फर्जी आपत्तियों से मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप, कांग्रेस ने उठाए SIR प्रक्रिया पर सवाल,मतदाता अधिकारों से खिलवाड़, सौंपा ज्ञापन की कार्यवाही मांग

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फर्जी आपत्तियों से मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप, कांग्रेस ने उठाए SIR प्रक्रिया पर सवाल,मतदाता अधिकारों से खिलवाड़, सौंपा ज्ञापन की कार्यवाही मांग
कटनी।। शहर में चल रही SIR स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया अब गंभीर संदेहों के घेरे में आ गई है। जिला कांग्रेस कमेटी शहर ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया की आड़ में लोकतंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है, जिसके तहत बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाए जा रहे हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी शहर के जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला एडवोकेट ने पुलिस अधीक्षक के नाम सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया है कि शहर के अनेक वार्डों में बाहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले व्यक्तियों द्वारा फॉर्म नंबर-7 भरकर एक-एक वार्ड में 100 से 300 तक मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्तियाँ दर्ज कराई गई हैं। यह प्रक्रिया न केवल संदिग्ध है, बल्कि सीधे-सीधे मतदाता अधिकारों पर हमला मानी जा रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि जिन व्यक्तियों के नाम से आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं, उनसे जब प्रत्यक्ष पूछताछ की गई तो उन्होंने ऐसी किसी भी आपत्ति से साफ इनकार किया। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि किसी संगठित गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मतदाता सूची में हेरफेर किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि संविधान प्रदत्त मताधिकार को छीनने की गंभीर आपराधिक साजिश का है। इसी को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि फर्जी तरीके से फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्तियों एवं इसमें संलिप्त अधिकारियों/कर्मचारियों पर तत्काल FIR दर्ज की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
यह ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया को सौंपा गया, जहां कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने त्वरित कार्रवाई की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि बिना वास्तविक आपत्तिकर्ता के नाम से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है।

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