स्पष्ट संदेश: निजी नहीं, जनहित का मेडिकल कॉलेज नहीं चाहिए पीपीपी मोड का मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल के खिलाफ जनआक्रोश, मांग को लेकर कटनी रहा बंद

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स्पष्ट संदेश: निजी नहीं, जनहित का मेडिकल कॉलेज
नहीं चाहिए पीपीपी मोड का मेडिकल कॉलेज
पीपीपी मॉडल के खिलाफ जनआक्रोश, मांग को लेकर कटनी रहा बंद
जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज के स्थान पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज शुरू करने के सरकार के निर्णय के विरोध में कटनी में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला।सरकार ने जिले को पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज देने का वादा किया था, लेकिन अब पीपीपी मॉडल लागू कर जनता के साथ वादाखिलाफी की जा रही है।

कटनी।। प्रस्तावित पीपीपी मोड मेडिकल कॉलेज के विरोध में आज शहर की जनता ने जो एकजुटता दिखाई, उसने यह साफ संदेश दे दिया कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण स्वीकार्य नहीं है। पीपीपी मॉडल के खिलाफ उठी इस सामूहिक आवाज़ को मजबूती देने के लिए नगर के व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान दोपहर तक बंद रखे और पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग को दोहराया। जनता का तर्क स्पष्ट और तार्किक है। पीपीपी मॉडल में संचालित मेडिकल कॉलेज में जहां इलाज, जांच और शिक्षा के नाम पर शुल्क बढ़ने की आशंका बनी रहती है, वहीं गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज न केवल निशुल्क या कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराता है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित करता है।
आज के बंद के माध्यम से कटनीवासियों ने यह भी संकेत दिया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता की चिंता और भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जागरूकता का प्रतीक है। शहर के प्रमुख बाजारों, व्यावसायिक क्षेत्रों और उपनगरीय इलाकों में बंद का असर दिखा, जो इस आंदोलन की व्यापकता और जनसमर्थन को दर्शाता है।
कटनी की जनता का स्पष्ट कहना है कि सरकारी जमीन और संसाधनों का उपयोग निजी कंपनियों के लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के हित में होना चाहिए। मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान का उद्देश्य मुनाफा नहीं, बल्कि सेवा होना चाहिए। अब यह जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है कि वह कटनी की इस लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण चेतावनी को गंभीरता से सुने। जनता ने आज अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर यह साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में पीपीपी मोड का मेडिकल कॉलेज उन्हें स्वीकार नहीं है। बंद के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में इसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया। बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे यह साफ हो गया कि इस मुद्दे पर जनता एकजुट है और सरकार के निर्णय के खिलाफ खड़ी है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को मिशन मोड में चलाया जाएगा, लेकिन कटनी की जमीन पर केवल और केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज ही बनेगा। पीपीपी मॉडल लागू होने से इलाज और जांच के शुल्क बढ़ेंगे, गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को नुकसान होगा तथा सरकारी संसाधनों का लाभ निजी कंपनियों को मिलेगा।
स्पष्ट संदेश: निजी नहीं, जनहित का मेडिकल कॉलेज
कटनी बंद और सड़क पर उतरी जनता ने शासन को साफ संदेश दे दिया है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब शासन की ओर टिकी निगाहें इस बात पर हैं कि वह कटनी की जनता की इस सामूहिक और लोकतांत्रिक आवाज़ को कितनी गंभीरता से सुनता कटनी को चाहिए एक पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज जो सबके लिए सुलभ, भरोसेमंद और जनहितकारी हो।

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