राखड़ के भ्रष्टाचार में डूबा करोड़ों का निर्माण

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प्राक्कलन से परे हटकर हो रहा निर्माण कार्य

रेत व गिट्टी नहीं है मानकों के अनुरूप

शासन की मंशा पर कुठाराघात

पीआईयू करा रहा हर्री में निर्माण कार्य

शहडोल। संभागीय मुख्यालय के समीप ग्राम हर्री में लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) के मार्गदर्शन में करोड़ों की लागत का स्कूल व छात्रावास बनाया जा रहा है, आदिवासी क्षेत्र में स्थानीय बच्चों को छात्रावास के साथ अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने की शासन की मंशा जिम्मेदारों की मनमानी व लापरवाही के कारण खटाई में पड़ सकती है, वहीं करोड़ों का बजट भी एजेंसी व विभाग के बीच पक रही खिचड़ी के कारण कटघरे में नजर आ रहा है। निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर अब तक जिले के वरिष्ठ जिम्मेदारों ने शायद ही कोरोना की व्यस्तता के कारण यहां का दौरा किया हो, जिसका पूरा फायदा निर्माण एजेंसी और पीआईयू के जिम्मेदार उठाने से नहीं चूक रहे हैं।
24 माह में होना है निर्माण
560 बच्चों के लिए शासन द्वारा पीआईयू के माध्यम से ठेका पद्धति के बाद इन्दौर की अपेक्स स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को उक्त कार्य आवंटित किया गया था, बीते वर्ष जुलाई के अंतिम तारीख में कार्य का आवंटन हुआ था, जिसे 24 माह में पूरा करना था, यहां स्कूल के साथ छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास का निर्माण होना हैं, गुरूकुलम के नाम पर शासन के द्वारा 2440.70 लाख का बजट स्वीकृत किया गया है।

घटिया रेत के साथ डस्ट का खेल
भवन के निर्माण में प्राक्कलन के अनुरूप रेत का उपयोग नहीं किया जा रहा है, ठेकेदार के द्वारा स्थानीय लोगों से रेत क्रय की जा रही है, जो आस-पास के नालों व नदियों से चोरी करके लाई जा रही है, आरोप तो यह भी है कि ठेकेदार रूपये बचाने के फेर में घटिया रेत कम दामों में ले रहे हैं और विभाग का रिकार्ड मेंनटेन करने के लिए अलग से रॉयल्टी पर्ची ली जा रही है। निर्माण स्थल पर पड़ी रेत और ईटीपी वाली रेत का भौतिक सत्यापन किया जाये तो, सच खुद-ब-खुद सामने आ सकता है। यही नहीं मौके पर दर्जनों ट्राली स्टोन डस्ट भी ठेकेदार के द्वारा रखी गई है, जिसे रेत और सीमेंट साथ मिलाकर निर्माण कार्य में उपयोग किया जा रहा है। सीमेंट बचाने के फेर में स्टोन डस्ट से भवन को कितनी मजबूती मिलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।
मजदूरों का हो रहा शोषण

इन्दौर की अपेक्स स्ट्रक्चर के द्वारा निर्माण कार्य में लगाये गये कुशल व अकुशल मजदूरों को शासन की नई गाईड लाईन के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है, यही नहीं मजदूरों का बीमा और उसके खाते में मजदूरी का भुगतान न कर निर्माण एजेंसी मजदूरों का शोषण कर रही है, इतना ही नहीं मजदूरों से निर्धारित कार्याे के घंटो से अधिक कार्य करवाया जा रहा है और उन्हें कार्य के दौरान सुरक्षा के उपकरण भी नहीं दिये जाते, यदि यहां कार्य करने के दौरान कोई श्रमिक दुर्घटना का शिकार होता है तो, उसकी जिम्मेदारी किस पर तय होगी, यह कहा नहीं जा सकता। खबर तो यह भी है कि तथाकथित कंपनी ने झारखण्ड राज्य से दर्जनों मजदूरों को यहां लाकर रखा हुआ है, जिनका पुलिस वैरीफिकेशन भी नहीं कराया गया है।
प्राक्कलन से हटकर निर्माण

लोक निर्माण विभाग की अनुशांगिक एजेंसी पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री रमाकांत पाण्डेय, सहायक परियोजना यंत्री वी.के. टोप्पो तथा राजेश शाहनी के निर्देशन में उक्त कार्य होना था, लेकिन मौके पर जब हमारी टीम ग्रामीणों की शिकायत के बाद पहुंची तो, वहां बड़ी संख्या में मजदूर तो कार्य कर रहे थे, लेकिन विभाग का कोई जिम्मेदार वहां नजर नहीं आया। विभागीय अधिकारियों से प्राक्कलन से हटकर हो रहे निर्माण कार्य के संदर्भ में संपर्क करने का भी प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
अध्ूारी न रह जाये मंशा

शासन के द्वारा करोड़ों रूपये का बजट आवंटित कर आदिवासी ग्रामों के सैकड़ों बच्चों के भविष्य को लेकर रखी जा रही आधारशिला, विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ रही है, यदि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों तथा विभाग के जिम्मेदारों ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई तो, निर्माण एजेंसी ताश के पत्तों की तरह करोड़ों का बजट निपटाकर यहां से चली जायेगी और इसका खामियाजा यहां के ग्रामीण और आदिवासियों को भुगतना पड़ेगा, ग्रामीणों ने कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह से अपील की है कि जांच कमेटी बनाकर निर्माण स्थल पर रखी सामग्री और ईटीपी आदि का भौतिक सत्यापन करवाये, प्राक्कलन तथा मजदूरों के वैरीफिकेशन के बिन्दुओं पर भी जांच कराई जाये।

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