अनूपपुर: चचाई थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल, सरकारी कर्मचारी की बाइक चोरी के बाद भी एफआईआर नहीं – क्या सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर?

0

 

अनूपपुर । जिले के चचाई थाना क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल चोरी का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न बन गया है। वेंकटनगर निवासी राम कुमार सिंह बघेल, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं और वर्तमान में बीएलओ (Booth Level Officer) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उनकी हीरो पैशन मोटरसाइकिल 15 फरवरी 2026 को चोरी हो गई।

पीड़ित के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उन्होंने चचाई थाने में लिखित आवेदन दिया, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही शिकायत की रिसीविंग दी गई। आरोप है कि थाने में पदस्थ ASI नागेश ने यह कहकर मामला टाल दिया कि “पहले हम ढूंढ लेते हैं, फिर रिपोर्ट करेंगे।” सवाल यह है कि जब संज्ञेय अपराध की सूचना स्पष्ट रूप से दी गई, तो कानून के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पीड़ित एक सरकारी कर्मचारी हैं और बीएलओ के रूप में चुनाव एवं प्रशासनिक कार्यों से जुड़े हैं। आगामी जनगणना और 20 फरवरी तक चल रहे निर्वाचन संबंधी कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका थी। बाइक चोरी और पुलिस की अनदेखी के कारण उनके शासकीय दायित्व भी प्रभावित हो रहे हैं। यदि एक सरकारी कर्मचारी, जो स्वयं प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा है, उसे ही न्याय के लिए भटकना पड़े, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?

लगातार अनसुनी के बाद 20 फरवरी 2026 को पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक 36908201) में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सीएम हेल्पलाइन का भी कोई प्रभाव नहीं है? यदि वहां दर्ज शिकायत के बाद भी थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होती, तो जनता आखिर किस पर भरोसा करे?

25 फरवरी को पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक, अनूपपुर को लिखित शिकायत दी। आरोप है कि इसके बाद ASI नागेश ने उन्हें थाने बुलाकर 181 की शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और कथित तौर पर कहा कि “शिकायत काट लो, मोटरसाइकिल दिलवा देंगे, आपस में समझौता करा देंगे।” यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास माना जाएगा।

सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या अब एफआईआर दर्ज कराना भी संघर्ष का विषय बन गया है? सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि संज्ञेय अपराध की सूचना पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसे में आवेदन लेने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज न करना किस नियम के तहत उचित ठहराया जा सकता है?

चचाई थाने और अनूपपुर पुलिस की जवाबदेही अब कटघरे में है। यह मामला केवल एक मोटरसाइकिल चोरी का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता का है। जब एक बीएलओ जैसे जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी के साथ यह स्थिति हो सकती है, तो आम जनता के लिए न्याय की राह कितनी कठिन होगी—यह सोचने का विषय है।

अब देखना होगा कि जिला पुलिस प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करता है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था का वास्तविक महत्व क्या है—क्या वह केवल औपचारिकता है या सच में जनता को न्याय दिलाने का प्रभावी माध्यम?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed