नियमितकरण को लेकर अतिथि शिक्षकों ने खोला मोर्चा

0

शहडोल। शासकीय विद्यालयों में विगत 13 वर्षों से लगभग 70 हजार अति शिक्षक अल्पमानदेय में अपनी सेवायें दे रहे हैं। जिनको प्रतिवर्ष सत्र समाप्त होने से पहले सेवा से पृथक कर दिया जाता है। अति शिक्षकों के 13 वर्ष सेवा देने के बाद भी अति शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनी है। जिससे अति शिक्षकों परिवार में आर्थिक संकट या भविष्य के प्रति चिंता बढ़ती जा रही है। अति शिक्षक के परिवार के सूत्रों के अनुसार 70 से अधिक अति शिक्षक आत्महत्या जैसे कदम उठा चुके हैं। अति शिक्षकों के पक्ष में समर्थन देते हुए प्रदेश के कई विधायक, मंत्री व संसाद द्वारा पत्र लिखा जा चुका है। परंतु आज तक हमारे नियमिती करण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अति शिक्षकों ने 15 दिवस के भीतर निराकरण करने की मांग करते हुए आन्दोलन तीव्र करने की चेतावनी दी है।
यह है मांग
अतिथि शिक्षकों ने मांग की 12 मास का सेवाकाल स्थाई पद मासिक वेतन प्रदान किया जाए। आर.टी.ई. मापदण्ड पूरा करने वाले अतिथि शिक्षकों को शिक्षक पद पर नियोजित किया जाए। अतिथि शिक्षक की अलग से पत्रता परिक्षा ली जायें व उसमें अर्हताकारी अंक रखे जाएं जैसे सत्र 2012 में गुरूजी के अलग से आयोजित परीक्षा द्वारा रखी गयी थीं। अप्रशिक्षित अतिथि शिक्षकों आपरेशन क्वालिटी, एन.आई.ओ.एस. इत्यादि विधियों से प्रशिक्षित किया जाएं। स्थानान्तरण या पदपूर्ति विगत कांग्रेस सरकार के दोषपूर्ण 3 माह अनुभव में अधिभार के 25 अंक की नीति के जो अतिथि शिक्षक फालन आयुट हो गए है, उन्हें भी अनुभव की वरिष्टता के आधार पुन: सेवा में लाकर लाभ दिया जायें। प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को पुन: स्कूल संचालित कर सेवा में लिया जायें और एच.एस. व हायर सेकण्डरी स्कूल के शेष अतिथि शिक्षकों को वापस सेवा में बुलाया जाएं। कोरोनाकाल का मानदेय भत्ता जैसे विभिन्न कर्मियों को दिया गया हैं, वैसे दिया जाएँ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed