न्याय की तलाश में आग तक पहुँचा आवेदक सिस्टम से निराश युवक का आत्मदाह प्रयास प्रशासन में खलबली जनसुनवाई में टला बड़ा हादसा

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न्याय की तलाश में आग तक पहुँचा आवेदक सिस्टम से निराश युवक का आत्मदाह प्रयास प्रशासन में खलबली जनसुनवाई में टला बड़ा हादसा
कटनी।। जिले में सोमवार की जनसुनवाई उस समय सनसनीखेज बन गई जब कलेक्ट्रेट परिसर में तीन साल से अपनी शिकायत का समाधान न मिलने से आहत एक युवक ने अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह का प्रयास कर दिया। घटना कुछ ही पल में पूरे परिसर में हड़कंप मचाने वाली बन गई। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए युवक को पकड़ लिया और संभावित बड़ी घटना टल गई। घटना ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि शासन की आमजन के प्रति सबसे संवेदनशील योजना ‘जनसुनवाई’ कहीं अपनी मूल भावना से डगमगा तो नहीं रही है?
आत्मदाह का प्रयास करने वाला युवक भारत पटेल, निवासी ग्राम पूरी, थाना स्लीमनाबाद, अपनी पत्नी और परिवार के साथ जनसुनवाई में पहुँचा था। उसने बताया कि तीन वर्षों से वह लगातार आवेदन दे रहा है, पुलिस और स्थानीय दबंगों द्वारा हमला, गंभीर चोटों और कथित उत्पीड़न की शिकायत कर रहा है, लेकिन उसकी सुनवाई के बजाय उस पर ही काउंटर केस, डिस्टर्बेंस, और फेक्चर केस दर्ज कर दिये गए। भारत पटेल का कहना था कि पुलिस और आरोपियों के दबाव के कारण उसका इलाज भी प्रभावित हुआ है, और वह न्याय के लिए लगातार भटकता रहा लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी निराशा में आज उसने जनसुनवाई के दौरान पेट्रोल डालकर अपनी जान देने की कोशिश की।

घटना के ठीक समय कलेक्टर आशीष तिवारी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में आवेदकों की समस्याएँ सुन रहे थे। कलेक्टर द्वारा 46 से अधिक आवेदकों की शिकायतें सुनी गई थीं और संबंधित विभागों को समाधान के निर्देश दिए जा चुके थे। जनसुनवाई में अपर कलेक्टर नीलांबर मिश्रा, डिप्टी कलेक्टर विंकी सिंहमारे उइके, और सभी विभागों के जिला अधिकारी मौजूद थे। घटना सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई और अधिकारी तुरंत मौके की ओर दौड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक ने अचानक बैग से पेट्रोल की बोतल निकाल ली और खुद पर उड़ेलना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत हरकत में आते हुए युवक को पकड़ लिया, पेट्रोल की बोतल छीनी और प्रशासन को सूचना दी। यदि कुछ सेकंड और बीत जाते, तो एक बड़ी घटना होना निश्चित था। घटना के बाद प्रशासन ने पीड़ित को शांत कराया और उसकी शिकायतों की तत्काल सुनवाई का आश्वासन दिया। सूत्र बताते हैं कि कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को फाइलों की तत्काल समीक्षा के निर्देश दिए हैं, युवक के लगाए आरोपों और दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं, जनसुनवाई का उद्देश्य नागरिकों को सीधी सुनवाई व त्वरित राहत देना है।

लेकिन आज की घटना ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है क्या पीड़ितों की पीड़ा सही मंच तक पहुँच रही है? क्या विभागीय स्तर पर फाइलें अटक रही हैं? क्या पुलिस की जांच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है? और क्या जनसुनवाई के सिद्धांत “हर शिकायत का समाधान वास्तव में जमीन पर उतर पा रहे हैं? घटना केवल आत्मदाह प्रयास भर नहीं थी, बल्कि जनसुनवाई की संवेदनशीलता और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह बनकर उभरी है। हालाँकि समय रहते बड़ी घटना टल गई।

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