तो क्या…बुढ़ार का कालू दबे पांव कर रहा सूदखोरी!

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(Amit Dubey+8818814739)
शहडोल। पुलिस महानिदेशक द्वारा सीआईडी के माध्यम से सूदखोरों (अवैध साहूकारों) के विरुद्ध 01 दिसम्बर से 31 दिसम्बर तक विशेष अभियान चलाये जाने के निर्देश दिये हैं। जोन के सभी पुलिस अधीक्षक (शहडोल, उमरिया, अनूपपुर एवं डिण्डौरी) जनहित में इस अभियान को सफल बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं। अभियान की मूलभूत मंशा है कि अवैध साहूकारों के कारोबार को विधिवत रोकना और आम आदमी को सूदखोरी के कारण आर्थिक क्षति होने से बचाना। कई साहूकार ऋण के ब्याज की दरें शासन द्वारा निर्धारित दरों से अत्यधिक दर रखते हैं और ऋण की वसूली में ऋणियों को शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा देते हैं, जिसके कारण ऋणी या उसके परिजन अवसादग्रस्त होकर आत्म हत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित विधिसम्मत कदम उठाना आवश्यक है।
चोरी-छुपे दे रहे अंजाम
संभाग के ट्रांसपोर्ट नगरी के नाम पर ने अपनी अलग पहचान बनाई हुई है, बीते दिनों पुलिस द्वारा दर्जनों सूदखोरों पर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद नकेल कसी है, चर्चा है कि ट्रांसपोर्ट नगरी के कालू नाम किराना व्यवसायी द्वारा लोगों की जरूरत का फायदा उठाकर सूद पर रूपया उधार देकर उनके लिए मुसीबत बन जाते हैं, पुलिस द्वारा सूदखोरों के खिलाफ कार्यवाही के साथ ही सीआईडी के पाले में सूद का कारोबार करने वाले की कार्यवाही जाने के बाद भी जरूरत मंदो के गहने, घरों के दस्तावेज संभवत: रख लेते हैं, चर्चा है कि बीते दिनों ऐसे ही एक व्यापारी को उधार पर राशि दी थी, जिसके बाद उसको अपना घर बेचना पड़ा था, मामले में कितनी सत्यता है, यह तो पुलिस सहित सीआईडी को दबे पांव जांच करनी चाहिए, जिससे पूरे सूदखोरी के कारोबार से पर्दा उठ सकता है।
नहीं होगी वसूली
साहूकारों-सूदखोरों और ऋणियों से संबंधित जानकारी जनता और पुलिस को पर्याप्त मात्रा में रहे। शासन के अधिनियमों और अधिसूचनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, जिससे जनता जागरूक और आत्मनिर्भर बन सके। प्रदेश साहूकार संशोधन अधिनियम, 2020 अपंजीकृत साहूकारों द्वारा दिया गया उधार कतिपय परिस्थितियों में वसूलनीय नहीं होगा। यदि साहूकार अथवा अपंजीकृत साहूकार द्वारा किसी व्यक्ति को ऋण दिया गया है और उसे प्रताडि़त कर रहा है या शासन द्वारा निर्धारित ब्याज की दर से अधिक ब्याज की दर से ऋण की वसूली करता है तो पुलिस को ऐसी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए विधिसम्मत कार्यवाही अधिनियमों के साथ-साथ भारतीय दण्ड विधान के सुसंगत धाराओं के अंतर्गत होगी।

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