सरकार के समानांतर कारोबार कर रहे अधिकारी, शासकीय-निजी निर्माण कार्याे को कहां से उपलब्ध हो रही रेत
विक्रांत तिवारी
शहडोल। नदी-नालों से अवैध रेत उत्खनन पर प्रशासन पूरी तरह से रोक लगाने में असमर्थ नजर आ रहा है। अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर राजस्व विभाग, खनिज विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों की कार्यवाहियां नाकाफी साबित हो रही है, जिस कारण रेत माफिया नदी और इसके सहायक छोटे-बड़े नालों को अवैध उत्खनन कर खोखला करने का काम बदस्तूर कर रहे है। यहां अवैध रेत उत्खनन को सरकारी निर्माण कार्य तथा निजी निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार व भवन मालिक बढ़ावा दे रही हैं। लगभग निर्माण कार्य सड़क के किनारे सहित शहर के अंदर हो रहे है, लेकिन शहर में लगे कैमरों की हकीकत अब किसी से छुपी नहीं रह गई है।
राजस्व की हो रही हानि
सरकारी निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों ने कोई खदान लीज पर नहीं ली है। साथ ही मानसून सत्र् के दौरान वैध ठेकेदार द्वारा भी रेत का उत्खनन नहीं किया जा सकता, बावजूद हर निर्माण स्थल पर रेत लाकर निर्माण कार्य किया जा रहा है, खबर है कि यह रेत बिना रायल्टी के खरीदी जा रही है, जिससे रेत माफियाओं को तो फायदा हो रहा है, लेकिन सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। वहीं अवैध रेत उत्खनन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
कहां से हो रही रेत की आपूर्ति
ताजा मामला सरफा पुल के पास हो रहे बाउंड्रीवाल के निर्माण से जुड़ा हुआ है, बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए ठेकेदार या भू-खण्ड के मालिक को रेत की आपूर्ति कहां से हो रही है और किस वाहन के द्वारा रेत वहां पहुंचाई जा रहा है, यह अपने आप में कई सवालों को जन्म दे रहा है, मजे की बात तो यह है कि मानसून सीजन में बाउण्ड्री का निर्माण हो रहा है, रेत ठेका लेने वाली कंपनी द्वारा रेत का उत्खनन नहीं किया जा रहा तो, आखिर उक्त निर्माण स्थल में रेत की आपूर्ति कौन कर रहा है।
नहीं होती निर्माण स्थल पर पूछताछ
बाउण्ड्री निर्माण के अलावा शहर सहित आस-पास सटे इलाकों में कई निर्माण कार्य चल रहे हैं, निर्माण कार्य में चोरी की ही रेत खरीदकर उपयोग किया जा रहा है, रेत का अवैध खनन हो रहा है और निर्माण कार्य निरंतर जारी है, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा आज तक किसी भी निर्माणकर्ता सरकारी या निजी मालिकों से नहीं पूछा गया होगा कि आखिर निर्माण के लिए आपको रेत की आपूर्ति कहां से हो रही है। मजे की बात तो यह है कि जिन स्थलों पर निर्माण कार्य हो रहे हैं, वहां से दिन भर संभागीय तथा जिला मुख्यालय के अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है, इससे उनकी कार्यकुशलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
झांझरिया को कहा से मिल रही रेत
रेत का अवैध उत्खनन किसी अभिशाप से कम नहीं है, नि:संदेह यह कहा जा सकता है कि रेत नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का अनिवार्य हिस्सा है, नदी के जल-प्रवाह और मछलियों की ही तरह यह नदियों को सेहतमंद रहने में मदद करता है, यह भू-जल के पुनर्भरण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है और प्रवाही जल में पोषक-तत्वों की आपूर्ति करता है, लेकिन मानसून काल में भी बिलासपुर झांझरिया कंस्ट्रक्शन को रेलवे का ठेके लेकर निर्माण कार्य करती है, लेकिन उक्त फर्म को रेत कहां से उपलब्ध हो रही है, यह समझ से परे है, खबर है कि झांझरिया कंस्ट्रक्शन द्वारा भण्डारण नहीं लिया गया है, लेकिन निर्माण कार्य निरंतर जारी है।
सबसे ज्यादा रेत की अनदेखी
प्राकृतिक संसाधनो में रेत सबसे ज्य़ादा अनदेखी का शिकार या भ्रष्टाचार का शिकार हुई है, शासकीय निर्माण कार्याे का ठेका लेने वाले संभाग की रनवे इंफ्रा स्ट्रेक्चर द्वारा कंचनपुर में छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन उक्त फर्म ने भण्डारण नहीं लिया है, लेकिन चोरी की रेत से निर्माण कार्य निरंतर किया जा रहा है, वहीं लोगों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा सरकार के समानांतर कारोबार किया जा रहा है, एक ओर सरकार से ऑन रिकार्ड तनख्वाह के रूप में मोटी रकम ली जा रही है, वहीं अवैध उत्खननकर्ताओं से भी कमीशन के तौर पर ऑफ रिकार्ड मासिक बांध रखा है। जागरूकजनों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जहां-जहां शासकीय तथा निजी निर्माण कार्य चल रहे है, वहां पर अगर पूछताछ की जाये तो, अवैध उत्खननकर्ताओं पर नकेल कसी जा सकती है।