नोटिस पहुंचते ही अपना आपा खो बैठे नप के पूर्व अध्यक्ष
इंजीनियर के घर किया रात हंगामा, पुलिस में हुआ मामला कायम 

शहडोल। नियमों की दुहाई देने वाले और लोगों से कानून व्यवस्था का पालन करने तथा संस्थाओं के कार्यों में सहयोग प्रदान करने की उम्मीद रखने वाले भी जब सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो वे भी अराजकता से दूर नहीं रह पाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने में वे भी अपनी भूमिका निभाने लगते हैं। यही कारण है कि कोर्ट कचहरी में मामलों की भीड़ बढ़ती जा रही है। ब्यौहारी का एक मामला सामने आया है, जिसमे पूर्व नगरपरिषद अध्यक्ष उज्जवल केशरी ने हाल ही में नगरीय निकाय के इंजीनियर इंद्रवेश यादव के घर पहुंच कर उत्पात मचाया और उन्हे जान से मारने की धमकी। इस मामले में इंजीनियर द्वारा पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।
नियमविरुद्ध बनवा रहे मकान
जानकारी मिली कि उज्जवल केशरी द्वारा ब्यौहारी वार्ड नंबर 1 में बिना अनुमति अवैध रूप से मकान बनवाया जा रहा है और साथ ही आरा मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस मामले में नगर परिषद ने उन्हे नगरपालिका अधिनियम की धारा 187, 223 के तहत नोटिस जारी कर 7 दिवस में जवाब मांगा था। हैरानी की बात यह है कि उज्जवल केशरी पूर्व में उसी नगरपरिषद के अध्यक्ष थे और उसके हित में नागरिकों से नियमों का पालन कराते रहे हैं। उनके द्वारा नगरपरिषद के नियमों का पालन करने और नगरपरिषद का सहयोग प्रदान करने नागरिकों से अपील की जाती रही है। कुर्सी से उतरते ही आज वे स्वयं नियमों का उल्लंघन करने लगे हैं।
एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी
इस नोटिस के पहुंचते ही उज्जवल केशरी आपे से बाहर हो उठे और उन्होने 21 जनवरी 2023 को गाली गलौच कर धमकी दी थी। इसके कुछ देर बाद उज्जवल केशरी अपने साथियों टन्चू गुप्ता, रामराज गुप्ता एवं अन्य लोगों के साथ इंजीनियर के किराए के घर पहुंच कर दरवाजा पीटने लगे और घर के चारो ओर घूम कर गाली गलोज करते रहे। इस दौरान उन्होने निरंतर जान से मारने की धमकी दी। उस समय इंजीनियर इंद्रवेश के साथ कर्मचारी विद्यासागर गौतम भी मौजूद रहे। शोर शराबा सुनकर इंजीनियर केे मकान मालिक और पास पड़ोस के लोग इक_े होने लगे थे। भीड़ बढ़ती देखकर उत्पात मचाने वाले भाग निकले। इस मामले में पुलिस ने अपराध धारा 451, 294, 506, 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
गुण्डागर्दी से हैरान थे लोग
उज्जवल केशरी चूंकि पूर्व में नगरपरिषद के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं और उन्होने ब्यौहारी प्रथम नागरिक की गरिमा हासिल की थी। इतने गरिमा पूर्ण पद में रहने वाले व्यक्ति की ऐसी हरकत देख कर वार्ड के लोग हैरान थे और उनकी असभ्यता और बुरी बुरी गालियों से भरे शब्द लोगों को बार बार उद्वेलित कर रहे थे। एक तो उन्होने अपनी गरिमा के विपरीत आचरण कर नियमविरुद्ध मकान बनवाने व आरा मशीन का उपयोग करने जैसे कृत्य किए ऊपर से सडक़ छाप गुण्डों की शैली अख्तियार कर अपनी गरिमा खो दी।
नियम उल्लंघन की मिलती है प्रेरणा
कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि जब पूर्व नगर अध्यक्ष जैसे व्यक्ति के लिए नगरीय निकाय के नियम कायदे महत्व नहीं रखते दूसरे लोग ही नियमों के खूंटे से क्यों बंधे रहें? उज्वल केशरी का कृत्य नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। नियमों तो केवल चंद गरीबों के लिए हैं जो दबंग हैं उनके लिए अराजकता का रास्ता सबसे उपयोगी है। भले ही इससे सार्वजनिक हित प्रभावित होते हों।