दिलीप शुक्ला{{गोलू}} की विशेष रिपोर्ट:- लालच से हवाला तक….म्यूल अकाउंट, हवाला और सट्टे की अंधेरी दुनिया….निर्णायक दस्तक के साथ कोतवाली पुलिस ने खोली करोड़ों के अवैध नेटवर्क की परतें,कब्जे से कई पासबुक, एटीएम व सिम बरामद

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दिलीप शुक्ला{{गोलू}} की विशेष रिपोर्ट:-
लालच से हवाला तक….म्यूल अकाउंट, हवाला और सट्टे की अंधेरी दुनिया….निर्णायक दस्तक के साथ
कोतवाली पुलिस ने खोली करोड़ों के अवैध नेटवर्क की परतें,कब्जे से कई पासबुक, एटीएम व सिम बरामद
यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं है। यह कोई दूर बैठा हुआ अंतरराष्ट्रीय माफिया भी नहीं। यह अपराध आपके मोहल्ले, आपकी दोस्ती और आपके बैंक खाते के भीतर जन्म ले रहा है। कटनी में कोतवाली पुलिस द्वारा उजागर किया गया फर्जी खाता गिरोह दरअसल उस खामोश आपराधिक साम्राज्य का छोटा सा दरवाजा है, जिसके जरिए हवाला, क्रिकेट सट्टा और काले धन का डिजिटल कारोबार पूरे देश में फैल रहा है। आज के डिजिटल युग में अपराध का चेहरा बदल चुका है। अब न तो हाथ में हथियार जरूरी है और न ही किसी अंधेरी गली में वारदात। एक मोबाइल फोन, एक बैंक खाता और थोड़ा-सा लालच इतना ही काफी है किसी आम नागरिक को संगठित अपराध की कड़ी बना देने के लिए। कटनी में सामने आया फर्जी खाता,हवाला,सट्टा नेटवर्क इसी बदलते अपराध का जीता-जागता उदाहरण है। कोतवाली पुलिस द्वारा किया गया यह खुलासा केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह उस अदृश्य आपराधिक अर्थव्यवस्था पर करारा प्रहार है, जो म्यूल अकाउंट के सहारे देशभर में फैल चुकी है। जांच में सामने आया कि किस तरह भरोसे, दोस्ती और पैसों के लालच का इस्तेमाल कर भोले-भाले लोगों के नाम पर खाते खुलवाए गए, दस्तावेज अपने कब्जे में रखे गए और फिर उन्हीं खातों से लाखों का संदिग्ध लेन-देन किया गया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि खाताधारक खुद नहीं जानता कि उसका खाता हवाला, क्रिकेट सट्टा या अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। तीन दिन में एक खाते से 6.35 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि नेटवर्क की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं। ऐसे लेन-देन अक्सर काले धन को सफेद करने, सट्टे की रकम घुमाने और साइबर अपराध को छिपाने के लिए किए जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की तत्परता और पेशेवर कार्रवाई सराहनीय है। समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी, पासबुक-एटीएम-सिम की बरामदगी और नेटवर्क की परतें खोलना यह दर्शाता है कि कानून अब डिजिटल अपराधों को हल्के में नहीं ले रहा। हालांकि, यह भी सच है कि यह लड़ाई लंबी है। जब तक लालच रहेगा, तब तक म्यूल अकाउंट बनते रहेंगे।
यह मामला समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी भी है। आज हर महीने 10–15 हजार का लालच कल आपको जेल की सलाखों तक पहुंचा सकता है। बैंक खाता अब केवल लेन-देन का जरिया नहीं, बल्कि आपकी कानूनी जिम्मेदारी भी है। इसे किसी के हवाले करना, अपनी पहचान को अपराध के बाजार में गिरवी रखने जैसा है।
बस खाता खुलवा दो… हर महीने 10–15 हजार मिलते रहेंगे।
यही वह एक पंक्ति है, जो एक ईमानदार नागरिक को अनजाने में अपराध की प्रयोगशाला में धकेल देती है। दोस्ती, भरोसा और पैसों की चमक तीनों मिलकर वह जाल बुनते हैं जिसमें खाताधारक खुद को सुरक्षित समझता है, लेकिन उसका खाता अपराधियों का हथियार बन जाता है। इस केस में भी यही हुआ। पासबुक, एटीएम, सिम—सब आरोपी के पास। खाताधारक नाम का मालिक, लेकिन असली नियंत्रण किसी और के हाथ। म्यूल अकाउंट वही काला घोड़ा है, जिस पर सवार होकर हवाला की रकम घूमती है।
क्रिकेट सट्टे की कमाई छिपती है। साइबर फ्रॉड का पैसा सफेद होता है। तीन दिन में 6.35 लाख रुपये का लेन-देन सिर्फ शुरुआत है। यह संकेत है कि रकम लाखों में नहीं, करोड़ों में भी पहुंच सकती है।
