डिजिटल सट्टा–हवाला कटनी में अपराध का नया अंडरवर्ल्ड बैंक खातों से शुरू होकर हवाला तक फैला सट्टा सिंडिकेट,तीन करोड़ का ट्रांजेक्शन ऑनलाइन क्रिकेट जुए ने शहर में खड़ा किया अपराध का साम्राज्य, छत्तीसगढ़ से जुड़े तार, 20% कमीशन पर मास्टर आईडी

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डिजिटल सट्टा–हवाला कटनी में अपराध का नया अंडरवर्ल्ड
बैंक खातों से शुरू होकर हवाला तक फैला सट्टा सिंडिकेट,तीन करोड़ का ट्रांजेक्शन ऑनलाइन क्रिकेट जुए ने शहर में खड़ा किया अपराध का साम्राज्य, छत्तीसगढ़ से जुड़े तार, 20% कमीशन पर मास्टर आईडी
कटनी।। दिलीप शुक्ला {{गोलू }}।। यह कोई साधारण खबर नहीं है। यह समाज के चेहरे पर उभरती वह दरार है, जिसे समय रहते नहीं रोका गया, तो पूरा ढांचा ढह सकता है। कटनी में सामने आया ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और हवाला का मामला केवल करोड़ों के लेनदेन का खुलासा नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि अपराध अब अपवाद नहीं, बल्कि एक समानांतर व्यवस्था बनता जा रहा है, शांत, चुपचाप और बेहद खतरनाक।
अपराध अब बंदूक से नहीं, बैंक खाते से होता है,आज अपराधी हाथ में हथियार नहीं,मोबाइल फोन रखता है। वह गोली नहीं चलाता,ओटीपी और बैंक ट्रांजेक्शन से वार करता है। कर्मचारी के नाम पर खाते खुलवाना, दस्तावेज अपने पास रखना, करोड़ों का लेनदेन करना और फिर हवाला के जरिए रकम बाहर पहुंचाना, यह सब दर्शाता है कि सट्टा अब जुआ नहीं, एक संगठित आर्थिक अपराध उद्योग है। यह उद्योग स्थानीय चेहरों का इस्तेमाल करता है, लेकिन डोर कहीं और से हिलाई जाती है।
सबसे आसान शिकार: शहर का युवा
इस पूरे खेल में सबसे कमजोर कड़ी कौन है? शहर का युवा। जो नौकरी की तलाश में है, जो जल्दी सफल दिखना चाहता है, जो सोशल मीडिया पर अमीरी की चमक देखकर खुद को पीछे मानने लगता है।जब उसे कहा जाता है सिर्फ खाता खुलवाना है,कुछ नहीं होगा, कमीशन मिलेगा,तो वह यह नहीं समझ पाता कि वह अपने नाम को अपराध के खाते में जमा कर रहा है।
आज कमीशन,कल पुलिस,और परसों अदालत।
यह अपराध नहीं, पीढ़ीगत संकट है,यह सोचना बड़ी भूल होगी कि सट्टा–हवाला केवल कानून व्यवस्था की समस्या है। यह मूल्यों का पतन है। जब युवा यह मानने लगे कि मेहनत से ज्यादा शॉर्टकट जरूरी है.ईमानदारी से ज्यादा चालाकी काम आती है और अपराध भी साइड इनकम हो सकता है तो समझ लेना चाहिए कि खतरा केवल कानून को नहीं, भविष्य को है।

कानून सक्रिय है, लेकिन क्या समाज तैयार है?
माधवनगर थाना की कार्रवाई यह दिखाती है कि पुलिस सतर्क है। गिरफ्तारियाँ हो रही हैं, खाते फ्रीज हो रहे हैं, नेटवर्क टूट रहा है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि हर पकड़े गए आरोपी के पीछे दस नए लालच में खड़े युवा तैयार मिल जाते हैं। यह वह क्षण है जहाँ केवल पुलिस नहीं, परिवार, स्कूल, समाज और मीडिया को जिम्मेदारी उठानी होगी। अब भी समय है, लेकिन बहुत कम अगर आज भी यह खबर केवल एक कॉलम बनकर रह गई, अगर इसे “किसी और का मामला” समझकर पलट दिया गया, तो कल यही अपराध
हमारे मोहल्ले,हमारे घर और हमारे बच्चों तक पहुंचेगा।
सट्टा और हवाला सिर्फ पैसा नहीं निगलते वे चरित्र, भरोसा और भविष्य खा जाते हैं। लालच के इस जाल को सामान्य मानना बंद कीजिए। क्योंकि जो अपराध आज दूसरों का लगता है, वह कल समाज की पहचान बन जाता है। अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में की गई यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है क्या केवल पुलिस हर गली, हर मोबाइल और हर बैंक खाते पर नजर रख सकती है? उत्तर साफ है नहीं।
क्या है पूरा मामला
जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए माधवनगर पुलिस ने कपड़ा व्यापारी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि व्यापारी ने अपने ही कर्मचारी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते खुलवाए और उनके जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन कराया। पुलिस जांच में कुल 3 करोड़ 29 लाख 24 हजार के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जबकि 5.52 लाख नकद, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, ग्राम जुहली निवासी अमित दाहिया ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह नई बस्ती स्थित बॉम्बे ब्यूटीफुल साड़ी सेंटर में कार्यरत है। दुकान मालिक योगेश बजाज ने कैश लेन-देन का हवाला देकर उसके नाम से HDFC, बंधन और IDBI बैंक में खाते खुलवाए, पासबुक-एटीएम अपने पास रख लिए और मोबाइल सिम लिंक कर स्वयं ऑनलाइन संचालन करता रहा। जांच में इन खातों में असामान्य और भारी ट्रांजेक्शन पाए गए।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी ने छत्तीसगढ़ कांकेर के मनीष और रोहित से क्रिकेट सट्टे की ऑनलाइन मास्टर आईडी 20% कमीशन पर ली थी। सट्टे की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई जाती और बाद में कैश निकालकर हवाला के जरिए आगे भेज दी जाती थी। मोबाइल से चैट ग्रुप और हिसाब-किताब के डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं।
पुलिस ने सट्टे में प्रयुक्त सभी खातों को होल्ड/फ्रीज कराया है। मामले में बीएनएस की संबंधित धाराएं और पब्लिक गैंबलिंग एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में योगेश बजाज, तरुण मोटवानी और अवधेश गुप्ता शामिल हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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