कर्मचारियों के कद्दावर नेता कमाल खान को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष
(मोहम्मद शाकिब खान, मुख्य संवाददाता, गौरेला)
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में कांग्रेस संगठन को और अधिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से पार्टी ने एक अहम नियुक्ति की है। शासकीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच मजबूत पैठ रखने वाले वरिष्ठ नेता कमाल खान को जिला कांग्रेस कमेटी (जीपीएम) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के मिलने पर नव नियुक्त जिला उपाध्यक्ष कमाल खान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माननीय दीपक बैज, जिला अध्यक्ष गजमती भानु सहित पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।
संगठन को सशक्त बनाने का संकल्प
अपनी नियुक्ति पर श्री खान ने कहा, “पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं ने मुझ पर जो भरोसा जताया है और अपना आशीर्वाद दिया है, मैं उसका दिल की गहराइयों से हार्दिक अभिनंदन करता हूं। हम सभी कार्यकारिणी के सदस्य और जिले के सभी कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर संगठन को मजबूत बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे एवं आने वाले समय में कांग्रेस को और अधिक सशक्त बनाएंगे।”
42 वर्ष की बेदाग शासकीय सेवा और कर्मचारी हित में लंबा संघर्ष
कमाल खान का सामाजिक और कर्मचारी राजनीति में एक लंबा व बेदाग सफर रहा है। वे 42 वर्षों की सुदीर्घ शासकीय सेवा के बाद 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुए हैं।
उनके पास संगठन चलाने का दशकों का अनुभव है:वे 25 से 30 वर्षों तक तहसील शाखा मरवाही के निर्विरोध तहसील अध्यक्ष रहे।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के नया जिला बनने के बाद वर्ष 2020 से अपनी सेवानिवृत्ति (30 जून 2023) तक उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ’ के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वे कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन (जीपीएम) के कार्यकारी जिला संयोजक के पद पर भी रहे।
वर्तमान भूमिका: सेवानिवृत्ति के बाद भी वे निरंतर सक्रिय हैं और वर्तमान में ‘अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन’ जिला-जीपीएम के जिलाध्यक्ष के रूप में कर्मचारियों, पेंशनर्स और आम लोगों की सेवा कर रहे हैं।
पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा
कमाल खान की कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा हमेशा सर्वोपरि रही है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कोरबा लोकसभा क्षेत्र से अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए उम्मीदवारी का फॉर्म भरा था। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसियों के साथ हुई चर्चा के बाद, कांग्रेस पार्टी के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले लिया था।
उनकी इसी निष्ठा, संगठनात्मक क्षमता और कर्मचारी वर्ग में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें जिला उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके इस मनोनयन से जिले के कर्मचारियों, पेंशनर्स और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।