बुराई में भी अच्छाई खोजोगे तो जीवन मजबूत बनेगा-मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
शहडोल। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रवचन मंच से संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा, अच्छा दिखना नहीं, अच्छा बनना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल धन, वैभव और बाहरी साधनों से जीवन श्रेष्ठ नहीं बनता। यदि व्यक्ति चार संकल्प ले ले मैं अच्छा देखूँगा, अच्छा करूँगा, अच्छा बनूँगा और अच्छे से रहूँगा, तो वह जीवन की ऊँचाइयों को अवश्य प्राप्त कर सकता है।
‘अच्छा’ दिखने की नहीं, ‘अच्छा’ बनने की जरूरत
मुनि श्री ने कहा कि अच्छा पहनना, अच्छा पाना या अच्छा दिखना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। मनुष्य को अपनी संपूर्ण ऊर्जा भीतर से श्रेष्ठ बनने में लगानी चाहिए। जब व्यक्ति भीतर से परिष्कृत होता है तो उसका व्यवहार, आचरण और व्यक्तित्व स्वतः ही उज्ज्वल हो जाता है। उन्होंने कहा, “धर्म बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि का माध्यम है। दृष्टि बदलेगी तो सृष्टि बदलेगी।”
कमियाँ नहीं, अच्छाइयाँ खोजने की सीख
बड़े आयोजनों में छोटी-मोटी कमियाँ रह जाना स्वाभाविक है, लेकिन यदि हम केवल कमियों पर ध्यान देंगे तो दृष्टिकोण नकारात्मक हो जाएगा। जो व्यक्ति हर जगह दोष तलाशता है, उसका जीवन कमजोर होता है। जो अच्छाइयों को अपनाता है, वही स्वयं भी मजबूत बनता है और समाज को भी सशक्त करता है।

दीक्षा कल्याणक प्रसंग में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए बताया कि जब मार्ग में एक मृत कुत्ता पड़ा था तो सभी ने घृणा से मुँह फेर लिया, पर श्रीकृष्ण ने उसके दाँतों की सुंदरता की प्रशंसा की। यही सकारात्मक दृष्टि है, जहाँ संसार बुराई देखता है, वहाँ महापुरुष अच्छाई खोज लेते हैं।
“प्रतिक्रिया पर नियंत्रण ही सच्ची शक्ति”
इस अवसर पर निर्यापक मुनि मुनि श्री प्रसाद सागर महाराज ने कहा कि भगवान ने अपने जन्म को संयम से सार्थक किया। उन्होंने संदेश दिया, “लोग हमारे बारे में क्या कहते हैं, यह हमारे हाथ में नहीं है; पर हम उसे बुरा न मानें, यह पूरी तरह हमारे हाथ में है।” उन्होंने सहनशीलता और संयम को जीवन की धारा बदलने का मूल मंत्र बताया।
मंच पर रहे ये संत
कार्यक्रम में मुनि श्री शीतलसागर महाराज, मुनि श्री संधानसागर महाराज एवं क्षुल्लक श्री समादर सागर महाराज मंचासीन रहे। संचालन ब्रह्मचारी अभय भैया, ब्रह्मचारी अशोक भैया एवं अमित बास्तु ने किया।
मुनि संघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं प्रसन्न जैन दीपू ने बताया कि दोपहर में आदिकुमार के राज्याभिषेक और स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना के नृत्य का मंचन किया गया। नीलांजना की आकस्मिक मृत्यु से आदिकुमार को वैराग्य उत्पन्न होता है और वे दीक्षा लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
रविवार को आहारचर्या
रविवार 1 मार्च को प्रातःकाल मुनि आदिसागर महाराज आहारचर्या के लिए प्रस्थान करेंगे। राजा श्रेयांस और राजा सोम का परिवार उनका पादप्रक्षालन कर आहार प्रदान करेगा। दीक्षा समारोह को देखने के लिए विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुढ़ार पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और वैराग्य के वातावरण में सराबोर हो गया।