कानून बनाम दबंगई:- नाम लेकर धमकी, शासकीय काम में बाधा निगम अध्यक्ष बोले–अत्यंत निंदनीय, छवि खराब करने की साजिश कटनी में शासकीय कार्य में बाधा और अधिकारियों को धमकाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल घटनाक्रम को लेकर नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने कड़ा बयान जारी किया है।

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कानून बनाम दबंगई:- नाम लेकर धमकी, शासकीय काम में बाधा
निगम अध्यक्ष बोले–अत्यंत निंदनीय, छवि खराब करने की साजिश
कटनी में शासकीय कार्य में बाधा और अधिकारियों को धमकाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल घटनाक्रम को लेकर नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने कड़ा बयान जारी किया है। निगम अध्यक्ष ने साफ कहा है कि शासकीय कर्मचारियों को धमकाना, दबाव बनाना और जनप्रतिनिधियों का नाम लेकर काम रुकवाने की कोशिश कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है।
कटनी।। शासकीय कार्य के दौरान अधिकारी-कर्मचारियों को धमकाने और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का नाम लेकर दबाव बनाने का मामला अब कानून बनाम दबंगई की बड़ी मिसाल बनता जा रहा है। कोतवाली थाना तिराहा क्षेत्र में सामने आए इस घटनाक्रम को लेकर नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे अत्यंत आपत्तिजनक, निंदनीय और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला कृत्य बताया है। निगम अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दद्दा धाम निवासी श्याम सुंदर पांडे द्वारा निगम अध्यक्ष एवं नगर निगम आयुक्त सुश्री तपस्या परिहर का नाम लेकर शासकीय कर्मचारियों को धमकाने से उनका या आयुक्त का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इसे जानबूझकर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की छवि खराब करने का प्रयास करार दिया।
निगम अध्यक्ष ने कहा कि शासकीय कार्य के दौरान धमकी देना, दबाव बनाना या वरिष्ठ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का नाम लेकर कार्य में बाधा डालना सीधे तौर पर कानून व्यवस्था का उल्लंघन है। ऐसे कृत्य प्रशासनिक अनुशासन को तोड़ने के साथ-साथ समाज में गलत संदेश देते हैं।
प्रशासनिक साख पर हमला बर्दाश्त नहीं
श्री पाठक ने दो टूक कहा कि नगर निगम प्रशासन नियम, कानून और पारदर्शिता के तहत कार्य करता है। अधिकारी-कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और निर्भीक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। दबंगई के जरिए प्रशासनिक कार्य रोकने की कोशिश किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर और ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति शासकीय तंत्र को डराने-धमकाने का दुस्साहस न कर सके। कुल मिलाकर, यह मामला अब कानून बनाम दबंगई का बन चुका है देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।

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