पप्पू की फुल स्पीड गाड़ी से अनजान तो नहीं हो सकते कप्तान…!!
(शुभम तिवारी)
शहडोल । नाम भर का पप्पू, लेकिन करतूतों में अपने साहब के लिए महाभारत वाला “संजय” बना बैठा है।
कहाँ जाना है, कब जाना है – सबके रास्ते इसी की जेब से होकर निकलते हैं।
अगर कभी इसके मोबाइल की असली “जाँच मशीन” चल जाए, तो कॉल डिटेल से लेकर गूगल पे तक की परतें खुलने लगें।
पता चल जाए कि पैसा कहाँ से आता है, किसके खाते में जाता है, और रास्ते में कितना “कमीशन काटकर” आगे बढ़ाया जाता है – तो कप्तान भी लाल हो जाएं।
लेकिन मज़े की बात ये है कि सबसे बड़े साहब तो जैसे पुराने ढर्रे पर चलते हुए अनजान बने रहते हैं।
उनके लिए अपराध सिर्फ़ तब अपराध है, यदि अख़बार की सुर्ख़ी बन जाए।
बाक़ी, चाहे दुनिया उलट जाए, “महाराज पप्पू” की गाड़ी तो फर्राटा भरती ही रहती है।
पप्पू तो सिर्फ पास नहीं बल्कि मैरिट में आ गया, लेकिन नवाचार वाले साहब यही गच्चा खा गए,अब देखना ये है कि पप्पू की गाड़ी कब तक सड़क पर दौड़ती है और कब इसकी हवा निकलती है।