कोतवाली पुलिस ने जिस तेजी और गंभीरता से इस नेटवर्क को तोड़ा, वह यह बताने के लिए काफी है कि कानून अब डिजिटल अपराधों को हल्के में नहीं ले रहा। पासबुकों और एटीएम कार्डों का ढेर इस बात का सबूत है कि यह गिरोह एक दो खातों तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी श्रृंखला खड़ी कर चुका था।
क्या है पूरा मामला :-
दिनांक 17.02.2026 को रबर फैक्ट्री रोड़ कटनी निवासी अभिषेक तोमर पिता अशोक कुमार तोमर द्वारा थाना कोतवाली में उपस्थित आकर रिपोर्ट लेख कराई कि इसका दोस्त योगेश सिंह ठाकुर निवासी जालपा वार्ड हाल शिवाजी नगर गली नं. 02 ने करीब 15 दिन पहले मेरे पास आकर बोला कि मुझे अपने बिजनेस के लिए बैंक अकाउण्ट की जरूरत है, यदि तुम मुझे अपना अकाउण्ट दोगे तो उसके बदले हर माह तुम्हें 10-15 हजार रूपये देता रहूंगा। जो मैनें अपने दोस्त पर भरोसा करते हुए इलाहाबाद बैंक शाखा एन.के.जे. में अपना खाता खुलवाया। खाता खुलने के बाद योगेश सिंह ने मेरे खाते की पासबुक, एटीएम व एकाउण्ट से लिंक मोबाईल नंबर ले लिया। योगेश ने मुझे बोला कि मैं कोई गलत काम नहीं करूंगा खाते में केवल मेरे बिजनेस का पैसा आएगा जिससे तुम्हें भी कुछ आमदनी होती रहेगी। कुछ दिन बाद मुझे बैंक से जानकारी लगी कि मेरे खाते में कुछ ही दिनों में लाखों रूपये का लेन-देन हो रहा है। पैसा कहां से और कैसे आ रहा है ये बात मैनें अपने दोस्त योगेश से पूंछी तो वह बोला कि तुम खाते के लेन-देन से कोई मतलब नहीं रखो, मैं सब देख लूंगा। तब मुझे लगा कि योगेश सिंह ने मुझे विश्वास में लेकर मुझसे धोखाधड़ी की है। अभिषेक तोमर द्वारा थाना कोतवाली में उपस्थित आकर की गई रिपोर्ट पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया एवं दिशा निर्देश प्राप्त किए गए। रिपोर्ट पर अप.क्र. 195/2026 धारा 318(4), 319(2) बीएनएस का आरोपी योगेश सिंह ठाकुर के विरूद्ध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल टीम का गठन किया गया। गठित टीम के द्वारा आरोपी को पकड़ने में सफलता प्राप्त की गई। पकड़े गए योगेश सिंह ठाकुर ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपने जान पहचान के लोगों को पैसों का लालच देकर अलग-अलग बैंकों में म्यूल एकाउण्ट खुलवाता है और खाते संबंधी दस्तावेज जैसे पासबुक, चैक बुक, एटीएम कार्ड और खाते में दर्ज मोबाईल नंबर की सिम को हर्ष नागवानी नि. गुरूनानक वार्ड , अग्नीज उर्फ सैम चंदनानी निवासी जयप्रकाश वार्ड एवं रजनी यादव निवासी गांधीगंज को दे देता है। जिसके एवज में प्रति खाते के हिसाब से मुझे कमीशन मिल जाता है। आरोपी द्वारा बताए गए अन्य आरोपियों हर्ष नागवानी, अग्नीज उर्फ सैम चंदनानी एवं रजनी यादव की पता तलाश की गई। आरोपी हर्ष नागवानी और अग्नीज उर्फ सैम चंदनानी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त हुई। पकड़े गए दोनों आरोपियों के द्वारा भी स्वयं म्यूल खाते खोलकर और योगेश सिंह से मिलने वाले म्यूल खातों को रजनी यादव निवासी गांधीगंज को देना बताया गया। अभिषेक तोमर के बैंक खाते के बारे में बैंक से जानकारी प्राप्त करने पर 03 दिनों में ही खाते में 06 लाख 35 हजार रूपये के लगभग संदिग्ध लेन-देन होना पाया गया है। अन्य खातों के बारे में भी संबंधित बैंकों से जानकारी एकत्रित की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम व पता
योगेश सिंह ठाकुर पिता स्व. देवेन्द्र सिंह ठाकुर उम्र 31 वर्ष नि. जालपा वार्ड हाल शिवाजी नगर गली नं. 02,हर्ष नागवानी पिता राजल नागवानी उम्र 26 वर्ष नि. सब्जी मंडी गुरूनानक वार्ड,अग्निज उर्फ सैम चंदनानी पिता वरियल दास चंदनानी उम्र 32 वर्ष नि. जयप्रकाश वार्ड कुंदन मार्ग गली।
तीनों आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खाते की 07 पासबुक, 07 एटीएम कार्ड व खाते से लिंक सिमकार्ड थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक राखी पाण्डेय के द्वारा बताया गया कि मामले में किस प्रयोजन से खाते खुलवाए जा रहे थे और इनमें पैसा कहां से आ रहा था के संबंध में विवेचना जारी है। पुलिस के अनुसार, यह सिर्फ शुरुआत है। पैसा कहां से आ रहा था?किन-किन राज्यों या नेटवर्क से जुड़ा है?क्या हवाला और क्रिकेट सट्टा इसके केंद्र में है? इन सवालों के जवाब विवेचना में सामने आएंगे।

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