संगठन को छोड़ ठाकुरवाद को दे रहे बढ़ावा
(शुभम तिवारी+7879308359)
शहडोल। लगभग 7 से 8 वर्षों के बाद शहडोल में त्रिस्तरीय पंचायतराज चुनाव हो रहे हैं, पंचायतों के चुनाव भी लगभग संपन्न हो गए हैं, वहीं जिले के धनपुरी, बकहो, ब्यौहारी व खांड नगर परिषद के भी चुनाव संपन्न हो चुके हैं, इन सभी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के टिकट और उसके समर्थन को लेकर भारी होड़ देखी गई, प्रदेश ही नहीं बल्कि देश व विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण और संगठन के साथ सत्ता में भाजपा के दबाव व आम जनों में उसकी लोकप्रियता के कारण अन्य दलों के लोग न सिर्फ पार्टी से टिकट पाने और चुनाव लडऩे की चाहत रख रहे हैं, बल्कि जो नतीजे भी सामने आए हैं उसमें मतदाताओं ने अन्य दलों की अपेक्षा भारतीय जनता पार्टी पर ज्यादा भरोसा दिखाया है, हालांकि नगरी निकाय के चुनावों के नतीजों से बीते चुनाव की तुलना की जाए तो पार्टी की साख काफी गिरी है, यही नहीं पार्टी के पार्षद भी चुनकर कम आए और मतों का प्रतिशत काफी कम रहा। बहरहाल त्रिस्तरीय पंचायत राज चुनाव संपन्न हो चुके हैं और आने वाले दिनों में जनपद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से लेकर जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव होने है।
ठाकुरवाद थोपने का आरोप
शहडोल जिले में जनपद पंचायत की ब्योहारी सीट को छोड़ दें तो गोहपारू, जयसिंहनगर व सोहागपुर और बुढ़ार जनपद की अध्यक्ष की सीट पहले की तरह ही आरक्षित है, लेकिन उपाध्यक्ष की सीट को लेकर बीते वर्षो की तरह इस बार भी काफी कशमकश है, बावजूद इसके ब्योहारी से लेकर जिले के चार अन्य जनपदों में जनपद उपाध्यक्ष के लिए भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कमल प्रताप सिंह पर ठाकुरवाद थोपने के आरोप लग रहे हैं। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी ने पांचो जनपदों में जिन चुने हुए प्रतिनिधियों को जनपद उपाध्यक्ष के लिए आगे किया है, उन्हें देखने से आरोपों की पुष्टि भी होती है यही नहीं नगरीय निकायों में भी कमल प्रताप सिंह पर भारतीय जनता पार्टी के घोषित प्रत्याशियों में वरिष्ठ और अन्य जाति के लोगों को तरजीह न देकर क्षत्रिय समाज के लोगों को वह भी खासकर जो क्षत्रिय बिहार प्रांत से जुड़े हुए हैं उन्हें ज्यादातर तरजीह दी जा रही है।
तो जनपदों के उपाध्यक्ष होंगे क्षत्रिय
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कमल प्रताप सिंह के ऊपर जातिवाद के जो आरोप लग रहे हैं, वह निराधार नहीं है जिले के पांचों जनपदों पर क्रम से नजर डाली जाए तो कनिष्ठ होने के बावजूद भाजपा जिन प्रत्याशियों को उपाध्यक्ष पद के लिए आगे कर रही है उसमें एक या दो नहीं बल्कि पांचो जनपदों में उपाध्यक्ष के दावेदार क्षत्रिय ही हैं, जिले की बुढ़ार जनपद में केशवाही से चुनाव जीत कर हर्ष सिंह का नाम जनपद उपाध्यक्ष के लिए आगे है, जबकि यहां से भाजपा के कद्दावर नेता अशोक मिश्रा की पत्नी श्रीमती सावित्री मिश्रा भी चुनाव जीत कर आई हुई है लेकिन उन्हें शायद ब्राह्मण होने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यही स्थिति सोहागपुर जनपद की है जहां कमल प्रताप सिंह और उनके सबसे करीबी मित्र व भाजपा नेता मीनू सिंह के अभिन्न शक्ति सिंह को जनपद उपाध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी ने संगठन और पार्टी के सिद्धांतों को भी किनारे कर दिया है,जयसिंहनगर जनपद पंचायत में वार्ड नंबर 1 से चुनाव जीतकर आए शिव प्रताप सिंह उर्फ शिबू सिंह की पत्नी श्रीमती रक्षा सिंह जो पौड़ी, रेउसा क्षेत्र से चुनकर आए है, उनका नाम सबसे आगे चल रहा है इसी क्रम में ब्योहारी जनपद से के वार्ड नंबर 6 से चुनकर आए प्रीतू सिंह का नाम आगे किया गया है, वही गोहपारू जनपद से पूर्व में भी एक बार उपाध्यक्ष बन चुके सुधीर सिंह पर दोबारा मोहर लगने की पूरी संभावना बनी हुई है, पांचों जनपदों से ठाकुर समाज के प्रतिनिधि के नाम आगे आना महज संयोग नहीं है।
