दीक्षांत समारोह में ‘ग्रहण’ — राज्यपाल का दौरा स्थगित, दूषित भोजन से टला बड़ा हादसा
(Anil tiwari)
शहडोल। जिले के पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह उस समय विवादों के घेरे में आ गया जब कार्यक्रम से ठीक पहले प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल का दौरा तकनीकी कारणों से स्थगित होने की खबर आई। बताया गया कि जिस हेलीकॉप्टर से महामहिम को शहडोल पहुंचना था, उसमें तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण उड़ान संभव नहीं हो सकी। राज्यपाल के न आने से समारोह की भव्यता पर पहले ही असर पड़ चुका था, लेकिन इसके बाद सामने आई दूषित भोजन की सूचना ने पूरे आयोजन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
गुपचुप तैयारियां, मीडिया से दूरी
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार दीक्षांत समारोह की तैयारियां गुपचुप तरीके से की थीं। मीडिया से दूरी बनाए रखी गई और कार्यक्रम की प्रचार-प्रसार की बजाय फंडिंग और मंचीय तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। कुलपति प्रो. रामशंकर स्वयं राज्यपाल को निमंत्रण देने गए थे और उनके आगमन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की भी चर्चा रही।
तकनीकी कारणों से राज्यपाल का कार्यक्रम स्थगित
समारोह शुरू होने से कुछ ही देर पहले सूचना आई कि हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के चलते राज्यपाल का शहडोल आगमन स्थगित कर दिया गया है। इस खबर से समारोह का उत्साह फीका पड़ गया। विद्यार्थियों और अतिथियों में निराशा का माहौल देखा गया।

दूषित भोजन से टला बड़ा हादसा
राज्यपाल के न आने की खबर के बीच ही एक और गंभीर मामला सामने आया। समारोह में वितरित किए जाने वाले भोजन को लेकर शंका जताई गई। जानकारी के अनुसार, भोजन तैयार कर पैकेट बनाए जा चुके थे, लेकिन वितरण से ठीक पहले भोजन से दुर्गंध आने की शिकायत सामने आई। अच्छी बात यह रही कि सतर्कता दिखाते हुए संबंधित फर्म ओम साईं ट्रेडर्स द्वारा तैयार भोजन को तत्काल किनारे करवा दिया गया और विद्यार्थियों में वितरित नहीं किया गया। यदि यह भोजन बांट दिया जाता तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था। सैकड़ों छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में मौजूद थे और किसी भी प्रकार की खाद्य विषाक्तता की घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
बच्चों को भूखे लौटना पड़ा
दूषित भोजन को रोकने के बाद छात्रों को वैकल्पिक रूप से बूंदी, नमकीन और रसगुल्ले वितरित किए गए। हालांकि यह व्यवस्था भी सीमित रही और कई विद्यार्थी पूर्ण भोजन से वंचित रहे। दूर-दराज से आए कई छात्र-छात्राएं बिना भोजन किए ही घर लौटने को मजबूर हुए।
कुलपति ने कही जांच की बात
पूरे मामले में कुलपति प्रो. रामशंकर ने जांच और कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि भोजन वितरण से पहले ही गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर उसे रोक दिया गया, जिससे संभावित खतरा टल गया। हालांकि यह भी तथ्य है कि आयोजन उनकी निगरानी और मार्गदर्शन में हो रहा था तथा भोजन का टेंडर भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ही दिया गया था। ऐसे में जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय प्रशासन
पिछले कुछ महीनों से विश्वविद्यालय की कार्यशैली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
राज्यपाल का कार्यक्रम स्थगित होना और दूषित भोजन की आशंका — इन दो घटनाओं ने मिलकर दीक्षांत समारोह की चमक फीकी कर दी। हालांकि समय रहते भोजन वितरण रोककर एक बड़े हादसे को टाल दिया गया, लेकिन पूरे आयोजन पर ‘काले दाग’ जैसा असर जरूर दिखाई दिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।