हितानंद को नई जिम्मेदारी…कौन लेगा अब  उनकी  जगह, सुगबुगाहट tej

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संगठन के नए मुखिया को लेकर मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति अचानक गर्म

(संजीव दुबे)

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की जिम्मेदारी बदले जाने के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि हितानंद की जगह अब संगठन की कमान किसे सौंपी जाएगी। इस एक बदलाव ने संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। संगठन का अगला मुखिया कौन बनेगा और शर्मा की जगह कौन लेगा, इसे लेकर अंदरखाने लगातार बैठकों और समीकरणों का दौर चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि संगठनात्मक रणनीति के तहत किया गया है। हितानंद शर्मा को मध्य क्षेत्र का सह-बौद्धिक प्रमुख बनाया गया है और उनका केंद्र जबलपुर रखा गया है। चंबल अंचल से आने वाले हितानंद शर्मा संघ पृष्ठभूमि के मजबूत संगठनकर्ता माने जाते हैं। वे लंबे समय तक विद्या भारती से जुड़े रहे हैं और इसी वैचारिक अनुशासन के कारण संगठन में उनकी पकड़ मजबूत रही है। प्रदेश संगठन महामंत्री रहते हुए उन्होंने न केवल संगठन को कसावट दी, बल्कि चुनावी रणनीति को माइक्रो-लेवल तक पहुंचाया।

बूथ सशक्तिकरण अभियान के दौरान जिस तरह से तकनीकी नवाचार, डेटा मैनेजमेंट और जमीनी नेटवर्क को एक साथ जोड़ा गया, उसे भाजपा संगठन में एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखा गया। विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत और लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीटों पर विजय के पीछे हितानंद शर्मा की पर्दे के पीछे की भूमिका को अहम माना जाता है। संगठन के भीतर यह भी माना जाता है कि उन्होंने मंडल स्तर तक लगातार प्रवास कर संगठन को सक्रिय बनाए रखा।

अब उनके स्थानांतरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश संगठन महामंत्री की कुर्सी पर अगला चेहरा कौन होगा। इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर कई धाराएं सक्रिय दिखाई दे रही हैं। एक ओर शिवराज सिंह चौहान खेमे की नजर इस पद पर बनी हुई है। माना जा रहा है कि शिवराज खेमे के कुछ पुराने और अनुभवी संगठनकर्ता इस जिम्मेदारी के लिए प्रयासरत हैं, ताकि संगठन और सरकार के पुराने संतुलन को बनाए रखा जा सके।

दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव के खेमे की सक्रियता भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव धीरे-धीरे संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह चर्चा भी जोरों पर है कि वे अपने भरोसेमंद और वैचारिक रूप से मजबूत चेहरे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

इन सभी अटकलों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। भाजपा में संगठन महामंत्री का चयन परंपरागत रूप से संघ की सहमति और मार्गदर्शन से होता रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि संघ किसी ऐसे नाम पर मुहर लगाएगा जो अनुशासन, कैडर मैनेजमेंट और वैचारिक प्रतिबद्धता के मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता हो। यही कारण है कि कई नामों पर मंथन चल रहा है, लेकिन अंतिम फैसला संघ की सहमति के बिना संभव नहीं माना जा रहा।

इसी बीच यह संभावना भी जताई जा रही है कि पार्टी नेतृत्व केंद्र से किसी अनुभवी संगठनात्मक चेहरे को मध्य प्रदेश भेज सकता है। बड़े राज्य होने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व संगठन में नई ऊर्जा और संतुलन के लिए बाहरी विकल्प पर भी विचार कर सकता है।

संगठनात्मक बदलावों के क्रम में तीन प्रचारकों की जिम्मेदारियों में भी फेरबदल किया गया है। सुरेंद्र मिश्रा को पूर्व सैनिक सेवा परिषद, मुकेश त्यागी को ग्राहक पंचायत और ब्रजकिशोर भार्गव को क्षेत्र गौ सेवा प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है। इन बदलावों को भी संगठन की आगामी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल पार्टी की ओर से संगठन महामंत्री के नाम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इतना साफ है कि हितानंद शर्मा की जगह किसे जिम्मेदारी मिलती है, यह फैसला आने वाले समय में मध्य प्रदेश भाजपा की दिशा और रणनीति तय करेगा। संगठन का अगला सरताज कौन होगा, इस पर सियासी निगाहें टिकी हुई हैं और प्रदेश की भाजपा राजनीति फिलहाल निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है।

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