पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन इस आयोजन में उनकी गैरमौजूदगी ने चर्चा जरूर पैदा की।
नगर पालिका की संपत्ति पर आयोजन, सीएमओ भी नदारद
कार्यक्रम नगर पालिका की संपत्ति वाले इंडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ, लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमित तिवारी और जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति भी सवालों के घेरे में रही। जानकारी के अनुसार, नगर पालिका के कर्मचारियों से आयोजन के दौरान काम लिया गया।
स्टेडियम के उपयोग की अनुमति किस आधार पर मिली? क्या निर्धारित शुल्क जमा किया गया था? कर्मचारियों की सेवाएं किस आदेश के तहत ली गईं? इन सवालों का जवाब नगर पालिका के रिकॉर्ड से ही सामने आएगा। सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग हुआ है, तो उसकी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी जरूरी है।
चंदा देने वालों को प्राथमिकता के आरोप
आयोजन को लेकर यह आरोप भी चर्चा में रहा कि सहयोग करने वालों को अधिक प्राथमिकता दी गई। हालांकि, इस संबंध में कोई प्रमाणित विवरण सामने नहीं आया है। समिति को स्पष्ट करना चाहिए कि अतिथियों और सम्मानित किए जाने वाले लोगों के चयन का आधार क्या था। सामाजिक आयोजन में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि पक्षपात की आशंकाओं को जगह न मिले।
धनपुरी थाना क्षेत्र के समीप आयोजित कार्यक्रम में थाना प्रभारी और पुलिस स्टाफ देर रात तक व्यवस्था बनाने में लगा रहा। राहत की बात यह रही कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
लेकिन किसी घटना का न होना ही बेहतर व्यवस्था का प्रमाण नहीं है। सैकड़ों महिलाओं और बच्चियों की मौजूदगी में समय सीमा, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित वापसी की योजना भी जरूरी थी।
आयोजकों से जवाब मांगते सवाल
खाटू श्याम गरबा समिति का कार्यक्रम भीड़ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिहाज से बड़ा जरूर रहा, लेकिन व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
– कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू क्यों नहीं हुआ?
– बच्चियों के लिए पानी और फलाहार की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी?
– प्रस्तुतियों का क्रम समय के अनुसार क्यों नहीं बनाया गया?
– नगर पालिका की संपत्ति के उपयोग की अनुमति और शुल्क की स्थिति क्या है?
– नगर की प्रथम महिला और अन्य प्रमुख अतिथियों की अनुपस्थिति का कारण क्या रहा?
धनपुरी के इस आयोजन में भव्यता दिखाई दी, लेकिन आयोजन प्रबंधन की कसौटी पर उठे सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। देवी आराधना और नारी सम्मान का संदेश देने वाले आयोजकों को यह बताना होगा कि मंच से किए गए दावों के बीच बच्चियों को घंटों इंतजार और बुनियादी सुविधाओं की परेशानी क्यों झेलनी पड़ी। आयोजकों का पक्ष और नगर पालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।