अवैध ट्रस्ट–वैध प्रशासन? गरीब परिवार पर धारा 250, पेट्रोल की बोतल ने रोका बुलडोजर, ब्लैकलिस्ट योग्य ट्रस्ट की शिकायत पर प्रशासन सक्रिय, न्याय पर सवाल जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट मामला गरमाया जगन्नाथ मंदिर के पास गरीब परिवार पर बुलडोजर चलाने पहुंचा आत्मदाह की धमकी से पीछे हटा प्रशासन 80 साल पुराने आशियाने पर कार्रवाई

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अवैध ट्रस्ट–वैध प्रशासन? गरीब परिवार पर धारा 250, पेट्रोल की बोतल ने रोका बुलडोजर, ब्लैकलिस्ट योग्य ट्रस्ट की शिकायत पर प्रशासन सक्रिय, न्याय पर सवाल
जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट मामला गरमाया
जगन्नाथ मंदिर के पास गरीब परिवार पर बुलडोजर चलाने पहुंचा आत्मदाह की धमकी से पीछे हटा प्रशासन
80 साल पुराने आशियाने पर कार्रवाई
जगन्नाथ मंदिर परिसर के समीप बुधवार को उस समय हालात विस्फोटक हो गए, जब एक गरीब विश्वकर्मा परिवार के घर को तोड़ने प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुंचा। कार्रवाई की सूचना मिलते ही परिवार ने खुद को मकान के भीतर बंद कर लिया और पेट्रोल की बोतल हाथ में लेकर आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासन को तत्काल कदम पीछे खींचने पड़े और बिना कार्रवाई किए टीम को मौके से लौटना पड़ा। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई की सीमा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि एक गरीब परिवार की मजबूरी और सिस्टम के प्रति उसके अविश्वास को भी उजागर करता है।
कटनी।। जगन्नाथ मंदिर परिसर के समीप उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जिला प्रशासन की टीम एक गरीब विश्वकर्मा परिवार का मकान तोड़ने बुलडोजर लेकर पहुंची। कार्रवाई की भनक लगते ही परिवार ने खुद को घर के भीतर बंद कर लिया और हाथों में पेट्रोल की बोतल लेकर आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। हालात बिगड़ते देख प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े और बिना कोई कार्रवाई किए टीम को मौके से लौटना पड़ा।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई जगन्नाथ ट्रस्ट कमेटी के आवेदन पर की जा रही थी, जबकि वे पिछले लगभग 80 वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं। रोशन विश्वकर्मा ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ जगन्नाथ मंदिर के पास नजूल भूमि पर मकान और दुकान बनाकर जीवन-यापन कर रहे थे। कुछ समय पूर्व उनकी दुकान तोड़ दी गई और अब मकान हटाने की कोशिश की जा रही है।
अवैध ट्रस्ट के आदेश पर कार्रवाई का गंभीर आरोप
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब यह सामने आया कि जिस ट्रस्ट के नाम पर धारा 250 मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई की जा रही है, उसकी वैधता ही संदेह के घेरे में है। तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज है कि वर्तमान में कार्यरत तथाकथित नई ट्रस्ट समिति का कोई वैध पंजीयन प्रमाण उपलब्ध नहीं है। पुराने पंजीकृत पदाधिकारी या तो दिवंगत हो चुके हैं या पद पर नहीं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह नई समिति मध्यप्रदेश सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1951 के अंतर्गत कानूनी रूप से अस्तित्व में ही नहीं आती। इसके बावजूद उसी के आवेदन पर एक गरीब परिवार के खिलाफ कठोर राजस्व कार्रवाई की कोशिश की गई। इतना ही नहीं, जिन लोगों ने खुद को ट्रस्ट का पदाधिकारी बताकर यह कार्रवाई करवाई, उन्हीं के खिलाफ कोतवाली थाना कटनी में धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी गंभीर धाराओं—420, 467, 468, 471 और 403—के तहत एफआईआर दर्ज है। जांच रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने योग्य भी बताया गया है और मंदिर व भूमि प्रबंधन को प्रशासन के अधीन लेने की सिफारिश की गई है।

धारा 250 की कार्रवाई पर सवाल
कानून के जानकारों के अनुसार, धारा 250 तभी लागू हो सकती है जब आवेदनकर्ता वैध और अधिकृत भूमिधर या प्रबंधक हो। ऐसे में अपंजीकृत ट्रस्ट और विवादित पदाधिकारियों के आवेदन पर की गई कार्रवाई प्रारंभ से ही शून्य Void ab initio मानी जा सकती है।
इस प्रकरण में हाईकोर्ट से अंतरिम स्टे न मिलने को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही। बताया गया कि यह आदेश पुराने सीमांकन मामलों के प्रक्रियात्मक आधार पर था, न कि ट्रस्ट की वैधता या कार्रवाई के गुण-दोष पर। ट्रस्ट के अपंजीकृत होने, पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर और जांच रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण तथ्य उस समय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत ही नहीं किए गए थे।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। क्या एक अवैध ट्रस्ट कानून से ऊपर है? क्या जालसाजी के आरोपी लोगों के इशारे पर गरीब परिवारों को उजाड़ा जाएगा? और क्या प्रशासन का कर्तव्य न्याय करना है या अवैध तत्वों को संरक्षण देना? जगन्नाथ मंदिर के पास हुआ यह घटनाक्रम अब सिर्फ अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून, न्याय और संविधान की आत्मा से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है।यह पूरा घटनाक्रम केवल अतिक्रमण हटाने या जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णयों, कानून की निष्पक्षता और संविधान में निहित समानता के अधिकार की गंभीर परीक्षा है। जब जिस ट्रस्ट के अस्तित्व और वैधता पर स्वयं प्रशासन की जांच रिपोर्ट सवाल खड़े कर रही हो, उसके आवेदन पर गरीब परिवार को उजाड़ने की कोशिश की जाए, तो यह व्यवस्था के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। सवाल यह नहीं है कि जमीन किसकी है, सवाल यह है कि क्या कानून केवल कमजोरों पर ही सख्ती दिखाएगा? यदि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ, तो आज एक परिवार और कल कोई भी नागरिक इस बुलडोजर संस्कृति का शिकार हो सकता है। यह संघर्ष जमीन का नहीं, बल्कि कानून, न्याय और इंसानियत को बचाने का है।

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