अनूपपुर में कानून व्यवस्था पर सवाल: भालूमाड़ा थाना क्षेत्र की जमुना कॉलोनी में पुलिस मौजूदगी में गुंडागर्दी, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

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अनूपपुर। जिले के भालूमाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुना कॉलोनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में खुलेआम मारपीट, गाली-गलौज और दबंगई का नजारा दिखाई दे रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों के हौसले पस्त होते नजर नहीं आ रहे, बल्कि वे खुलेआम चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना जमुना-कोतमा क्षेत्र की है, जहां पिछले कुछ समय से असामाजिक तत्वों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति के साथ मारपीट करते दिख रहे हैं, जबकि आसपास अफरा-तफरी का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन हालात को नियंत्रित करने में उनकी भूमिका सवालों के घेरे में है।
क्या अब जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे?
इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। रहवासियों का कहना है कि जब पुलिस की मौजूदगी में ही इस तरह की गुंडागर्दी हो रही है, तो आम नागरिक आखिर किस पर भरोसा करे? क्या कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है?
जमुना कॉलोनी और कोतमा क्षेत्र के कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र में आए दिन छोटे-बड़े विवाद होते रहते हैं, लेकिन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती। इससे असामाजिक तत्वों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।
शहडोल पुलिस रेंज की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
यह मामला केवल एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी शहडोल पुलिस रेंज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि पुलिस की मौजूदगी में अपराधी बेखौफ होकर मारपीट कर रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि या तो इंटेलिजेंस सिस्टम कमजोर पड़ चुका है या फिर कानून का प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
पुलिस महकमे की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। क्षेत्र में यदि असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, तो उनकी निगरानी, हिस्ट्रीशीट खोलना और नियमित पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाएं क्यों प्रभावी नहीं हैं  यह बड़ा सवाल है।
दहशत में जी रहे लोग
स्थानीय व्यापारियों और परिवारों का कहना है कि शाम होते ही माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। महिलाएं और बुजुर्ग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। लोग खुलकर लिख रहे हैं कि यदि पुलिस के सामने ही गुंडागर्दी हो रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?
पुलिस विभाग की चुप्पी
घटना को लेकर आधिकारिक बयान अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। यदि वीडियो वास्तविक है और पुलिस की मौजूदगी में यह सब हुआ है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। केवल औपचारिक कार्रवाई या खानापूर्ति से जनता का विश्वास वापस नहीं आएगा।
क्या होगी सख्त कार्रवाई?
अब निगाहें जिला पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। क्या आरोपियों पर कठोर धाराओं में मामला दर्ज कर त्वरित गिरफ्तारी होगी? क्या लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच बैठेगी?
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह संदेश जाएगा कि कानून का भय समाप्त हो चुका है और अपराधी तंत्र पर भारी पड़ रहे हैं।

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