मामा की लाडली बहना के साथ सीबीएम ने की ठगी

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               कोदो व राहर की फसल रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट ने ली हर

आशीष कचेर
शहडोल। सोहागपुर तहसील के लालपुर ग्राम में रहने वाली आदिवासी महिला रूनिया कोल के साथ रिलायंस सीबीएम
प्रोजेक्ट के कारिंदो ने ठगी कर ली, पीडि़ता ने कलेक्टर शहडोल श्रीमती वंदना वैद्य के कार्यालय में आवेदन देकर
न्याय की गुहार लगाई है, पीडि़ता ने बताया कि वह अपनी बेवा मां के साथ लालपुर की पुस्तैनी निवासी है। आदिवासी
कोल समाज से ताल्लुख रखने वाली स्व. बुद्धा कोल और बेवा दोहगी कोल की पुत्री रूनिया ने शिकायत देते हुए
बताया कि उसके साथ धोखाधड़ी की गई है और जिस पुस्तैनी डोलिया (भू-खण्ड) में वह थोड़ी-बहुत काश्तकारी कर
अपना व बेवा मां का गुजर-बसर कर रही थी, धोखे से रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट के कारिंदों ने हथिया लिया। जिस
कारण वो और उसके आश्रित भूखे मरने की कगार पर हैं।
यह लिखा शिकायत मे
पीडि़ता रूनिया कोल ने कलेक्टर को दी गई शिकायत में लिखा कि सोहागपुर तहसील पटवारी हलका लालपुर अंतर्गत
आराजी खसरा नंबर 841 एवं 2026 कुल 4 एकड़ भूमि जो ग्राम लालपुर राजस्व निरीक्षक मण्डल कंचनपुर में स्थित
है। उक्त भू-खण्ड शिकायतकर्ता और उसकी मां बेवा दोहगी कोल के नाम पर है, रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट लालपुर
द्वारा उक्त भू-खण्ड को अधिग्रहण कर भूमि पर बनी डोलिया को पूरी तरह से परिवर्तित करते हुए फिलिंग कर दी गई
है और अब कंपनी के उपयोग में ले लिया गया है। उक्त भू-खण्ड पर राहर और कोदो की फसल बोई गई थी, जो पूरी
तरह नष्ट कर दी गई।

कोरे कागज में हस्ताक्षर
पीडि़ता ने बताया कि उसे कार्यालय बुलवा कर फसल की नुकसानी के रूप में 1 लाख 40 हजार रूपये दिये गये और
परिवार के समस्तजनो से कोरे कागज में हस्ताक्षर करा लिए गये, मौखिक तौर पर यह बताया गया कि उक्त भूमि का
शासन के नियमानुसार मुआवजा राशि खाते में दी जायेगी और परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी पर भी रखा
जायेगा। तब से लेकर आज तक लगातार चक्कर लगवाये जा रहे हैं। कंपनी द्वारा हमारे अनपढ़ और आदिवासी होने
का फायदा उठाकर ठगी की गई है।
शिकायतों पर नहीं हो रही कार्यवाही
बीते दो से तीन वर्षाे के दौरान बुढ़ार थाने से लेकर सोहागपुर थाने और दोनों ही क्षेत्रों के तहसील कार्यालयों में भी
रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट के कारिंदो की मनमानी और दबंगई को लेकर दर्जनों शिकायतें लंबित पड़ी है। यही नहीं
पुलिस अधीक्षक कार्यालय और कलेक्टर तक के कार्यालय में इस तरह के आवेदन धूल खा रहे हैं। स्थानीय स्तर से
लेकर जिला स्तर तक रिलायंस के अधिकारियों का मैनेजमेंट किसी से छुपा नहीं है, अब तो खुलकर इस बात के दावे
तक किये जाते हैं कि शिकायतों का सीबीएम प्रोजेक्ट की कार्यशैली पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लंबित शिकायतें और
लगातार बढ़ रही शिकायतकर्ताओं की लाईन उनके दावे को पुष्ट भी करती है।

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