दृष्टि ए विजन NGO:-आज भी ज़िंदा है मानवता, बस देखने की दृष्टि चाहिए जब रंगों से ज़्यादा गहरे होते हैं रिश्ते बच्चों की मुस्कान में सजी सच्ची होली बनी बड़ा उत्सव

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दृष्टि ए विजन NGO:-आज भी ज़िंदा है मानवता, बस देखने की दृष्टि चाहिए
जब रंगों से ज़्यादा गहरे होते हैं रिश्ते बच्चों की मुस्कान में सजी सच्ची होली बनी बड़ा उत्सव
कटनी।। आज के समय में जब समाज में स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और संवेदनहीनता की बातें अधिक सुनाई देती हैं, ऐसे दौर में कुछ लोग और संस्थाएँ उम्मीद की उस रोशनी की तरह सामने आती हैं, जो यह विश्वास दिलाती हैं कि मानवता अभी जीवित है। होली जैसे उल्लास और रंगों के पर्व पर दृष्टि ए विजन NGO द्वारा किया गया यह प्रयास उसी जीवंत सामाजिक चेतना का उदाहरण है।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी NGO की चेयरपर्सन सुश्री रजनी वर्मा और उनके समर्पित साथियों ने उन बच्चों के साथ होली मनाई, जिन्हें अक्सर समाज की मुख्यधारा से दूर समझ लिया जाता है, लेकिन जिनके भीतर भी उतनी ही रंगीन खुशियाँ और सपने बसते हैं। बस्ती में जाकर बच्चों के संग गुलाल उड़ाना, उनके हाथों में पिचकारी, मुखौटे, टोपी, रंग, चॉकलेट और खाद्य सामग्री देना यह केवल सामग्री वितरण नहीं था, बल्कि यह उस अपनत्व का उत्सव था, जो किसी भी बच्चे के जीवन में सबसे कीमती होता है। बस्ती के उन बच्चों के साथ होली मनाना, जिनके जीवन में रंग अक्सर अभावों से धुँधले पड़ जाते हैं, केवल एक कार्यक्रम नहीं था यह समाज के संवेदनशील चेहरे का दर्शन था। जब NGO की चेयरपर्सन सुश्री रजनी वर्मा और उनके सहयोगी बच्चों के बीच पहुँचे, तो वहाँ कोई दाता और कोई प्राप्तकर्ता नहीं था; वहाँ केवल रिश्ते थे, अपनापन था और बराबरी की भावना थी। गुलाल, पिचकारी, टोपी, मुखौटे, चॉकलेट और खाद्य सामग्री के साथ जो सबसे कीमती चीज़ बच्चों को मिली, वह थी सम्मान और साथ होने का एहसास।
जब बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान ने वातावरण को रंगों से भी अधिक चमकदार बना दिया, तब यह स्पष्ट हो गया कि सच्ची होली वही है, जहाँ दिल से दिल मिलते हैं। NGO के सचिव मनोज वर्मा का यह कहना कि हर वर्ष प्रमुख त्योहारों पर देवदूतों के साथ ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, यह दर्शाता है कि यह सेवा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक संकल्प है। चेयरपर्सन रजनी वर्मा की सोच इस पहल को और व्यापक अर्थ देती है। बेजुबान जीवों की सेवा से लेकर उन बच्चों के जीवन में मुस्कान लाने तक, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से शिक्षा और बचपन की खुशियों से वंचित रह जाते हैं यह दृष्टि समाज के लिए एक आईना है। साथ ही महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर NGO की सक्रियता यह बताती है कि सामाजिक परिवर्तन एक-दो दिशा में नहीं, बल्कि समग्र रूप से आगे बढ़ने से ही संभव है। इस मानवीय पहल की आत्मा और प्रेरणास्रोत NGO की चेयरपर्सन सुश्री रजनी वर्मा रहीं। उनका मानना है कि “त्योहार तभी सार्थक होते हैं, जब वे उन तक पहुँचें, जिनके जीवन में खुशियाँ सबसे कम आती हैं। चेयरपर्सन रजनी वर्मा ने भावुक स्वर में कहा कि “हमारे देश का भविष्य इन्हीं बच्चों में बसता है। अगर आज हम उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सके, तो कल का समाज कैसे खुशहाल होगा?” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दृष्टि ए विजन NGO का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि उन बच्चों और महिलाओं को यह एहसास दिलाना है कि समाज उनके साथ खड़ा है। बेजुबान जीवों की सेवा, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंदों तक सीधे पहुँच यही उनके कार्यों की मूल भावना है। आज भी लोग हैं जो दूसरों की खुशी में अपनी खुशी तलाशते हैं। आज भी ऐसी संस्थाएँ हैं जो यह मानती हैं कि सच्ची समृद्धि दूसरों के जीवन में रंग भरने से आती है। जरूरत है तो बस समाज के सक्षम लोगों के आगे आने की, हाथ बढ़ाने की, और इस मानवीय यात्रा का हिस्सा बनने की। दृष्टि ए विजन NGO का यह प्रयास यह याद दिलाता है कि अगर हर व्यक्ति या संस्था अपने स्तर पर थोड़ा-सा भी संवेदनशील हो जाए, तो समाज में बदलाव कोई सपना नहीं, बल्कि सजीव सच्चाई बन सकता है। क्योंकि अंततः, वही पर्व सबसे बड़ा होता है जब किसी और की मुस्कान ही हमारी सबसे बड़ी जीत बन जाए।
इस कार्यक्रम में सुमन रजक, मंजू रजक, आदिता वर्मा, संजय ग्रोवर, दिग्विजय सिंह, संजय गुप्ता, अभिषेक शिवहरे, मंगल सिंह, उदय सिंह, अभय खरे, दीपक चौधरी, शशांक वर्मा सहित अनेक सदस्यों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि जब सोच नेक हो, तो कारवाँ अपने आप बनता चला जाता है।

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