सोहागपुर में दागी के ऊपर दांव
संभागीय मुख्यालय शहडोल की सोहागपुर जनपद पंचायत पर ही नजर डाली जाए, तो यहां 25 जनपद सदस्य चुनाव में जीत कर आए हैं, क्योंकि चुनावों के समय जनपद प्रत्याशियों को राष्ट्रीय पार्टियों के या क्षेत्रीय पार्टियों के सिंबल नहीं मिले थे, हालांकि पार्टी ने अपनी ओर से प्रत्याशियों को अधिकृत जरूर किया था, लेकिन नतीजों पर नजर डाली जाए तो 25 जनपद सदस्यों वाली सोहागपुर जनपद में क्षत्रिय समाज के सिर्फ दो ही प्रत्याशी चुनकर सामने आए हैं, सर्वाधिक प्रत्याशी कोल समाज से सात और उसके बाद ब्राह्मण समाज से छह प्रत्याशी चुनकर सामने आए हैं, बैगा समाज से 5 और उसके बाद क्षत्रिय समाज से महज 2 प्रत्याशी सुनकर सामने आए हैं, ऐसा नहीं है कि चुने हुए बाकी 23 प्रत्याशियों में से कोई भी भारतीय जनता पार्टी का नहीं है यहां भारतीय जनता पार्टी के द्वारा वार्ड नंबर 4 से चुनाव जीतकर आए कुंवर शक्ति सिंह पिता ललन सिंह पर दाव लगाने और उसे उपाध्यक्ष प्रत्याशी बनाए जाने की बातें सामने आ रही हैं, शक्ति सिंह के राजनैतिक और सामाजिक जीवन पर नजर डाली जाए तो स्थानीय थानों में उसके अपराधों की लंबी सूची है उसके ऊपर रासुका जैसी कार्यवाही भी हुई है, बावजूद इसके जिला अध्यक्ष कमल प्रताप सिंह और उनके खास मीनू सिंह के चहेते शक्ति सिंह पर न सिर्फ दांव लगाने की बात कही जा रही है, बल्कि यह बात भी सामने आई है कि कई सदस्यों को तो कमल प्रताप सिंह के होटल एमआर सिटी में भी रखा गया है और मैनेजमेंट का पूरा खेल खुद कमल प्रताप सिंह ने प्रत्याशियों को समर्थन के लिए दो 200000 देकर पूरा भी किया है, हालांकि यह सब चर्चा का विषय है इनकी अधिकारिक पुष्टि ना तो भाजपा ने की है और ना ही किसी अन्य ने लेकिन ठाकुर वाद के आरोप और दागी पर दांव लगाने का खेल तो खुलकर सामने आ ही चुका है।
नगरीय निकायों में भी यही हाल
जिले के चार नगरीय निकायों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब वह उपाध्यक्ष से लेकर अध्यक्ष की दौड़ चल रही है, क्योंकि इन दोनों पदों के लिए पार्षदों को ही अपने मताधिकार का उपयोग करना है इसलिए भारतीय जनता पार्टी के संगठन व कमल प्रताप सिंह के जातिवाद की जुगलबंदी जनपद की तरह निकायों में भी हावी नजर आ रही है, जिले की नवगठित नगर परिषद बकहो में बीते वर्ष ही यहां कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने के साथ ही बकहो का नागरिक बनने वाले ठाकुर समाज के महेंद्र सिंह की पत्नी श्रीमती रेखा सिंह पर दांव लगाने की पूरी तैयारी की जा चुकी है, यह बात भी सामने आई कि ठाकुरवाद और उसमें फिर बिहारी ठाकुरवाद यह दोनों समीकरण, प्रत्याशी के चयन का पैमाना तय करते हैं। इसी तरह चुनावों से पहले टिकट वितरण में भी जिस तरह की मनमानी और ठाकुरवाद भाजपा संगठन के द्वारा चलाया गया, शायद उसी का खामियाजा है कि जिले के चारों नगरीय निकायों में भारतीय जनता पार्टी कि पूर्व में सत्ता होने के बाद वर्तमान में पार्षद न सिर्फ कम हुए बल्कि सत्ता के लिए भारतीय जनता पार्टी को मशक्कत भी करनी पड़ रही है।