जनसुनवाई नहीं न्याय की दस्तक, सत्ता का उद्देश्य आदेश नहीं, समाधान….जवाबदेही की कसौटी है, महापौर की जनसुनवाई जहां हर अधिकारी को देना पड़ता है जवाब महीनों से भटके चेहरों पर लौटी मुस्कान, महापौर की पहल बनी उम्मीद की किरण

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जनसुनवाई नहीं न्याय की दस्तक, सत्ता का उद्देश्य आदेश नहीं, समाधान….जवाबदेही की कसौटी है, महापौर की जनसुनवाई जहां हर अधिकारी को देना पड़ता है जवाब
महीनों से भटके चेहरों पर लौटी मुस्कान, महापौर की पहल बनी उम्मीद की किरण
कटनी।। नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटते-काटते जिन नागरिकों के चेहरों से मुस्कान गायब हो चुकी थी, जिनकी आंखों में थकान और निराशा साफ झलकती थी उन चेहरों पर मंगलवार को फिर से रौनक लौट आई। यह बदलाव संभव हुआ महापौर जनसुनवाई में, जहां महीनों से लंबित समस्याओं का एक ही मंच पर समाधान हो गया।
जनसुनवाई में पहुंचे कई नागरिकों ने बताया कि वे लंबे समय से स्वच्छता, जलापूर्ति, सड़क, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर नगर निगम के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी। अंततः महापौर की जनसुनवाई में उनकी पीड़ा को न सिर्फ सुना गया, बल्कि उसी समय समाधान के स्पष्ट निर्देश भी दिए गए।नगर निगम द्वारा नागरिक समस्याओं के त्वरित निराकरण, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार को मेयर इन काउंसिल कक्ष में महापौर जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न वार्डों से बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जनसुनवाई के दौरान महापौर प्रीति संजीव सूरी का रुख पूरी तरह संवेदनशील, सक्रिय और समाधान-केंद्रित रहा। उन्होंने प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। कई मामलों में तुरंत समाधान होने से महीनों से परेशान नागरिकों के चेहरों पर संतोष और राहत की मुस्कान साफ नजर आई।
समस्या का निराकरण होते ही जिन चेहरों पर महीनों की पीड़ा थी, वहां संतोष और खुशी साफ दिखाई दी। नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि यह पहल केवल औपचारिक जनसुनवाई नहीं, बल्कि जनता के हृदय को समझने की सच्ची कोशिश है। नागरिकों का मानना है कि प्रीति संजीव सूरी जनसुनवाई को महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य मानती हैं। वे यह भली-भांति समझती हैं कि जनता ने उन्हें जिस गौरवशाली पद पर बैठाया है, उसका वास्तविक अर्थ जनता को उसके अधिकार दिलाना है। यही कारण है कि वे अधिकारियों को समय-समय पर सख्त निर्देश देकर यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी नागरिक को अनावश्यक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।
जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 49 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 18 मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शेष प्रकरणों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई में उपस्थित नागरिकों ने कहा कि यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए न्याय की तरह है, जिन्हें महीनों की मेहनत, लगातार भागदौड़ और जवाबदेही की मांग के बाद आखिरकार उनका हक मिला। यह जनसुनवाई प्रशासनिक संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण है, जिससे हर अधिकारी को यह सीख लेनी चाहिए कि सत्ता का उद्देश्य आदेश देना नहीं, समाधान देना होता है।
नागरिकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इसी तरह संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ जनसुनवाई होती रही, तो नगर निगम और जनता के बीच भरोसा और मजबूत होगा तथा कटनी शहर सुशासन का उदाहरण बनेगा। नागरिकों ने बताया कि वे लंबे समय से नगर निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा था। महापौर जनसुनवाई में पहली बार उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी समस्या सिर्फ सुनी नहीं गई, बल्कि उसका जिम्मेदार अधिकारी तय कर जवाबदेही भी सुनिश्चित की गई। उनका कहना है कि यदि हर अधिकारी महापौर की तरह जनता के बीच बैठकर उनकी समस्या सुने, तो प्रशासन की तस्वीर ही बदल जाए।

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