पड़रेही में अवैध खनन अकेला खेल नहीं, पूरा सिंडिकेट सक्रिय कागज़ शून्य, अनुमति गायब…फिर भी दौड़ रहे थे डंपर पड़रेही में खनिज माफिया बेनकाब प्रशासन की कार्रवाई से हिला पूरा नेटवर्क
पड़रेही में अवैध खनन अकेला खेल नहीं, पूरा सिंडिकेट सक्रिय
कागज़ शून्य, अनुमति गायब…फिर भी दौड़ रहे थे डंपर
पड़रेही में खनिज माफिया बेनकाब प्रशासन की कार्रवाई से हिला पूरा नेटवर्क
ग्राम पड़रेही में हुई कार्रवाई केवल 4 डंपर और एक पोकलेन की जब्ती नहीं, बल्कि जिले में लंबे समय से फल-फूल रहे खनिज माफिया नेटवर्क का परदा फाश है। सूत्रों के अनुसार, यहां अवैध खनन किसी एक व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि संगठित और संरक्षित सिंडिकेट के जरिए संचालित किया जा रहा था। सूत्र कहते हैं सब कुछ जानकारी में चल रहा था
कटनी।। जिले में अवैध खनन सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि संगठित लूट का उद्योग बन चुका है और ग्राम पड़रेही में हुई कार्रवाई ने इसी कड़वे सच से पर्दा उठा दिया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर हुई प्रशासनिक छापेमारी में जो सामने आया, वह बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। 4 डंपर-ट्रिपर और एक पोकलेन मशीन जब्त होना महज़ कार्रवाई नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि खनिज माफिया बिना अनुमति, बिना दस्तावेज और बिना डर के खुलेआम कानून को रौंद रहे थे।

न अनुमति, न ट्रांजिट पास तो फिर खनन किसके इशारे पर?
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि खदान संचालक के पास मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अनिवार्य अनुमति तक नहीं थी। जब अनुमति ही नहीं, तो ट्रांजिट पास कैसे बन रहे थे?,डंपर दिन-रात कैसे दौड़ रहे थे? और सबसे बड़ा सवाल आख़िर किसकी शह पर यह खेल चल रहा था? खनिज विभाग के उपसंचालक रत्नेश दीक्षित ने साफ किया कि वैधानिक अनुमति के अभाव में खनिज परिवहन पूरी तरह अवैध था। यानी यह कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया संगठित अपराध है।
सिर्फ मजदूर नहीं, मास्टरमाइंड तक पहुँचेगी जांच?
प्रशासन की इस कार्रवाई ने खनिज माफियाओं के निचले सिरे को तो बेनकाब कर दिया, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या जांच असली सरगनाओं तक पहुँचेगी? या फिर मामला जब्त वाहनों तक सीमित रह जाएगा? स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि अवैध खनन बिना स्थानीय संरक्षण के संभव ही नहीं है। ऐसे में यह कार्रवाई प्रशासन की साख की भी परीक्षा है।



प्रशासन ने दिखाया तेवर, अब निरंतरता जरूरी
जिला टास्क फोर्स की बैठक में कलेक्टर तिवारी द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद यह पहली बड़ी ज़मीनी कार्रवाई मानी जा रही है। मौके पर एसडीएम बहोरीबंद राकेश कुमार चौरसिया, एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी, नायब तहसीलदार आकाशदीप नामदेव, सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा, खनिज निरीक्षक कमलकांत परस्ते और पुलिस बल की मौजूदगी यह बताती है कि प्रशासन अब दबाव में आने वाला नहीं।
साफ चेतावनी अब सिर्फ जब्ती नहीं, जवाबदेही भी चाहिए
नीचे वाले पकड़े गए, ऊपर वाले कब?
प्रशासन की कार्रवाई में वाहन जब्त हुए, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि खनिज का खरीदार कौन था? रोज़ का मुनाफा किस तक पहुंचता था? और सबसे अहम पर्दे के पीछे बैठे प्रभावशाली चेहरे कौन हैं? सूत्र बताते हैं कि अवैध खनन से होने वाली कमाई का हिस्सा तय चैनल से ऊपर तक पहुंचाया जाता था, जिससे लंबे समय तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि धरती की लूट अब चुपचाप नहीं होने दी जाएगी।
लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब संरक्षण देने वालों के नाम सामने आएँ अवैध खनन से कमाई गई संपत्ति पर कार्रवाई हो और माफियाओं की रीढ़ हमेशा के लिए तोड़ी जाए। अब निगाहें प्रशासन पर हैं क्या पर्दे के पीछे बैठे चेहरे भी बेनकाब होंगे? सूत्रों के मुताबिक सख्त निर्देशों के बाद ही मैदानी अमले की जमी हुई चुप्पी टूटी। इसी का नतीजा है कि अब पहली बार मौके पर जाकर सीधी कार्रवाई हुई।