IAS संतोष कुमार वर्मा के बयान पर अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद का विरोध तेज, शहडोल में पुतला दहन

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(अनिल तिवारी)
शहडोल। मध्यप्रदेश में उप सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग संतोष कुमार वर्मा द्वारा 23 नवंबर को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए कथित बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद ने इस बयान को ब्राह्मण समाज की महिलाओं का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। परिषद ने इस मामले को समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सोमवार को शहडोल में संतोष कुमार वर्मा का पुतला दहन किया गया।
परिषद की ओर से राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय, प्रदेश अध्यक्ष सी.बी. त्रिवेदी और जिला पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से ज्ञापन जारी कर कहा कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से ऐसी असंवेदनशील टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। ज्ञापन में बताया गया कि संतोष कुमार वर्मा के कथित बयान में ब्राह्मण समाज की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जो न केवल समाज का तिरस्कार है, बल्कि प्रशासनिक मर्यादा का भी उल्लंघन है।
परिषद के प्रदेश महासचिव डॉ. डी. जयकृष्णन, संयोजक महेन्द्र कुमार शुक्ला और सचिव संजय तिवारी ने कहा कि संतोष कुमार वर्मा का यह व्यवहार अस्वीकार्य है और सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उनका कहना है कि एक IAS अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर ऐसा बयान देना समाज में वैमनस्य फैलाने वाला कदम है। जिला स्तर पर किए गए विरोध प्रदर्शन में दर्जनों लोग शामिल हुए और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
परिषद ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया कि संतोष कुमार वर्मा द्वारा अपनी बेटी का उदाहरण देकर समाज की महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई। यह टिप्पणी ब्राह्मण समाज के साथ ही पूरे राज्य की महिलाओं के लिए अपमानजनक मानी जा रही है। परिषद ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और संबंधित विभाग को ज्ञापन भेजकर संतोष कुमार वर्मा पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शहडोल में हुए पुतला दहन के दौरान समाज के लोगों ने कहा कि जब तक सरकार इस मामले में स्पष्ट कार्रवाई नहीं करती, तब तक विरोध जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद ने साफ कहा है कि यह मामला केवल एक बयान का नहीं, बल्कि समाज के सम्मान का प्रश्न है, जिसके लिए वह किसी भी स्तर तक संघर्ष करेगा।

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