BREAKING: गौरेला में सियाराम इंडेन गैस एजेंसी की मनमानी, उपभोक्ता परेशान! पूरी रिपोर्ट देखें वीडियो सहित बड़ी खबर: पैसे जमा करने और पर्ची कटने के 2 दिन बाद भी नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर।

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BREAKING: गौरेला में सियाराम इंडेन गैस एजेंसी की मनमानी, उपभोक्ता परेशान!

 

बड़ी खबर: पैसे जमा करने और पर्ची कटने के 2 दिन बाद भी नहीं मिल रहा गैस सिलेंडर।

 

ग्राउंड रिपोर्ट: प्रशासन के दावे फेल, गैस समस्याओं के लिए बना कंट्रोल रूम पड़ा ठप्प।

 

मोहम्मद शाकिब खान की खास पड़ताल

 

प्रशासन के दावे फाइलों में कितने ही मजबूत क्यों न हों, लेकिन उनकी जमीनी हकीकत अक्सर जनता के आंसू बनकर छलकती है। आज हम आपको जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के गौरेला क्षेत्र से एक ऐसी सनसनीखेज खबर दिखाएंगे, जो सीधे आपकी रसोई और आपके अधिकारों से जुड़ी है।

 

मामला गौरेला क्षेत्र में स्थित ‘मैसर्स सियाराम इंडेन गैस एजेंसी’ का है। जहाँ गैस सिलेंडर की बुकिंग अब आम जनता के लिए किसी जंग से कम नहीं रह गई है। एजेंसी के कर्मचारियों पर उपभोक्ताओं के साथ बदसलूकी और घोर दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

 

 

“‘हाल ए हलचल’ की टीम जब जनहित के इस मुद्दे की पड़ताल करने नगरपालिका गौरेला के दीपू पारा पहुंची, तो हमारी मुलाकात आयशा बेगम और अफरोज अहमद से हुई। इनका दर्द सुनकर सिस्टम की लचर व्यवस्था पर आपको भी गुस्सा आएगा। इन्होंने गैस एजेंसी में सिलेंडर की पूरी राशि जमा कर दी है… बुकिंग की पर्ची भी कट चुकी है।

इस प्रकार की पर्ची गैस एजेंसी द्वारा काट कर दी जा रही है 👆

लेकिन 2 दिन बीत जाने के बाद भी ये बेबस उपभोक्ता खाली सिलेंडर लिए गैस का इंतजार कर रहे हैं।

 

 

लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। सबसे बड़ा सवाल तो जिला प्रशासन के उन दावों पर है, जो जमीनी स्तर पर पूरी तरह खोखले और झूठे साबित हो रहे हैं। गैस सिलेंडर की समस्याओं के समाधान के लिए जो ‘कंट्रोल रूम’ स्थापित किया गया था और जो नंबर जारी किए गए थे… जब हमारी टीम ने उनकी हकीकत जांची, तो पता चला कि वहां सभी सेवाएं पूरी तरह से ठप्प पड़ी हैं। फोन की घंटियां बजती हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

 

 

अब सवाल यह उठता है कि जब एजेंसी कर्मचारी मनमानी करेंगे और प्रशासन के कंट्रोल रूम सोए रहेंगे, तो आम और बेबस जनता अपनी शिकायत लेकर आखिर जाए तो कहाँ? क्या जिला प्रशासन मैसर्स सियाराम इंडेन गैस एजेंसी की इस तानाशाही पर कोई लगाम लगाएगा? या फिर जनता यूं ही पर्ची हाथ में लिए सिलेंडरों के लिए धक्के खाती रहेगी?

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