आवासीय ज़मीन पर 400 करोड़ का खेल…गरीबों के 311 प्लॉट पावर प्ले में निगले गए पूरे मामले की शिकायत सीधे अपर मुख्य सचिव से की शासन से जांच की मांग

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आवासीय ज़मीन पर 400 करोड़ का खेल…गरीबों के 311 प्लॉट पावर प्ले में निगले गए
पूरे मामले की शिकायत सीधे अपर मुख्य सचिव से की शासन से जांच की मांग
कटनी।। नगर निगम की आवासीय योजना क्रमांक–15, जो आम जनता को सस्ते मकान का सपना दिखा रही थी, आज कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण और अफसरशाही की मिलीभगत की भेंट चढ़ गई। 20.50 एकड़ की बहुमूल्य भूमि, जिसकी कीमत लगभग 400 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, को अधिग्रहण से मुक्त कर विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों के नाम कर दिए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आज यह पूरा मामला नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के समक्ष दस्तावेजों सहित रखा गया, जहाँ शिकायतकर्ताओं ने इसे जनहित के साथ खुला विश्वासघात बताया। योजना क्रमांक–15 पर उठे तीखे सवाल मे क्या 311 आम नागरिकों के लिए सृजित भूखंड नियमों के तहत खत्म किए गए, क्या नगर निगम और राजस्व अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में है,क्या अधिग्रहण से मुक्त कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने एसीएस नगरीय विकास से सीधी शिकायत की है। आरोप है कि शहर के गरीब-मध्यम वर्ग के लिए बनाई गई योजना को राजनीतिक दबाव में खत्म कर दिया गया। एक तरफ नगर निगम विकास कार्यों के लिए फंड न होने की दुहाई देता है, दूसरी तरफ 400 करोड़ की सरकारी भूमि निजी हाथों में जाने के आरोप लग रहे हैं। योजना क्रमांक–15 में 311 परिवारों के लिए बने भूखंड आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सीवर लाइन में कथित भ्रष्टाचार, एमएसडब्ल्यू प्लांट की बदहाल स्थिति और अव्यवस्थाओं के बीच यह मामला बताता है कि शहर का सिस्टम आम जनता के पक्ष में क्यों नहीं खड़ा हो पा रहा। यूथ कांग्रेस और पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जनहित की योजना को निजी हित में बदल दिया गया। नेताओं ने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह कटनी के इतिहास का सबसे बड़ा आवासीय भूमि घोटाला साबित होगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर निगम द्वारा अधिग्रहित, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 400 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उक्त भूमि को कथित तौर पर नगर निगम व राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अधिग्रहण से विमुक्त कर दिया गया और बाद में इसे विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों के नाम पर गैरकानूनी रूप से क्रय कर अवैध कब्जे में ले लिया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि तत्कालीन नगर सुधार कटनी द्वारा इस योजना के अंतर्गत आम जनता के लिए रियायती दरों पर 311 भूखंड सृजित किए गए थे, ताकि मध्यम व निम्न आय वर्ग के लोगों का घर का सपना पूरा हो सके। आरोप है कि बाद में यह पूरी योजना ही प्रभावित हुई और आम जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचा।

प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा भी उठाया कि एक ओर नगर निगम फंड की कमी का हवाला देकर विकास कार्यों को सीमित कर रहा है, वहीं सीवर लाइन परियोजना में भ्रष्टाचार, एमएसडब्ल्यू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की खामियां और शहर में फैली अव्यवस्थाएं किसी से छिपी नहीं हैं। इन सभी बिंदुओं पर अपर मुख्य सचिव का ध्यान आकृष्ट कराया गया। इस अवसर पर योजना क्रमांक–15 के भूमि मामले के शिकायतकर्ता कमल पांडे, पार्षद विनीत जायसवाल, कपिल रजक, यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहम्मद इसराइल, पूर्व पार्षद राहुल पटेरिया, विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष सचिन गर्ग, एनएसयूआई प्रदेश सचिव अजय खटिक एवं सूर्यकांत कुशवाहा सहित अन्य उपस्थित रहे। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो और जनसरोकार से जुड़ी इस आवासीय भूमि को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप आम जनता के हित में उपयोग में लाया जाए।

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