अंतरराष्ट्रीय साहित्य मंच पर जीपीएम की गर्वित पहचान- संध्या को मिला “अंत्योदय योजना” लेख के लिए वैश्विक सम्मान
(घनश्याम ठाकुर)जीपीएम। जिले की प्रतिष्ठित साहित्यकार और गौरेला नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती संध्या राव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। विश्व हिंदी परिषद द्वारा भोपाल के विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में उनके लेख “अंत्योदय योजना” को विशिष्ट लेख के रूप में चयनित किया गया। परिषद द्वारा प्रकाशित विशेष पुस्तक में इस लेख को शामिल करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संध्या राव ने अपने लेख का प्रभावी और भावपूर्ण वाचन भी किया, जिसे देश–विदेश से आए साहित्यकारों और विशेषज्ञों ने सराहा।
सम्मेलन में साहित्य और पत्रकारिता जगत की दिग्गज हस्तियों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। विश्व हिंदी परिषद के अध्यक्ष केसी त्यागी, विपिन कुमार, भाषा विभाग भारत सरकार के डॉ. वी.एस. चौहान, पूर्व कमिश्नर रीवा–शहडोल संभाग डॉ. अशोक भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी, चित्रा त्रिपाठी, ऋचा अनिरुद्ध, साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव, सहला निगार, कुलपति आलोक चक्रवाल, बिलासपुर के डिप्टी कमिश्नर डी.एन. बाजपेई, अर्चना मिश्रा सहित अनेक नामचीन हस्तियां मौजूद रहीं। इसके अलावा चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आए साहित्यकारों ने भी सम्मेलन को वैश्विक ऊंचाई प्रदान की।
संध्या राव की साहित्यिक यात्रा उपलब्धियों से भरी रही है। उन्हें हिमाचल यूनिवर्सिटी से महादेवी वर्मा सम्मान, धमतरी शासकीय कॉलेज से मुंशी प्रेमचंद सम्मान, इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी दिल्ली और धर्मशाला यूनिवर्सिटी में शोधपत्र प्रस्तुति का गौरव प्राप्त है। मध्यप्रदेश लोक संस्कृति विभाग द्वारा नर्मदा परिक्रमा पर लिखे उनके लेख को भी विशेष सम्मान मिला था। पर्यावरण संरक्षण में सराहनीय कार्य के लिए भोपाल की संस्था द्वारा उन्हें बहुगुणा पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। उनके लेख और कविताएं देशभर की अनेक साहित्यिक पुस्तकों में प्रकाशित होती रही हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद संध्या राव ने कहा कि उनके साहित्यिक सफर में उनके पति राजेन्द्र शर्मा ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया है, जिसकी वजह से वे लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उनके सम्मान की खबर फैलते ही पूरे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजन, मित्र, सामाजिक संगठन और साहित्य प्रेमियों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे जिले का गौरव बताया।
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में मिला यह सम्मान न सिर्फ संध्या राव की लेखनी की शक्ति का प्रमाण है, बल्कि जीपीएम जिले को साहित्यिक मानचित्र पर और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करने वाला ऐतिहासिक क्षण भी है।